सरकारी नैया का नही कोई खिवैया...

प्रशासनिक अनेदखी से लाखों की मोटर बोट दुर्दशा का शिकार हो रही है

By: pawan sharma

Published: 22 Aug 2017, 07:22 AM IST

राजमहल.

राज्य की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बीसलपुर बांध के जलभराव क्षेत्र में होते हादसों के दौरान राहत कार्यों के लिए सरकार की ओर से मत्स्य विभाग व बीसलपुर बांध परियोजना को दी गई लाखों की मोटर बोट प्रशासनिक अनदेखी से मत्स्य लेडिंग सेंटर पर एक तरफ खड़ी धूल चाटती नजर आ रही है। वहीं ठेकेदार की मोटर बोट पानी में दौड़ती दिखाई दी। उल्लेखनीय है कि बीसलपुर बांध के जलभराव क्षेत्रमें दौड़ती अवैध नावों पर शिकंजा कसने के साथ ही हादसों की रोकथाम व राहत कार्यों के लिए बांध परियोजना को तीन मोटर बोट आवंटित की जा चुकी है।

 

 

इसी प्रकार मत्स्य विभाग को भी अब तक तीसरी मोट बोट दी जा चुकी है, लेकिन जलभराव में अचानक होते हादसों के दौरान तो दूर की बात है बांध पर जल संसाधन विभाग या जनप्रतिनिधियों के दौरों के दौरान भी सरकारी मोटर बोट बदहाली पर आंसू बहाती नजर आती है। इससे मजबूरन सरकार के प्रतिनिधि को भी मछली ठेकेदार की बोट का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसमें ना तो लाइफ जॉकेट दिखाई देती है और ना ही जिम्मेदार चालक है।

 


बिना इंजन के खड़ी मिली
बीसलपुर बांध के मत्स्य लेडिंग सेन्टर पर जब गत रविवार को कृषि मंत्री व अधिकारियों का लवाजमा पहुंचा तो टापू के निरीक्षण के लिए सरकारी मोटर की मांग की गई। तब भी यहां चार सरकारी मोटर बोट तो खड़ी थी, लेकिन चारों में इंजन नहीं लगे हुएथे। मोटर बोट में काफी मात्रा में बरसात का पानी भरा हुआ था, जो उनकी दुर्दशा की कहानी सुना रहा था।

 


जवाब मांगने पर बगलें झांकने लगे अभियंता
इस पर कृषि मंत्री सैनी ने नाराजगी जताते हुए मोटरबोट की दुर्दशा को लेकर सम्बन्धित अभियंताओं से जवाब मांगा तो अधिकारी कभी चालक का अभाव तो कभी रखरखाव का हवाला देकर बगले झांकने लगे। इधर, मत्स्य विभाग को तो सरकार की ओर से गत मार्च माह में ही लगभग चार लाख की कीमत की नई मोटर दी गई थी, वो भी बिना इंजन के बांध के तट पर एक तरफ खड़ी थी, जिसमें लगभग चार फीट तक पानी भरा हुआ था।

 

 

मामले की जांच कराएंगे
सरकारी मोटरबोट की दुर्दशा को लेकर सम्बन्धित अभियंताओं से रिपोर्ट मांगी गई है। इसकी जल्द ही जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रभुलाल सैनी, कृषि एवं मत्स्य मंत्री।

 

 

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