अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए खुद के प्राण कर दिए न्यौछावर! जल्द आने का कहा था, अब आएंगे तिरंगे में लिपटकर

dinesh saini

Publish: Jul, 14 2018 12:06:56 PM (IST) | Updated: Jul, 14 2018 12:07:54 PM (IST)

Tonk, Rajasthan, India
अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए खुद के प्राण कर दिए न्यौछावर! जल्द आने का कहा था, अब आएंगे तिरंगे में लिपटकर

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टोंक/राजमहल। कश्मीर के अनन्तनाग में सैनिकों के साथ अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए निकला राजमहल निवासी सीआरपीएफ का जवान शहीद हो गया। गांव में जवान के शहीद होने की सूचना पर माहौल गमगीन हो गया। लोगों ने बताया कि मिश्रीलाल काफी मिलनसार एवं सेवाभावी था।

परिजनों व जम्मू-कश्मीर की 96वीं बटालियन सीआरपीएफ से मिली जानकारी अनुसार राजमहल निवासी मिश्रीलाल मीणा (50 ) पुत्र कालू राम मीणा सीआरपीएफ में एएसआई पद पर कार्यरत थे, जो शुक्रवार सुबह जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई को रेड अलर्ट दिवस मनाकर दस सैनिकों के साथ अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए अनन्तनाग के पहलगांव रोड स्थित मटन स्थान के लिए निकले थे। तभी अचानक आतंकियों की ओर से किए गए हमले में मिश्री लाल मीणा व अन्य एक सैनिक शहीद हो गया। दो अन्य सैनिक गम्भीर घायल है, जिनका उपचार जारी है।

फरवरी में की थी बेटियों की शादी
एएसआई रमेश चन्द रैगर ने बताया की अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा में शहीद मिश्रीलाल गत 8 फरवरी को दो बेटियों की शादी की थी। इसके लिए दो महीने की छुट्यिां ली थी। इसके बाद वे ड्यूटी पर आ गए थे। परिजनों को जल्द ही आने को कहा था।


अलवर का लाल भी हुआ शहीद
श्रीनगर के अनंतनाग जिले में तैनात ग्राम पंचायत हाजीपुर के समीप ढाणी गुजरांवाली निवासी सीआरपीएफ के जवान संदीप यादव (26) भी शुक्रवार सुबह आतंकियों की गोलीबारी में शहीद हो गया। शहीद का शव शनिवार दोपहर तक गांव पहुंचने की संभावना है। जवान के शहीद की सूचना पर पूरे गांव में शोक छा गया। एक माह की भीतर बानसूर क्षेत्र का दूसरा लाल शहीद हुआ है। 13 जून को मुगलपुरा का हंसराज गुर्जर साम्भा सेक्टर में शहीद हो गया था।


झालावाड़ जिले में खानपुर के शहीद को नम आंखों से विदाई
गौरतलब है कि शुक्रवार को ही झालावाड़ जिले में खानपुर क्षेत्र के लड़ानिया गांव निवासी सेना के कमाण्डों मुकुट बिहारी मीणा को भी अंतिम संस्कार किया गया। खानपुर निवासी मुकुट बिहारी जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा के जंगलों में आंतकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। पार्थिव देह के सांगोद पहुंचने पर शहीद को अंतिम विदाई देने सांगोद कस्बे सहित आसपास के गांवों से लोग उमड़ पड़े।

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