हैरिटेज विंडो - महर्षि द्रोणाचार्य का साधना स्थल है द्रोणनगरी दूनी

हैरिटेज विंडो : महर्षि द्रोणाचार्य का साधना स्थल है द्रोणनगरी दूनी

 

By: pawan sharma

Published: 26 Oct 2020, 07:23 PM IST

दूनी. जयपुर-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग 52 के टोंक एवं देवली के मध्य सरोली मोड़ से तीन किलोमीटर अंदर सवाई माधोपुर एवं बूंदी राज्य राजमार्ग पर बसे दूनी कस्बे का इतिहास एक हजार से अधिक पुराना रहा है। देश-प्रदेश में कस्बे की पहचान प्रसिद्ध दूणजा माता मंदिर से है।

कस्बे के मतदाताओं की संख्या 7 हजार 500 तो आबादी लगभग 15 हजार है। कस्बे में तहसील कार्यालय के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 3बालक-बालिकाओं के अलग रा.उ.मा. विद्यालय, प्रथम श्रेणी आयुर्वेदीक औषधालय, पशु चिकित्सालय, राज्य बीज विधायन केन्द्र, 220केवी ग्रिड बिजली सब स्टेशन, वेयर हाउस, गौण मंडी सहित एक निजी महाविद्यालय सहित करीब एक दर्जन निजी विद्यालय भी संचालित है।


जिले की सबसे बड़ी पंचायत दूनी व्यापारिक दृष्टि से मजबूत है, तो खेती-बाड़ी एवं पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। युवां सहित अन्य शिक्षा, चिकित्सा, पुलिस, सेना सहित अन्य विभागों में पदस्थापित है। आवागमन की दृष्टि से चारों ओर राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्यराज मार्ग सहित सडक़ों का जाल बिछा है, लेकिन लोगों को कस्बे में रोडवेज बसों बंद होने का मलाल है। वही दूनी रियासत के रणबाकूरों की वीरता के किस्से आज भी लोगों की जुबां पर है। यहा के गढ़ पैलेस सहित पुराने मंदिरों की कारीगरी बरबस इतिहास की याद दिलाती है।

श्रद्धालुओं का उमड़ता है सैलाब

दूनी सरावेर किनारे पौराणिक दूणजा माता मंदिर देश-प्रदेश के श्रद्धालुओं की आस्था, श्रृद्धा एवं विश्वास का प्रतीक हैं जहां बारह महिनों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता हैं। विशेषकर नवरात्रों में मंदिर में पेर रखने की जगह नहीं मिल पाती। सुबह पुजा एवं शाम को माता मंदिर में बजने वाले घंटे-घडिय़ाल की धुन व जयकारों की गुंज एवं सरोवर के नीर को छू आने वाले ठंडी हवाएं सुकुन देती हैं।

इतिहासकारों के अनुसार दूणजा माता का इतिहास महर्षि द्रोणचार्य की साधना एवं तपोबल से जुड़ा हैं। किदवंती के अुनसार दूणजा माता स्वयं पाषाण प्रतिमा में परिवर्तित हुई थी। महर्षि द्रोणाचार्य की तपस्या से कस्बे का नाम द्रोणनगरी तो माता मंदिर की दूणजा माता के नाम से पहचान हुई। बाद में द्रोणनगरी दूनी के नाम में परिवर्तित हुई।

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