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आरजीएचएस योजना बनी जंजाल: दवाइयां नहीं मिलने से दर-बदर भटक रहे कार्मिक

locationटोंकPublished: Dec 09, 2023 11:00:39 am

Submitted by:

pawan sharma

राज्य सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों के उपचार के लिए चलाई जा रही आरजीएचएस योजना में कर्मचारियों और पेंशनर्स को सरकारी व निजी अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिल रही है। कर्मचारियों को जेब से पैसा खर्च कर निजी मेडिकल की दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।

 

आरजीएचएस योजना बनी जंजाल: दवाइयां नहीं मिलने से दर-बदर भटक रहे कार्मिक
आरजीएचएस योजना बनी जंजाल: दवाइयां नहीं मिलने से दर-बदर भटक रहे कार्मिक
राज्य सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के उपचार के लिए चलाई जा रही आरजीएचएस योजना में कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों को सरकारी व निजी अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिल रही है। कर्मचारियों को जेब से पैसा खर्च कर निजी मेडिकल की दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
इससे राज्य कर्मचारियों पर आर्थिक भार पड़ रहा है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों व अन्य कार्मिकों की बार-बार शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। सरकारी अस्पताल अपने इलाज के लिए आने वाले सेवानिवृत्त कार्मिकों को आरजीएचएस योजना में चिकित्सकों द्वारा दवाइयां नहीं लिखी जा रही है। ना ही उन्हें मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत सरकारी अस्पताल की दवाईयां नहीं दी जा रही है।
इस संदर्भ में पेंशनर समाज संघ और राज्य कार्मिकों के विभिन्न संगठनों ने योजना में नि:शुल्क सभी प्रकार की दवाइयों के लिए आलाधिकारियों को कई मर्तबा शिकायत कर चुके हैं। जिले के चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि दवाइयों का भुगतान अटकने से समस्या आ रही है। जल्द निस्तारण होगा।
ये बोले कर्मचारी...

सेवानिवृत्त शिक्षक बरकत अली ने बताया कि आरजीएचएस योजना में उपचार के लिए दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाईयां अस्पताल तथा चिन्हित दुकानों पर नहीं दी जा रही है।जिससे सभी सेवानिवृत्त एवं सरकारी कर्मचारियों को अपने निजी राशि खर्च कर महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है।
बाहर की दवाइयां लिख रहे है

उस्मान गनी ने बताया कि आरजीएचएस योजना में कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों को सरकारी व निजी अस्पताल में ओपीडी में चिकित्सकों की ओर से अस्पताल की नि:शुल्क दवाइयां नहीं दी जा रही है। चिकित्सक अस्पताल से बाहर की दवाइयां लिख रहे हैं। मरीज का उपचार किया जा रहा है।
महंगे दामों पर लेना पड़ रहा है

सेवानिवृत्त शिक्षक मदनलाल वर्मा का कहना है कि राज्य सरकार की आरजीएचएस योजना में शहर के करीब 11 निजी मेडिकल स्टोर चिन्हित है। परंतु चिन्हित दुकानदार साइट नहीं चलने तथा आरजीएचएस योजना में उक्त दवाइयां अंकित नहीं होना कहकर साफ मना कर रहे हैं। इससे कार्मिकों को महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
इलाज करवाना पड़ रहा है भारी

मानङ्क्षसह राजावत का कहना है कि जहां राज्य सरकार एक ओर लोगों के स्वास्थ्य रक्षा के बड़े बड़े वादे किए जा रहे हैं और दूसरी ओर सरकारी अस्पताल में बीमारी का इलाज करवाना ही भारी पड़ रहा है। आउटडोर में चिकित्सक आरजीएचएस योजना की पर्ची देखते ही सीधे यह कहते हैं कि आपको दवाइयों बाहर से ही लेनी पड़ेगी।
घर का बजट की बिगड़ रहा
राजेंद्र माहुर ने बताया कि आरजीएचएस योजना में नि:शुल्क दवाइयां नहीं मिलने से सेवानिवृत्त कार्मिकों की दशा खराब है। क्योंकि आजिविका चलाने के लिए सरकार से मिलने वाली पेंशन की राशि दवाइयों में खर्च होने से सभी सेवानिवृत्त कार्मिकों के घर का बजट की बिगड़ रहा है।

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