नवाब सभी धर्मों का आदर करते थे-हामिद

गायों को डाला चारा
टोंक महोत्सव में हुए कई आयोजन
टोंक. अंजुमन खानदान-ए-अमीरिया सोसायटी की ओर से आयोजित टोंक महोत्सव में मंगलवार को कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। महोत्सव के तहत सोसायटी समेत अन्य लोग गोशाला में पहुंचे और गायों को चारा खिलाया गया। सोसायटी सचिव साहबजादा हामिद अली खां ने बताया टोंक रियासत के प्रथम नवाब अमीर खां ने जब टोंक की स्थापना की तो उस समय सभी धर्मों को विशेष स्थान दिया गया।

By: jalaluddin khan

Published: 17 Nov 2020, 07:14 PM IST

नवाब सभी धर्मों का आदर करते थे-हामिद
गायों को डाला चारा
टोंक महोत्सव में हुए कई आयोजन
टोंक. अंजुमन खानदान-ए-अमीरिया सोसायटी की ओर से आयोजित टोंक महोत्सव में मंगलवार को कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। महोत्सव के तहत सोसायटी समेत अन्य लोग गोशाला में पहुंचे और गायों को चारा खिलाया गया। सोसायटी सचिव साहबजादा हामिद अली खां ने बताया टोंक रियासत के प्रथम नवाब अमीर खां ने जब टोंक की स्थापना की तो उस समय सभी धर्मों को विशेष स्थान दिया गया।

उन्होंने जहां मस्जिदें बनवाई। वहीं मंदिरों का निर्माण भी कराया है। यह हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है जो टोंक में सालों से चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि नवाब अमीर खां जहां सभी धर्मों का आदर करते थे, वहीं गाय को भी विशेष महत्व देते थे। ऐसे में सोसायटी की ओर से टोंक महोत्सव पर ऐसे समाजसेवा के कार्य किए जाते हैं।

इस दौरान सदर युनूस अली, प्रवक्ता जुनेद असलम, अब्दुल मुनीम खान, अनवर अली, पार्षद कमर मियां, अकील अहमद, अख्तर खान, फिरोज, वीरप्रताप, वसी बैग, प्यारे मियां आदि ने गायों को हरा चारा डाला। कार्यक्रम के तहत खलील क्लब में टेनिस प्रतियोगिता हुई। इसमें कई टीमों ने हिस्सा लिया। प्रवक्ता जुनेद असलम ने बताया कि टोंक महोत्सव के तहत बुधवार को नेहरू कॉलेज में रंगोली एवं म्युजिकल व्हील चेयर प्रतियोगिता होगी।


यह है टोंक नवाबी रियासत का इतिहास
नवाबी नाजो अदा का प्रतीक टोंक शहर राजस्थान के निर्माण से पूर्व नवाबों की रियासत था। इस पर इतिहास में चर्चित रहे अमीर खां के वंशज शासन करते थे। टोंक रियासत के प्रथम नवाब अमीर खां मीर खां के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध थे।

अमीर खां बचपन से कुशाग्र बुद्धि होशियार और बहाहुदर थे। वर्ष 1799 में अमीर खां जसवंतराव होल्कर से जुड़ गए। एक बार गोण्डा गांव में निशानेबाजी करते हुए होल्कर की आंख जाती रही। बाद में जब होल्कर की आंख का जख्म अच्छा हो गया तो जश्न मनाया गया।

इस अवसर पर होल्कर ने अमीर खां को नवाब का खिताब दिया व सिरोंज उनको दे दिया गया।

मार्च 1810 में अमीर खां मालवा से राजस्थान आ गए और 1817 तक राजस्थान में युद्ध करते रहे। राजस्थान में उनकी धाक थी।

इसके चलते 15 नवम्बर 1817 को ईस्ट इण्डिया कम्पनी से नवाब अमीर खां की एक संधि हुई। इसमें वे टोंक रियासत के नवाब बना दिए गए।

इस संधि के अनुसार जो रियासत टोंक अस्तित्व में आई उसका रकबा 553 मुरबा मील था और आमदनी 56 लाख रुपए मय जागीरात थी। उस समय आबादी लगभग चार लाख थी।

jalaluddin khan Reporting
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