कोरोना वायरस: पहले भाव ने मारा, अब कोरोना तोड़ रहा कमर, दर्जनों टन तैयार खीरा ककड़ी व सब्जियां हो रही बेकार

पिछले कुछ दिनों से कोरोना वाइरस को लेकर सरकार की ओर से लॉक डॉउन के चलते इन दिनों बनास नदी के पेटा कास्तकार परेशान है। एक तरफ हर दूसरे दिन तैयार होकर टूटने वाली खीरा ककड़ी की फसल बनास में जगह-जगह घास की टपरियों पर ढेर लग कर खराब हो रही है ।

राजमहल. पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस को लेकर सरकार की ओर से लॉक डॉउन के चलते इन दिनों बनास नदी के पेटा कास्तकार परेशान है। एक तरफ हर दूसरे दिन तैयार होकर टूटने वाली खीरा ककड़ी की फसल बनास में जगह-जगह घास की टपरियों पर ढेर लग कर खराब हो रही है, जिससे किसानों को हजारों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

बनास नदी के पेटाकास्तकार कैलाश चन्द लौधा, प्रहलाद वर्मा, पूरण मल वर्मा, छैलबिहारी वैष्णव, भगवान वैष्णव सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों पूर्व खीरा ककड़ी के दिनोंदिन गिरते दामों ने किसानों की कमर तोडकऱ रख दी, वहीं इन दिनों कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन के कारण बनास में दर्जनों टन तैयार खीरा ककड़ी व सब्जियां मण्डियों तक नहीं पहुंचने के कारण बनास की बाडिय़ों में ढेर लगे है, जिससे रोजाना किसानों को हजारों रुपए का अर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने बुधवार को सरपंच से मिलकर तैयार माल को मण्डियों तक पहुंचाने की मांग भी की है, जिससे किसान हजारों के आर्थिक नुकसान से बच सके। उल्लेखनीय है कि बीसलपुर बांध के डाऊन स्ट्रीम में पडऩे वाले बीसलपुर, राजमहल, बोटून्दा, भगवानपुरा, नयागांव, सतवाड़ा के करीब बनास नदी की सैकड़ों बीघा भूमि में इस बार खीरा ककड़ी, लौकी, कद्दू, टमाटर, मिर्च, करेला आदि की फसलें बोई गई है, जिसमें इन दिनों खीरा ककड़ी, लौकी, कद्दू की तैयार फसलें तोड़ी जा रही है, लेकिन कोरोना वाइरस के कारण ये खीरा ककड़ी दिल्ली की आजादपुर मण्डी सहित जयपुर, कोटा व अजमेर तक नहीं पहुंचने के चलते तोडकऱ बनास में पड़ी हुई है।


गौ शालाओं में पहुंचाई-
किसानों ने बताया कि दो दिन पूर्व वो बनास नदी की तैयार खीरा ककड़ी व लौकी सहित कद्दू आदि की फसलें लेकर जैसे तैसे अजमेर व कोटा मण्डियों के लिए गए थे, लेकिन बीच रास्ते में ही पुलिस की ओर से रोककर सब्जियों को आस-पास की गौ शालाओं में नि:शुल्क पहुंचा दी गई। किसानों को वाहन का किराया भी अपनी जेब से भुगतना पड़ा।

इसी डर को लेकर किसान तैयार माल को तोड़ तो रहे है, जिससे की वो खराब नहीं हो। मण्डियों तक ले जाने के बजाय बनास में ही स्टॉक कर रहे है। किसानों का कहना है कि तैयार फसल को समय पर नहीं तोड़ा जाए तो वह पीली पडकऱ खराब हो जाती है वहीं इनके पेड़ भी पीले पडकऱ रोग की चपेट में आ जाते है। जिससे किसानों को फसल तोडऩे की भी मजबूरी बनी हुई।


इनका कहना है-
किसानों की मांग पर बुधवार को बनास की बाडिय़ों में टूटी फसलों को निरीक्षण किया गया है। जल्द ही उपखण्ड अधिकारी देवली व जिला कलक्टर से बात कर इन्हे मण्डियों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
किशन गोपाल सोयल सरपंच ग्राम पंचायत राजमहल।

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pawan sharma Desk
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