पत्रिका जन एजेंडा बैठक में आए कई मुद्दे, राजधानी के पास होकर भी विकास की दरकार

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By: pawan sharma

Published: 04 Apr 2019, 06:26 PM IST

टोंक. हर बार चुनाव में मुद्दे तो आते हैं, लेकिन वे पूरे नहीं होते। इसी का नतीजा है कि टोंक जिला विकसित नहीं हो रहा है। जबकि टोंक की दूरी प्रदेश की राजधानी जयपुर से महज 100 किलो मीटर ही है।

 

इसके बावजूद अनदेखी जाती है। जबकि कई मुद्दे हैं जो पूरे किए जाए तो जिले को विकास के पंख लग जाए। ऐसे कई मुद्दे बुधवार को रीजनल पब्लिक सीनियर स्कूल में पत्रिका की जनएजेंडा बैठक में सामने आए हैं।

 

इसमें प्रदीप माथुर ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। जबकि जिले में ही प्रदेश का बड़ा बीसलपुर बांध है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय पर जलापूर्ति तीन से चार दिन में हो रही है। अस्पताल के हालात खराब हैं।

 

चिकित्सक व चिकित्साकर्मियों के पद रिक्त होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। पानी व चिकित्सा का मुद्दा प्रमुखता से पूरा होना चाहिए। शिप्रा सक्सेना ने कहा कि टोंक जिला मुख्यालय पर शिक्षा का हब बनना चाहिए।

 

ऐसा नहीं है कि यहां विश्वविद्यालय निजी स्तर पर नहीं खोला जा सकता है, लेकिन सरकार इसमें प्रोत्साहन दें। इससे विद्यार्थियों को जयपुर व कोटा जाकर पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी।

 

अब्दुल कादिर ने कहा कि बड़ी परियोजना तथा आद्योगिक क्षेत्र नहीं होने से बेरोजगारी बढ़ रही है। बड़ी इकाई खोली जाए तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यूसुफ यूनिवर्सल ने कहा कि ऐसी परियोजना शहर में लानी चाहिए, जिससे रोजगार तो बढ़े ही।

 

साथ ही आर्थिक सुधार भी शहर का हो। इसके लिए सरकार को प्रयास करना चाहिए कि बड़ी परियोजना लागू की जाए। अमीर अहमद सुमन ने कहा कि प्रदेश के कई जिले टोंक के मुकाबले छोटे हैं, लेकिन वहां अधिक विकास इस लिए है कि बड़ी परियोजनाएं चल रही है। कई जिलों में मेडिकल तथा इंजीनियरिंग कॉलेज होने से विद्यार्थियों को सुविधा है।

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