scriptPaying for water in the hospital | इलाज नि:शुल्क, पानी के लिए चुका रहे दाम | Patrika News

इलाज नि:शुल्क, पानी के लिए चुका रहे दाम

करोड़ों की लागत से बने अस्पताल में मरीजों व चिकित्सा स्टाफ के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले मरीजों और तीरमदारों को भले ही परामर्श से लेकर उपचार तक नि:शुल्क मिल रहा है, लेकिन पीने के पानी के लिए यहां पर पैसा खर्च करना पड़ रहा है।

टोंक

Published: April 09, 2022 08:57:37 am

टोंक. जिले के सबसे बड़े सआदत अस्पताल का करोड़ों रुपए खर्च कर विस्तार किया गया है। सुविधाओं के लिए कई आवश्यक संसाधन भी जुटाए जा रहे है। यहां आने वाले मरीजों और तीरमदारों को भले ही परामर्श से लेकर उपचार तक नि:शुल्क मिल रहा है, लेकिन पीने के पानी के लिए यहां पर पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
इलाज नि:शुल्क, पानी के लिए चुका रहे दाम
इलाज नि:शुल्क, पानी के लिए चुका रहे दाम

करोड़ों की लागत से बने अस्पताल में मरीजों व चिकित्सा स्टाफ के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में स्टॉफ को पानी के लिए हर माह हजारों रुपए अपनी ओर से खर्च कर प्रतिदिन कैम्पर की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
आलम यह है कि अस्पताल में कार्यरत कई चिकित्सक व कर्मी घर से व कैम्पर खरीद कर पानी की व्यवस्था कर रहे है। जबकि मरीजों को अस्पताल के बाहर से बोतल बंद पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।
मरीजों को मिलती है स्वच्छ जल पीने की सलाह: अस्पताल में भर्ती और इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भले ही चिकित्सकों द्वारा पेयजल को स्वच्छ कर पीने की सलाह दी जाती हो, लेकिन इसके विपरित अस्पताल में मरीजों को ही शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है।

प्रतिदिन हजारों रोगी व परिजन आते है: 175 बेड की कैपिसिटी वाले जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों ओपीडी में प्रतिदिन 1500 से 1700 व आईपीडी में 250 से 300 मरीज उपचार प परामर्श के लिए आ रहे है। मौसमी बीमारियों के प्रकोप के चलते इन दिनों मरीजों की तादात ज्यादा है। हालांकि अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार किया गया है, लेकिन पीने के लिए अस्पताल में स्वच्छ पानी कहीं सुविधा नहीं है।
प्याऊ का पानी गर्म व बे-स्वाद

अस्पताल परिसर में एक प्याऊ है, लेकिन इसमें पानी गर्म व बे-स्वाद होने के कारण लोग इसके इस्तेमाल से बचते है। इस प्याऊ की टंकिया दिनभर खुले में तेज धूप में रहने के कारण पानी गर्म रहता है।
तीन मंजिल से आना पड़ता है नीचे

सआदत अस्पताल में पीने के पानी की ऊपर से लेकर तक कोई व्यवस्था नहीं है। भर्ती रमेश ने बताया कि दूसरी मंजिल से उतर कर अस्पताल परिसर में नीचे लगे नल से पानी लाना पड़ता है। इसी तरह मरीज रामलाल के परिजन ने बताया कि कि बीमारी के चलते एक कदम भी चला नहीं जाता, लेकिन प्यास लगती है तो पानी के लिए दूसरी मंजिल से कई सीढिय़ां से उतरकर पानी लाना पड़ता है।
एक आरओ वो भी खराब

सआदत अस्पताल में शुद्ध पीने के पानी के लिए लगा मात्र एक पुराना आरओ दो साल से खराब होने के कारण बंद पड़ा है, जिससे यहां आने वाली जनता सहित चिकित्साकर्मियों को भी शुद्ध पानी के लिए पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में एक आरओ लगा हुआ है। जो कोरोना काल में संक्रमण को देखते हुए बंद कर दिया गया था। काफी दिनों से बंद रहने के कारण पार्टस में खराबी आने से अभी बंद है। मैकेनिक को बुलवाया है,। जिससे दो तीन दिन में आराओ का पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
बीएल मीणा, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी सआदत असपताल टोंक।

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