नवाचार: गर्मी में तिल्ली की बुवाई, बढ़ाएगी किसानों की आय

बारिश के दौरान किसानों को खरीफ में खेतों में तिल्ली की फसल बुवाई करते देखा है, लेकिन कम पानी एवं उचित तापमान की यह फसल ज्यादा पानी मिलने पर गलने से या कालिया जैसे रोग लगने पर नष्ट भी हो जाती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए बारिश में किसान कम पानी रुकने वाले खेतों में तिल्ली की बुवाई करते हैं ताकि फसल बर्बाद नहीं हो।

By: pawan sharma

Published: 09 Jun 2021, 07:26 PM IST

देवली. बारिश के दौरान किसानों को खरीफ में खेतों में तिल्ली की फसल बुवाई करते देखा है, लेकिन कम पानी एवं उचित तापमान की यह फसल ज्यादा पानी मिलने पर गलने से या कालिया जैसे रोग लगने पर नष्ट भी हो जाती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए बारिश में किसान कम पानी रुकने वाले खेतों में तिल्ली की बुवाई करते हैं ताकि फसल बर्बाद नहीं हो।


तिल्ली की पकी फसल से सर्दी में पौष्टिक आहार के साथ उष्मा के लिए तिल्ली का तेल, व्यंजन, पशुओं के लिए भी तिल की खल मिलती है। तिल की फसल कम खर्चे की मानी जाती है। इसे देखते हुए उपखंड मुख्यालय से जुड़े देवली गांव के कुछ किसानों ने नया प्रयोग किया। किसानों ने क्षेत्र में खरीफ समय के विपरीत बेमौसम (गर्मी) में इस बार तिल्ली की फसल बुवाई की है।

इन दिनों करीब 6 हैक्टेयर भूमि पर तिल्ली की फसल में पोड गेटी में फलीफूत हो रही है। फसल में जरूरत अनुसार पानी की पिलाई से फसल की हरियाली लुभा रही है। किसानों को खरीफ से भी अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। जो गर्मी में रोजगार देने का काम भी पूरा कर रही है। देवली गांव के किसान गोपाल लुहार ने बताया कि गत वर्ष उसने सरसों की फसल लेने के बाद गर्मी में दो बीघा में तिल की फसल की थी जिसमें करीब 30-35 हजार की आमदनी हुई थी।

इसके बाद अन्य किसानों ने भी उसका साथ देते हुए गर्मी में तिल्ली फसल बुवाई करने का निर्णय किया। किसानों ने शिव सागर तालाब में करीब 6 एकड़ भूमि तिल्ली की बुवाई की है। किसान गोपाल लुहार ने बताया कि गर्मी में तिल होने से उत्साहित किसानों ने इस बार रकबा बढ़ाकर बुवाई की है। अभी फसल में किसी तरह का कोई रोग नहीं है। समय पर पानी पिलाई कर रहे हैं। तिल्ली फसल ठीक है। किसानों का मानना है कि गर्मी में रोजगार मिल गया और पैदावार अच्छी होने से आमदनी भी होगी। गर्मी में फसल में रोग की सम्भावना नहीं रहती।

देवली गांव में मौके पर जाकर फसल की पूरी जानकारी लूंगा। एक क्षेत्रफल को चिह्नित कर उत्पादन क्षमता का आंकलन करेंगे। तिल्ली की लैब में तेल की मात्रा की भी जांच करवाएंगे। सब कुछ अच्छा रहा तो विभाग को अवगत करवाया जाएगा तथा तिल्ली फसल की बुवाई को प्रोत्साहित भी करेंगे।

वीरेंद्र मीणा, कृषि पर्यवेक्षक

तिल्ली खरीफ की फसल जो कम पानी में पैदा हो जाती है अधिक बारिश में गलने एवं कालियां रोग लगने पर नुकसान भी होता है। गर्मी में क्षेत्र का किसान यहां मूंग, मूंगफली, मक्का की खेती तो कर रहे हैं। पहली बार अगर तिल्ली की भी बुवाई की है और उत्पादन अच्छा हुआ तो यह प्रयोग किसानों की आमदनी बढ़ाएगा।
रेखा मीणा, सहायक कृषि अधिकारी देवली

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