करोड़ों की संपदा का कोई नहीं रखवाला, मयखाने में बदल गई कई सरकारी इमारतें

करोड़ों की संपदा का कोई नहीं रखवाला, मयखाने में बदल गई कई सरकारी इमारतें

 

By: pawan sharma

Published: 15 Nov 2020, 12:12 PM IST

टोंंक(देवली). उपखंड क्षेत्र की कई सरकारी इमारतें या तो खंडहर बन गई या मयखाने में तब्दील हो रही है। सरकार की ये ऐसी परिसम्पत्तियां है,जिनमें सरकार अपने नए दफ़्तर खोल सकती है, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा। शहर के बीच बना पीडब्ल्यूूडी डाकबंगला और दौलता मोड़ का आरटीडीसी मिडवे किसी वक्म देवली की शान हुआ करते थे, लेकिन आज ये ख़ूबसूरत भवन वीरान पड़े हैं।

आरटीडीसी का मिडवे तो मयखाना बन गया है,जहां रोज रात चोरी-छिपे नशा करने वालों को जमावड़ा लगा रहता है। पीडब्ल्यूडी डाक बंगला भी कुछ ऐसे ही दौर से गुजर रहा है। उपखंड के आवां कस्बे के बीचों-बीच बनी बरसों पुरानी सेकण्डरी स्कूल का तीन मंजिला भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकता है।

आवां का जलदाय विभाग, पुरानी पीएचसी, एएनएम आवास, कृषि पर्यवेक्षक भवन, पुराना बालिका विद्यालय भवन भी बेकार पड़े है। दूनी तहसील मुख्यालय की बात करें तो यहां का पुराना तहसील भवन और प्राइमरी स्कूल का भी यही हाल है। जूनियां पंचायत के सरोली मोड पर स्थित बीसलपुर परियोजना की आवासीय कॉलोनी भी कुछ ही हालत हैं।

हालांकि परियोजना ने इसको पेयजल विभाग को पम्पसेट के लिए सुपुर्द कर दिया। उपतहसील नगरफ़ोर्ट के सरकारी अस्पताल की इमारत भी अनदेखी के कारण खंडहर हो चली है। वहीं पुराने पटवार भवन पर अतिक्रमियों ने कब्जा जमा लिया। इस तरह अन्य पंचायत मुख्यालयों पर भी बने पटवार भवन एवं अन्य सरकारी इमारतें सार संभाल के अभाव में जीर्णशीर्ण हो रही है या फिर अतिक्रमण की भेंट चढऩे लगी है।वहीं पंचायत समिति की अधिकांश ग्राम पंचायत कार्यालय अब खाली पड़े है। काम सेवा केंद्र में चल रहा है।

विस्थापित कॉलोनियों में भी नहीं हो रही सार संभाल

बीसलपुर परियोजना के डूब में आए विस्थापितों के लिए टोंक जिले में करीब 82 पुनर्वास कॉलोनी बनाई गई, जिसमें सर्वाधिक कॉलोनी देवली उपखण्ड क्षेत्र में है। इन कॉलोनी में सरकार की पुनर्वास नीति अनुसार भूखण्ड संख्या के आधार पर स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, स्वास्थ्य केंद्र, गोदाम, पार्क, खेल मैदान आदि सुविधाएं देकर ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है, लेकिन कॉलोनियों में बनाए सुविधा भवनों पर ध्यान नहीं देने से अतिक्रमण हो रहे है या फिर रखरखाव की कमी से जीर्णशीर्ण होने लगे है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए बनी कॉलोनियां भी काम पूरा होने के बाद बीसलपुर डेम,राजमहल कॉलोनी में कई क्वार्टर खाली पड़े है।

परियोजना की पुनर्वास कॉलोनियां ग्राम पंचायतों को सुपुर्द कर चुके है। वहां बनाए सुविधा भवनों का उपयोग एवं सार संभाल की जिम्मेदारी पंचायतों की है।
रविन्द्र कटारा,अधिशाषी अभियंता बीसलपुर परियोजना देवली

अगर कोई भी सरकारी भवन उपयोग में नहीं आ रहा है तो अन्य विभाग की मांग पर सामान्य प्रशासन विभाग के नियमानुसार जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी आवंटन प्रस्ताव पर कार्यवाही कर सकती है।
भारत भूषण गोयल,
उपखण्ड अधिकारी देवली

pawan sharma
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