रक्षाबंधन पर कोविड-19 का साया, 50 प्रतिशत से भी कम रही बिक्री

रक्षाबंधन के पर्व को लेकर बाजारों में इस बार राखी की बिक्री 50 प्रतिशत से भी कम नजर आई । राखी के त्यौहार पर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण का असर साफ दिखाई दे रहा है।

 

By: pawan sharma

Published: 02 Aug 2020, 08:22 PM IST

मालपुरा. रक्षाबंधन के पर्व को लेकर बाजारों में इस बार राखी की बिक्री 50 प्रतिशत से भी कम नजर आई । राखी के त्यौहार पर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण का असर साफ दिखाई दे रहा है। राखी के त्यौहार को लेकर इस बार लोगों में विशेष उत्साह नजर नहीं आ रहा वही लोगों ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना के चलते बहन बेटियों की आवाजाई परिवारों में नहीं हो रही जिसके चलते उसका असर बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है ।

राखी विके्रता प्रदीप कुमार ने बताया कि अन्य वर्षो के मुकाबले इस वर्ष राखी की बिक्री 40 से 50 प्रतिशत ही रही है । वहीं बाजार में चाइनीज राखी नहीं आने से विशेषकर बालिकाओं में राखी की खरीददारी प्रति उत्साह नजर नहीं आ रहा । व्यापारियों का मानना है कि राखी के त्यौहार की रौनक वैसे तो बाजार में 8 दिन पूर्व शुरू हो जाती है लेकिन इस बार कोरोना के चलते बहन बेटियों के नही आनें व चाइनीज राखी बाजार में नहीं होने से विशेषकर बालिकाओं व महिलाओं में राखी की खरीदारी के प्रति विशेष उत्साह नजर नहीं आया वहीं रक्षाबंधन के पर्व को लेकर बाजार में किराना व्यापारियों की दुकानों पर भी विशेष भीड़ नजर नहीं आ रही जिससे व्यापारियों में भी निराशा ही रही ।


बाजार हुआ राखियों से रंग बिरंगा
निवाई. रक्षा बन्धन पर्व को लेकर बहने अपने भाईयों के लिए राखियां खरीदने में जुट गई हैं। वहीं बाजारों में भी चारों ओर रंग बिरंगी राखियों की दुकाने सज हुई है। जिन पर महिलाएं एवं युवतियों में राखियां खरीदने को लेकर होड़ मची हुई हैं। शहर में स्थित बिचला जैन मंदिर, चौहट्ïटी बाजार, बड़ा बाजार, सब्जी मंडी, खारी कुई, झिलाय रोड, अहिंसा सर्किल एवं बस स्टेण्ड सहित सभी गली मौहल्लों में दुकानदार विद्युत रोशनी की चकाचोंध में रंग बिरंगी राखियों को सजाकर राह चलते हुए लोगों का भी ध्यान आकर्षित करने में जुटे हुए है।

जिसके चलते बाजार में चारों ओर रोनक सी छा गई है। राखी विक्रेताओं ने बताया कि इस बार चोकर राखी की उपेक्षा रेशमी डोरों व अजमेर, अलवर की राखियों के साथ फैन्सी व आधुनिक डिजायन वाली राखियों की बाजार में अधिक मांग हैं। वहीं गुद्ïदेदार राखियां के तो कोई खरीददार ही नहीं है। इस दौरान सुन्दर राखियां खरीदने की मांग बनी हुई हैं।

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