नन्दी गोशाला के लिए नहीं आया एक भी आवेदन

मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2017-18 के मुताबिक टोंक जिले में भी नन्दी गौशाला खोली जानी थी, लेकिन जिला मुख्यालय व तहसील स्तर पर एक भी नन्दी गौशाला का आवेदन नहीं आया।

By: pawan sharma

Published: 21 Aug 2021, 07:31 AM IST

टोंक. मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2017-18 के मुताबिक टोंक जिले में भी नन्दी गौशाला खोली जानी थी, लेकिन जिला मुख्यालय व तहसील स्तर पर एक भी नन्दी गौशाला का आवेदन नहीं आया। राज्य सरकार की ओर से विभिन्न सुविधाएं दिए जाने के बाद भी किसी ने नन्दी गौशाला खोले जाने में रुचि नहीं दिखाई है।

राज्य सरकार की मुख्यमंत्री बजट घोषणा की गाइड लाइन के अनुसार नन्दी गौशाला के लिए 25 बीघा जमीन व 500 निराश्रित नन्दी गौवंश होना अनिवार्य था, लेकिन पिछले सालों में कोई आवेदन नहीं आने के बाद इसमें संशोधन करते हुए गौवंश की संख्या में कमी लाते हुए 200 कर दिया गया , लेकिन उसके बावजूद अभी तक एक भी प्रस्ताव विभाग को नहीं मिला।

जबकि इस मामले में गौ शाला संचालकों की बैठक भी आयोजित की जा चुकी है। नन्दी गौशाला खोलने के लिए विभाग की ओर से 50 लाख रुपए की राशि निर्माण के लिए अनुदान के रूप में दी जाती है। पशु पालन विभाग टोंक के चिकित्सक डॉ जितेन्द्र धाकड़ ने बताया कि बेसहारा व निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए नन्दी गौशाला जनसहभागिता योजनांतर्गत प्रत्येक जिला स्तर पर वर्ष 2018-19 में मुख्यमंत्री बजट घोषणा में की गई थी।

बाद में परिवर्तित बजट 2019-20 में पंचायत समिति स्तर पर भी नन्दी गौशाला स्थापित किए जाने की घोषणा की गई थी। उन्होंने बताया कि नन्दी गौशाला स्थापित किए जाने के लिये समाज सेवी, पंचायतीराज संस्थाएं, स्वंयसेवी संस्थाएं, ट्रस्ट तथा गौशाला इसके लिए पात्र है, जिनके लिए भामाशाह , दानदाता के पास स्वयं के स्वामित्व की कम से कम 25 बीघा भूमि उपलब्ध होनी चाहिए अथवा निजी स्वामित्व की 25 बीघा भूमि कम से कम 20 वर्ष की लीज या पंजीकृत किराया नामा उपपंजीयक का उपलब्ध हो।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक नन्दी गौशाला के लिए कम से कम 500 नर गौवंश का संधारण किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में स्थानीय निकाय, निगम के सक्षम अधिकारी से प्राप्त प्रमाण पत्र के आधार पर न्यूनतम 200 नर गौवंश संधारण किए जा सकते है।

उन्होंने बताया कि नन्दी गौशाला निर्माण के लिए अधिकतम 50लाख रुपए की राशि दिया जाना प्रस्तावित है, जिसमेेें 10 प्रतिशत राशि स्वयं गौ शाला, संस्था द्वारा तथा 90 प्रतिशत राशि गौपालन विभाग द्वारा देय होगी।

उन्होंने बताया कि 50 लाख से अधिक राशि के निर्माण कार्यों में अतिरिक्त शेष राशि स्वयं संस्था, गौशाला द्वारा देय होगी। 500 से अधिक नर गौवंश संधारण करने वाली नन्दी गौशाला को अधिनियम 2016 के अंतर्गत नियमानुसार 40रुपए बड़े तथा 20 रुपए छोटे गौवंश को प्रतिदिन की दर से भरण पोषण के लिए 6 महीने के लिये अनुदान राशि भी दी जाएगी।

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