कैसे सफल होगा निरोगी राजस्थान अभियान, 22 पद रिक्त, 4 डेपुटेशन पर, कैसे मिलेगा रोगियों को लाभ

राज्य सरकार निरोगी राजस्थान का ढिंढोरा पीट रही हैं, लेकिन अस्पतालों में रिक्त पदों तथा व्यवस्थाओं को सुधारने को लेकर सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं कर रही हैं।

By: pawan sharma

Updated: 01 Mar 2020, 03:35 PM IST

पीपलू (रा.क.) राज्य सरकार निरोगी राजस्थान का ढिंढोरा पीट रही हैं, लेकिन अस्पतालों में रिक्त पदों तथा व्यवस्थाओं को सुधारने को लेकर सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं कर रही हैं। कहने को तो पीपलू उपखंड मुख्यालय पर सरकारी स्तर का सामुदायिक चिकित्सालय है, लेकिन इसका समुचित लाभ अधिकतर चिकित्साकार्मिकों के प्रतिनियुक्ति पर होने से क्षेत्र के रोगियों को नहीं मिल पा रहा हैं, जो चिकित्सक लगे हुए है, वो भी पद के विरुद्ध लगे हुए है।


लोगों ने बताया कि सरकार ने क्षेत्र के लोगों को बेहत्तर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर यहां की पीएचसी को 1995 में सरकार ने सीएचसी में क्रमोन्नत किया था। इसके बाद यहां एक करोड़ रूपए की लागत से चिकित्सालय भवन का विस्तार, जांच संबंधी जरूरत के संसाधन के प्रबंध हुए है तथा चिकित्सकों व चिकित्सा कर्मियों के पद सृजित करते हुए इनकी नियुक्तियां की, लेकिन कई कार्मिकों को सीएमएचओ ने अन्यत्र लगा दिया। इससे एक ओर चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित है। साथ ही अस्पताल में मौजूद मंहगे उपकरण अनुपयोगी होकर जंग खा रहे हैं।

यह लगे है प्रतिनियुक्ति पर
जानकारी अनुसार सीएचसी पीपलू में 4 कार्मिक डेपुटेशन पर है, जिनमें से 2 चिकित्सक है। चिकित्सालय के कनिष्ठ विशेषज्ञ शिशु रोग डॉ. आसिफ हुसैन को तो जिले से बाहर 8 मार्च 2019 से ही जयपुरिया अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा हैं।

वहीं चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार चौधरी को भी 8 दिसंबर 2019 से कार्य व्यवस्थार्थ जनता क्लिनिक पर प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा हैं। इसके अलावा वरिष्ठ सहायक सत्यनारायण जाट को भी 12 सितंबर 2019 से ही बीसीएमओ मालपुरा का अतिरिक्त कार्यभार देकर प्रतिनियुक्ति पर लगाया हुआ हैं।

वहीं एनआरएचएम में आयुष कंपाउंडर राजेशकुमार सैनी को भी 5 दिसंबर 2019 से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पासरोटिया पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया हुआ हैं। प्रतिनियुक्ति पर लगे हुए सभी कार्मिक वेतन पीपलू सीएचसी से ही आहरित कर रहे हैं।

यह 19 पद पहले ही रिक्त
चिकित्सालय में कनिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसन, कनिष्ठ विशेषज्ञ सर्जरी, कनिष्ठ विशेषज्ञ निश्चेतन, कनिष्ठ विशेषज्ञ स्त्री रोग के 1 पद स्वीकृत हैं, जो रिक्त पड़े हुए हैं। तकनीकी सहायक 1, वरिष्ठ लेब टेक्नीशयन 1, लेब सहायक 2 स्वीकृत पद हैं जो भी रिक्त हैं। वहीं सहायक रेडियोग्रफर के स्वीकृत 2 में से 1, नर्स ग्रेड प्रथम के स्वीकृत 2 में से 2, प्रसाविका 1 में से 1, क्लिनिकल अभि. सहायक 3 में से 3, वार्ड ब्वाय के 7 में से 4 पद रिक्त पड़े हुए हैं।

इनमें से कई पद तो वर्षों से रिक्त ही पड़े हैं। पूर्व में यहां रेडियोग्राफर की पोस्ट थी, जिसे 2013-14 में समाप्त कर दिया। चिकित्सालय में आने वाले रोगियों को सरकार की मंशा के मुताबिक समुचित चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है।

मरहम पट्टी करके रेफर
विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में यह चिकित्सालय रोग निदान में अपनी पूर्ण भूमिका नहीं निभा रहा हैं। यहां महज हल्की चोट पर मरहम पट्टी ही की जा रही हैं। गंभीर अवस्था में रोगी को तुरंत रेफर कार्ड थमा दिया जाता हैं, जिस पर उसे टोंक या जयपुर ले जाना पड़ता था।


जंग खा रहे है उपकरण
पीपलू सामुदायिक चिकित्सालय में रिक्त पदों के चलते एक्सरे की मशीनें, शल्य चिकित्सा, ऑपरेशन थियेटर के उपकरण अनुपयोगी पड़े जंग खा रहे हैं। चिकित्सालय परिसर में चारदीवारी का कार्य अधूरा होने से आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। वहीं पानी की समस्याएं बोरिंग लगने के बाद भी पीने योग्य नहीं होने से हल नहीं हो सकी है।

संस्थागत प्रसव में परेशानी
वहीं महिला चिकित्सक के अभाव में संस्थागत प्रसव भी प्रभावित हो रहे है। वहीं वार्ड में बेड की कमी होने से मरीजों को भर्ती करने में काफी परेशानी होती है।


इनका कहना है
पीपलू सीएचसी में कई रिक्त पद है, जिन्हें भरे जाने के लिए सीएमएचओ सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व जिला कलक्टर को भी बैठकों में लिखित व मौखिक बताया गया हैं। लेकिन रिक्त पदों पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पदस्थापन के अभाव में समस्याएं आती हैं।
डॉ. रामअवतार माली, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सीएचसी पीपलू

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