बीसलपुर बांध के पानी में नजर आने लगे डूबे आशियाने

मानसून सत्र का एक माह पूरा होने के बाद भी बीसलपुर बांध के जलभराव सहित कैचमेंट एरिया में मानसून की मेहरबानी नहीं होने से बांध का गेज वाष्पीकरण व जलापूर्ति को लेकर लगातार गिरता जा रहा है। दिनोंदिन सूखते बांध के पानी से जलभराव में डूबे करीबी गांव-कस्बों के मंदिर, मस्जिद, कच्चे व पक्के मकान आदि आशियानों की छत्तों के साथ ही गुम्बज नजर आने लगे है।

By: pawan sharma

Updated: 22 Jul 2021, 02:19 PM IST

राजमहल. मानसून सत्र का एक माह पूरा होने के बाद भी बीसलपुर बांध के जलभराव सहित कैचमेंट एरिया में मानसून की मेहरबानी नहीं होने से बांध का गेज वाष्पीकरण व जलापूर्ति को लेकर लगातार गिरता जा रहा है। दिनोंदिन सूखते बांध के पानी से जलभराव में डूबे करीबी गांव-कस्बों के मंदिर, मस्जिद, कच्चे व पक्के मकान आदि आशियानों की छत्तों के साथ ही गुम्बज नजर आने लगे है।

बीसलपुर बांध का गेज जलापूर्ति व वाष्पीकरण के कारण कभी एक सेमी प्रतिदिन तो कभी दो सेमी प्रतिदिन की रफ्तार से गिरने लगा है। बांध परियोजना के सहायक अभियंता प्रतीक चौधरी ने बताया कि बांध का गेज मंगलवार सुबह 6 बजे तक 309.43 आर एल मीटर दर्ज किया गया था, जिसमें 9.23 टीएमसी पानी का कुल भराव था, जो बुधवार सुबह तक दो सेमी घटकर 309.41 आरएल मीटर रह गया है, जिसमें कुल जलभराव 9.191 टीएमसी बचा हुआ है।

बांध के कन्ट्रोल रूम के अनुसार अभी बांध में भरा पानी कुल जलभराव का लगभग 23 प्रतिशत पानी शेष रह गया है। गौरतलब है कि बांध का कुल जलभराव 315.50 आर एल मीटर है, जिसमें कुल 38.703 टीएमसी पानी का जलभराव होता है।

नदियों की दार में सिमटा पानी
मानसून कमजोर रहने के चलते बीसलपुर बांध का जलभराव अब बांध के करीबी क्षेत्र में ही फैलाव रह चुका है। वहीं खारी नदी की जलधारा लगभग सूख चुकी है। अब पानी बनास की मुख्यधारा व कुछ दूरी पर डाई नदी की मुख्यधारा में ही पानी शेष बचा हुआ है। बांध के कैचमेंट एरिया व जलभराव में मानसून की मेहरबानी भी होती है तो पहले पानी सूखी पड़ी नदियों की धार में जाएगा उसके बाद बांध के हलक तक पहुंचेगा।

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