कुशल मजदूर नहीं होने से कम हो रहा है उत्पादन, बिजली में छूट देने की मांग

टोंक की आयल मिलों में 75 फीसदी मजदूर बिहार व यूपी के काम करते थे, लेकिन प्रवासी मजदूरों को अपने राज्य में भिजवाने के बाद कुशल मजदूर नहीं मिल पाने से उत्पादन में काफी परेशानियां उठानी पड़ रही है।

 

By: pawan sharma

Published: 20 Jul 2020, 07:40 AM IST

टोंक. कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन के बाद भले ही औद्योगिक इकाइयां गति पकडऩे लगी है, लेकिन अभी भी आयल मिलों को कुशल मजदूर नहीं मिल पाने से मिल मालिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बड़ाया इंड्रस्टीज के लोकेश बड़ाया का कहना है कि टोंक की आयल मिलों में 75 फीसदी मजदूर बिहार व यूपी के काम करते थे, लेकिन प्रवासी मजदूरों को अपने राज्य में भिजवाने के बाद कुशल मजदूर नहीं मिल पाने से उत्पादन में काफी परेशानियां उठानी पड़ रही है।

वहीं उनका कहना है कि स्थानीय मजदूरों से ही काम लिया जा रहा है, लेकिन अभी भी मजदूर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहे है, जिससे तीन की जगह दो पारियों में ही मील संचालित हो पा रही है, जिससे उत्पादन भी कम हो रहा है। उनका कहना है कि जिस प्रकार से सरकार ने लॉकडाउन के कारण लोगों को बिल की राशी जमा कराने के लिए छूट दी है, उसी तरह उद्योगों को भी बिजली बिल में छूट दिया जाना चाहिए।

बड़ाया ने बताया कि जीएसटी के लागू होने के बाद पेपर वर्क इतना हो गया कि कोई भी व्यापारी राजस्व की चोरी नहीं कर सकता जिसकी जांच के लिए जिला स्तरीय अधिकारी तैनात है। उसके बावजूद टोंक में जयपुर से सर्वे टीम भेजी जाती है। इसके कारण उद्यमियों को कई प्रकार से मानसिक प्रताडऩाओं का शिकार होना पड़ता है।


केपी ऑयल प्रोडक्ट के प्रकाश जैन का कहना है कि लॉक डाउन के बाद बिहार व उत्तरप्रदेश के मजदूरों के अपने घर लौट जाने के बाद स्थानीय मजदूरों को रोजगार के अवसर मिले है। कुछ समय के लिए कठिनाई जरूर है कि उनको ट्रेण्ड होने में समय लगेगा, लेकिन अब टोंक से रोजगार के लिए पलायन भी रुक सकेगा, बशर्ते मजदूर आंदोलनात्मक रास्ता नहीं अपनाए। जैन का कहना है कि टोंक व निवाई में ऑयल मिल अधिक है।

जहां से प्रतिदिन कम से कम पन्द्रह लाख का राजस्व सरकार को मिलता है, लेकिन यदि सरकार उद्योग मालिकों की सुविधाओं का भी ध्यान रखे तो टोंक में खासकर सरसों के तेल में अच्छा उद्योग चल सकता है, क्योंकि टोंक जिले मे सरसों की बम्पर पैदावार होती है साथ ही ईसरदा बांध बनने के बाद तो सरसों के पैदावार की मात्रा काफी होगी।

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