पहले शत्रुओं से सुरक्षा का था जिम्मा, अब अस्तित्व खो रही दूनी किले की खाई

पहले शत्रुओं से सुरक्षा का था जिम्मा, अब अस्तित्व खो रही दूनी किले की खाई

 

By: pawan sharma

Updated: 10 Jan 2021, 07:48 PM IST

दूनी. दूनी में रियासत काल के समय राजा-महाराजाओं की ओर से सैकड़ों साल पूर्व किला निर्माण के दौरान शत्रुओं से सुरक्षा को लेकर खुदवाई विशाल खाई अस्तित्व खोती जा रही है। लोगों ने कचरा पात्र समझ कचरा-गंदगी से भरने लगे है हालात यह है कि प्राचीन खाई कचरे-गंदगी के कारण आवारा पशुओं की शरणस्थली बन गई तो उनके मुंह मारने से जगह-जगह दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई।

उग आए बबूलों व खाई किनारे असामाजिक तत्वों की ओर से किए कच्चे-पक्के अतिक्रमणों के चलते सोन्दर्य बिगडऩे लगा है। खाई की वर्तमान स्थिती बद से बदतर होने के साथ अस्तित्व खतरे में है। उल्लेखनीय है की असामाजिक तत्वों की ओर से खाई में कचरा-गंदगी डाले जाने से वह भरने लगी है तो खाई की सुरक्षा दीवारों को तोड़ असामाजिक तत्वों ने कच्चे-पक्के निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया, शेष रही सुरक्षा दीवारों को कचरे-गंदगी में मुंह मारने के दौरान आवारा पशुओं ने तोड़ दी।

गौरतलब है कि लगभग 600 साल पूर्व किले के निर्माण के समय उसकी सुरक्षा को लेकर तत्कालीन रावराजा ने चारों ओर खाई का निर्माण कराई, सुरक्षा की दृष्टि से खाई को तालाब की मोरी खोल पानी भरा जाता था, खाई में बारह महिनों पानी भरा रहता था। खाई में मगरमच्छ सहित अन्य खतरनाक जीव-जंतू निवास करते थे।

राजपरिवार के यादवेन्द्र सिंह ने बताया कि किले पर कई बार आक्रमण हुआ तो कई लूटेरों ने लूटने का प्रयास किया मगर खाई में भरे पानी व खतरनाक जानवरों की वजह से शत्रु किले तक नहीं पहुंच पाता था तो दूसरी ओर राजसी सेना में शामिल योद्धाओं की बहादूरी के आगे शत्रु टीक नहीं पाते थे। दूनी राजसी सेना की बहादूरी के चर्चे राज्य ही नहीं अपितू बाहर राज्यों में थे। ग्रामीण आज भी बहादूरी के किस्से बताते थकते नहीं।

pawan sharma
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned