चिकित्साकर्मियों व औषधियों का टोटा नि:शुल्क योजना का नहीं मिल रहा लाभ

चिकित्साकर्मियों व औषधियों का टोटा नि:शुल्क योजना का नहीं मिल रहा लाभ

 

By: pawan sharma

Published: 30 Sep 2020, 07:08 PM IST

लाम्बाहरिसिंह. ‘नाम बड़े दर्शन खोटे’ कहावत इन दिनोंं राजकीय आयुर्वेदिक औषधालयों पर चरितार्थ होती नजर आ रही है। कस्बे समेत क्षेत्र के गांवों में राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय पर चिकित्साकर्मियों के पद रिक्त है। वहीं औषधालयों में प्राथमिक उपचार की दवाइयां समेत औषधियों का टोटा है।

इससे रोगियों को नि:शुल्क उपचार नहीं मिल रहा है। हालात यह है कि औषधालयों में रिक्त चिकित्साकर्मियों के पदों के विरुद्व सप्ताह में दो दिन कम्पाउडर को व्यवस्थार्थ लगा रखा है। इससे औषधालय पहुंचे रोगियों को नियमित उपचार नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए प्रशासन से चिकित्साकर्मियों के रिक्त पद स्थाई भरने की मांग की है। ग्रामीण विजय गौत्तम व दिनेश लेपा ने बताया कि पांच साल से चिकित्सा अधिकारी व कम्पाउडर का पद रिक्त चल रहा है। चिकित्साकर्मियों के अभाव में आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवा ठप होने से रोगियों को नियमित उपचार नहीं मिल रहा है।

औषधियों का टोटा औषधालयों में प्राथमिक उपचार के लिए पटटी, कॉटन, गोज, मलहम, जिंक पाउडर,दद्रूदावानल समेत कई औषधियों का अभाव है। हालात यह है कि निदेशालय से औषधालय में औषधियां निर्धारित नहीं होने से रोगियों को उपचार में खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इनका यह कहना औषधालयों में औषधियों का मापदण्ड निर्धारित नहीं है। औषधियों के अभाव में रोगियों के उपचार में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देवेन्द्र मीणा चिकित्सक अधिकारी नोडल प्रभारी मालपुरा निदेशालय औषधालय में रोगी संख्या अनुसार औषधियां व बजट उपलब्ध करता है।

प्राथमिक उपचार दवाइयां समेत औषधियों का मांग पत्र भेज दिया है। जिले के औषधालयों में करीब चिकित्सा अधिकारियों के 26 पद, कम्पाउडरों के 35 व परिचारक के 44 पद रिक्त पड़े है। राज्य सरकार पद भरने के बाद ही औषधालय संचालन में राहत मिलेगी।दिनेश कुमार शर्मा, उपनिदेशक, आयुर्वेदिक विभाग टोंक फोटो एलएचसीबी लाम्बाहरिसिंह क्षेत्र के झाडली गांव में राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय में लगा ताला।

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