आठ लाख लोगों की प्यास बुझा रहा राजमहल फिल्टर प्लांट

आठ लाख लोगों की प्यास बुझा रहा राजमहल फिल्टर प्लांट

 

By: pawan sharma

Updated: 29 Dec 2020, 05:08 PM IST

राजमहल. बीसलपुर-टोंक-उनियारा पेयजल परियोजना के तहत देवली, टोंक व उनियारा शहरों के साथ ही इनसे जुडें लगभग 464 गांव व ढाणियों में जलापूर्ति के लिए राजमहल में बनाया गया फिल्टर प्लांट पूरी तरहा स्कॉडा (कम्प्यूटराइज्ड) सिस्टम से बनाया गया है। जिसकी लागत लगभग 424 करोड़ रुपए है। प्रथम चरण के दौरान 198 करोड़ व द्वितीय चरण के दौरान लगभग 226 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं।

प्लांट से अभी रोजाना 3 एमएलडी पानी घटाकर 43 एमएलडी पानी रोजाना बांध से लिया जा रहा है। यह पानी सर्दी के मौसम में घटती मांग के तहत किया गया है। पूर्व में बांध से प्रतिदिन 46 एमएलडी लिया जा रहा था। परियोजना के तहत प्लांट की कुल क्षमता 74 एमएलडी पानी रोजाना फिल्टर करने की है। जो पानी आगामी 2041 तक बढऩे वाली जनसंख्या के साथ ही मांग की पूर्ति को लेकर बनाया गया है। परियोजना को तीनों शहरों तक जोडऩे के लिए मुख्य पाइप लाइनें 142 किलोमीटर में बिछी है साथ ही ग्रामीण पाइप लाइनें अलग है।

उक्त प्लांट में व्यर्थ बहते गंदले पानी को वापस शुद्ध करने के लिए ट्यूब सैटेलर सिस्टम बनाया गया है। इसमें गंदले से गंदले पानी को भी रिक्वर कर फिल्टर किया जाकर शुद्धता के साथ ही पीने योग्य भी बनाया जाता है। परियोजना के तहत जिले की लगभग आठ लाख की आबादी का फिल्टर पानी से गला तर हो रहा है। जिसमें रोजाना ग्रामीण इलाके में प्रति व्यक्ति 43 लीटर व शहरी क्षेत्र में 140 लीटर प्रति व्यक्ति पानी दिया जा रहा है।

जिसमें जलदाय विभाग के निजी जलस्त्रोत भी शामिल है। सरकार की नई योजना के तहत ग्रामीण इलाके के लोगों को पानी देने की मात्रा बढ़ाने की योजना विचाराधिन है। परियोजना के तहत बीसलपुर बांध के जलभराव के बीच पानी में राज्य का पहला इंटेक पम्प हाऊस बना है।

वही राजमहल में स्कॉडा सिस्टम के तहत फिल्टर प्लांट है। परियोजना के प्रथम चरण के तहत पांच पम्प हाऊस बने है। जिसमें राजमहल के बाद सरोली मोड़ में है जहां से एक मुख्य पाइप लाइन टोंक के लिए व दूसरी घाड़ पम्प हाउस, उसके बाद नगरफोर्ट व उनियारा पानी पहुंचाया जा रहा है।


फिल्टर प्लांट की खासीयत एक नजर में परियोजना पर रखरखाव का कार्य देख रही एलएण्डटी लार्सन एण्ड ट्रबों कम्पनी के इन्जिनियरों के अनुसार बीसलपुर इंटेक से पानी राजमहल फिल्टर प्लांट पर 17 मीटर गोलाई में बने(एरियेटर) पानी का झरना में प्रति घंटे में 4.7 एमएलडी पानी पहुंचता है। सिड्डीनुमा बने झरने में पानी धीरे-धीरे गिरता है। सिस्टम के तहत पानी में आयरन व आक्सीजन घुलती है।

उसके बाद पास ही स्थित सिस्टम के तहत क्लोरिन व फिटकरी मिलाने का कार्य भी मशीनरी पूरा करती है। उसके बाद पास ही 48-48 मीटर की चौड़ाई वाले गोल दो कुएंरूपी क्लारीफोकूलेटरमें पानी जाता है। जहां बनाए कुओं में लगे सिस्टम के तहत पानी को बिलोया जाता है। जिससे कचरा नीचे की तरफ व शुद्ध पानी उपर रह जाता है।

यहां से शुद्ध पानी ओर अधिक शुद्धता के लिए गैलेरी से होकर फील्टर बैड कक्ष में पहुंचता है। जिसकी क्षमता प्रति घंटे 66 एमएलडी है। जहां क्लोरिन के साथ ही कृत्रिम बजरी व गिट्टी में से छनकर शुद्ध पानी टेंक में प्रवेश करता है। उसके बाद उसे शहरों व गांवों की दूरी के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में क्लोरिन मिलाकर भेजा जाता है। जिससे दूर दराज तक बिछी पाइप लाइनों में बैक्टिरिया जैसे कीटाणु से बचकर पानी की मात्रा शुद्ध रह सके।

ये आबादी ले रही लाभ
परियोजना के तहत टोंक शहर की लगभग एक लाख 84 हजार आबादी को रोजाना 25 एमएलडी पानी दिया जा रहा है जिसमें बीसलपुर परियोजना के साथ ही जलदाय विभाग के निजी जलस्त्रोतों का पानी भी शामिल है। इसी प्रकार टोंक ग्रामीण क्षेत्र की कुल एक लाख 11 हजार 345 की आबादी को पानी दिया जा रहा है जिसमें भी निजी जलस्त्रोतों का पानी शामिल है।

इसी प्रकार देवली व दूनी शहर की कुल 27 हजार 156 व इनसे जुड़े ग्रामीण क्षेत्र की एक लाख 81 हजार की आबादी को 4 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। जिसमें जलदाय विभाग के निजी जलस्त्रोतों का पानी भी शामिल किया जाता है। इसी प्रकार उनियारा शहर की 14 हजार 700 व ग्रामीण क्षेत्र की एक लाख 83 हजार 300 की आबादी को 2 एमएलडी पानी प्रति दिन जिसमें निजी जलस्त्रोत का पानी शामिल है।

pawan sharma
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned