जीने की कला सिखाता है धर्म-मुनि सुधासागर

जीने की कला सिखाता है धर्म-मुनि सुधासागर

pawan sharma | Publish: Sep, 04 2018 04:01:30 PM (IST) Tonk, Rajasthan, India

साधु का जीवन आसान नहीं होता है। सन्त और मुनियों से होने वाली गलतियों के प्रति भगवान विशेष कठोर होते हैं।

 

आवां. मुनि पुंगव सुधासागर, मुनि महासागर, मुनि निष्कंप सागर, क्षुल्लक धैर्य सागर व क्षुल्लक गम्भीर सागर के चातुर्मास मे तीर्थ क्षेत्र पर दर्शनार्थ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। रोजाना शान्तिधारा, मंगल प्रवचन और जिज्ञासा समाधान में धर्म की वैतरणी बही। मुनि सुधासागर ने दसलाक्षण पर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा जीने की कला सिखाई।

 

इस दौरान धर्मसभा में मुनि सुधासागर ने कहा कि धर्म मोक्ष प्राप्त करने के लिए ही नहीं अच्छी जिन्दगी जीने के लिए भी जरूरी है। वास्तव में धर्म जीने की कला सिखाता है। धर्म को जिन्दगी से जोडऩे कि लिए नित्य अभिषेक, शान्तिधारा और भगवान के पूजन का उपदेश दिया जाता है।

 

इनमे परमार्थ के साथ संसारिक कल्याण के भाव भी समाहित है। इस अवसर पर मुनि ने दशलक्षण पर्व की महिमा बताते हुए कहा कि इसमे हर एक का कल्याण निहित है। मन को साधने के धर्मशास्त्रों मे कई उपाय बताए गए हैं।

 

मुनि ने कहा कि साधु का जीवन आसान नहीं होता है। सन्त और मुनियों से होने वाली गलतियों के प्रति भगवान विशेष कठोर होते हैं। मुनि ने नशा, व्यसन, व्याभिचार, झूठ, क्रोध, हिंसा, चोरी, परिग्रहण आदि दुर्गणों से मुक्ति व बचने के कई पे्ररक प्रसंग सुनाए।

 

‘तप ही मोक्ष मार्ग है’
टोडारायसिंह.श्रीशांतिनाथ जिनालय में चातुर्मास के तहत रविवार को सोलह कारण विधान का आयोजन किया गया। जैनमुनि निपुणानन्दी ने कहा कि तप ही मोक्ष मार्ग का पथ है। उन्होंने तप के 12 भेद बताए। जिसमें सभी 6 प्रकार के बहिरंग तप श्रावकों के लिए आवश्यक है।

 

उन्होंने मुनिश्री तरूण सागर का उल्लेख कर बताया कि संल्लेखना समाधि लेकर देवलोक होना जैन साधु के लिए त्रय रत्न की प्राप्ति है। चातुर्मास समिति के मंत्री महेन्द्र जैन ने बताया कि पावन वर्षा योग पर दस दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर आयोजित किया जा रहा है।

 


नन्दोत्सव आज
लाम्बाहरिसिंह. कस्बे स्थित बंशीवारा मन्दिर पर मंगलवार शाम को नन्दोत्सव मनाया जाएगा। यह जानकारी पुजारी कैलाश पाराशर ने दी।

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