टोंक पुलिस की कार्रवाई संदेह के घेरे में , राजकार्य में बाधा, फिर भी शांतिभंग में किया मामला दर्ज

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By: pawan sharma

Published: 07 Jan 2019, 08:55 AM IST

निवाई. बारेड़ा गांव के समीप वन क्षेत्र में स्थित चिरमी पहाड़ी में खनन माफियाओं द्वारा वनकर्मियों के साथ मारपीट के बाद पुलिस की कार्रवाई संदेह के घेरे में आ गई है। पीडि़त वन रक्षक आत्माराम का आरोप है कि बरौनी थानाधिकारी ने राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज करने की बजाय शांतिभंग में मामला दर्ज करना बताया है।

 


मामला राजनीतिक दबाव का भी है। इस दबाव में भी मामला हलका कर दिया गया। वनपाल आत्माराम ने बताया कि शनिवार शाम को घटना के बाद राजकार्य सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी बरौनी थानाधिकारी को दी थी, लेकिन वह प्राथमिकी उन्होंने नहीं ली और कहा कि मुल्जिमों को बुलाकर ट्रैक्टर वन विभाग के सुपुर्द कर दिया जाएगा, जो रविवार को कर दिया गया है।

 

दूसरी प्राथमिकी में धक्का-मुक्की व अपशब्द कहना लिखवाया तथा कानूनी कार्रवाई कर पाबंद करने की मांग के लिए लिखवाया। इस दौरान रेंजर भी साथ था। दूसरी प्राथमिकी के बारे में जिला वन अधिकारी को भी अवगत कराया। इधर, रेंजर सीताराम शर्मा का कहना है कि मामला तो राजकार्य में बाधा का बनता है।

 

पुलिस ने ट्रैक्टर बरामद कर विभाग को सुपुर्द किया है। वहीं बरौनी थानाधिकारी रामकृष्ण का कहना है कि दोनों पक्षों से बातचीत करने के बाद मामला शान्तिभंग के आरोप का होना बताया। उन्होंने बताया कि उनके पास रिपोर्ट भी वनकर्मियों द्वारा आरोपियों को पाबन्द करने की ही दी है, जिस पर दोनों आरोपियो को शान्तिभंग में गिरफ्तार किया है।


पुलिस ने ट्रैक्टर को पकड़ कर वन कर्मियों के हवाले किया है। आरोपी प्रभातीलाल पुत्र हरनारायण मीणा एवं उसके भाई कैलाश मीणा को गिरफ्तार शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है, जिनको सोमवार को तहसीलदार के समक्ष पेश किया जाएगा।

 

इधर, सिरस नाका प्रभारी वनपाल आत्माराम जाट ने बताया था कि आरोपियों ने उसके साथ एवं वन रक्षक रमेश ताखर के साथ धक्का-मुक्की करके अपशब्द कह कर ट्रैक्टर-ट्रॉली को भगाकर ले गए, जिसके लिए उन्होंने बरोनी थाना प्रभारी के नाम धारा 332, 353 एवं 379 में मामला दर्ज करने के लिए रिपोर्ट दी थी।

इधर, जिला वन अधिकारी सुचेक गौड का कहना है कि मामला राजकार्य में बाधा का था। शिकायत क्यों बदली गई। इस बारे में पता किया जाएगा।

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