ठगा सा महसूस कर रहा है शहर का व्यापारी, सफाई के नाम पर परिषद की मनमर्जी

ठगा सा महसूस कर रहा है शहर का व्यापारी, सफाई के नाम पर परिषद की मनमर्जी

Pawan Kumar Sharma | Publish: Mar, 17 2019 03:26:00 PM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 03:26:01 PM (IST) Tonk, Tonk, Rajasthan, India

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टोंक. स्वच्छता के नाम पर पहले माहौल तैयार किया गया और घर तथा दुकानों के बाहर कचरा-पात्र पहुंचा दिए गए। बाद में इस कचरे को संग्रहण करने के लिए वाह-वाही लूटी। फिर उसी कचरे को डम्पिंग यार्ड तक ले जाने के लिए प्रति दुकान से 200 रुपए वसूले गए, लेकिन नगर परिषद ये राशि ज्यादा दिन वसूल नहीं पाई।

 

उच्च स्तर पर की गई शिकायत के बाद नगर परिषद ने दुकानदारों से ये राशि वसूलना बंद कर दिया। हालांकि इसमें आचार संहिता का मामला भी सामने आया है, लेकिन अधिकारियों ने कोई पुष्टि नहीं की। दुकानों व घरों से राशि वसूलने का आदेश वर्ष 2015 का है, लेकिन नगर परिषद ने अचानक ही आदेश के तहत राशि वसूलना शुरू किया।

 

बाजार में कुछ दुकानदारों से राशि भी वसूली, लेकिन अचानक ही बंद कर दी गई। इसको लेकर शहर में चर्चा का विषय भी बना हुआ है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी खासा मुद्दा बना हुआ है। नगर परिषद के अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि ये राशि स्वायत्त शासन विभाग के आदेशों पर शुरू की गई।

 

राशि वसूलने के आदेश स्वायत्त शासन विभाग ने वर्ष2015 में जारी किए थे। ऐसे में उन दुकानदारों से राशि ली गई,जिनके पास से प्रति दिन कचरा संग्रहण किया जाता है। इसके चलते शहर का दुकानदार स्वयं को स्वच्छता के नाम पर ठगा सा महसूस कर रहा है।


अनिवार्य कर दिया था पात्र रखना
नगर परिषद ने हर दुकान पर कचरा-पात्र रखना अनिवार्यकर दिया है। चार साल पहले इसकी शुरुआत की गई। इसके तहत नगर परिषद ने लोगों को पहले तो सफाई के लिए जागरूक किया। बाद में कचरा-पात्र वितरित भी किए। सडक़ पर कचरा नहीं डालने को कहा गया। अब ये राशि लेनी शुरू कर दी गई है।

 

इधर, सफाई निरीक्षक सुनील मीणा ने बताया कि प्रति मकान से 15 रुपए तथा प्रति दुकान से 200 रुपए राशि ली जाएगी। इसके आदेश स्वायत्त शासन विभाग ने जारी किए थे।

 

इन्हीं के तहत राशि ली जा रही है, लेकिन बंद करने के मामले में उनसे बात की गई तो उनका फोन बंद मिला। इधर, परिषद सभापति लक्ष्मीदेवी जैन ने बताया कि मामला वर्ष2015 पुराना है। अभी वसूलना समझ के बाहर है। वैसे आचार संहिता में राशि नहीं वसूली जा सकती। फिर भी इस मामले में बात की जाएगी।

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