सचिन पायलट के विधान सभा क्षेत्र में 60 लाख के 20 वेंटीलेटर डिब्बों में बंद

सचिन पायलट के विधान सभा क्षेत्र में 60 लाख के 20 वेंटीलेटर डिब्बों में बंद

 

By: pawan sharma

Published: 23 Aug 2020, 10:04 AM IST

टोंक. कोरोना महामारी में मरीज की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल से जयपुर रैफर किया जा रहा है। जिले के एक दर्जन से अधिक मरीजों की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो चुकी है। उक्त मरीजों के लाखों रुपए खर्च भी हुए है, जिनमें वेंटीलेटर पर रखे जाने का खर्च भी शामिल है।

इसके बावजूद जिला अस्पताल प्रशासन यहां करीब साठ लाख रुपए के वेंटीलेटर डिब्बों में रखे हुए है, जबकि इनका उपयोग किसी भी मरीज का जीवन बचाने में उपयोगी साबित हो सकता है। सआदत अस्पताल में कोविड-19 संक्रमण काल में 20 वेंटीलेटर नए आए, लेकिन स्टाफ के अभाव में अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।

वर्तमान में जो स्टाफ है वो पूर्व में ही दो वेंटीलेटर को सम्भाल रहा है, जिसमें भी अनट्रेंड स्टाफ है। सआदत अस्पताल के आइसीयू में पांच बेड है, जहां एक वेंटीलेटर व एक ही ट्रोमा वार्ड में है। आईसीयू वार्ड में एक डॉक्टर सहित पांच का स्टाफ कार्यरत है। जब कि एक वेंटीलेटर के लिए एक डॉक्टर सहित चार के स्टाफ के अलावा दो का अतिरिक्त स्टाफ व एक निश्चेतन की जरूरत है।

हाल ही में टोंक विधायक व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सआदत अस्पताल में विधायक कोष से तीन वेंटीलेटर दिए है। उनकी लागत करीब 18 लाख रुपए है। इतना ही नहीं राज्य सरकार ने भी सात पोर्टबल वेंटीलेटर दिए हैं। उनकी कीमत 11 लाख 6 4 हजार 6 32 रुपए है। केन्द्र सरकार ने 10 बड़े वेंटीलेटर 48 लाख रुपए की कीमत के दिए हैं।

स्टाफ के अभाव में इससे पहले वर्ष 2018 में 2 वेंटीलेटर गंगापुरसिटी, 3 वेंटिलेटर भीलवाड़ा भेजे जा चुके है। कोविड-19 में केंद्र व राज्य सरकार ने 20 वेंटीलेटर तो सआदत अस्पताल को उपलब्ध करा दिए, लेकिन अभी तक ट्रेंड स्टाफ नहीं है।

पायलट को भी किया गुमराह

कोरोना की भयावता को देखते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने जिला अस्पताल को विधायक कोष से दो वेंटीलेटर एवं अन्य उपकरण उपलब्ध करवाए थे, लेकिन पीएमओ नविन्द्र पाठक ने पायलट द्वारा भेजे गए वेेंटीलेटर का भी अब तक उपयोग नहीं किया है और ना ही उनकों स्टाफ की कमी से अवगत कराया।

राशि है फिर भी...

जिला अस्पताल के एमआरएस कोष में राशि होने के बावजूद वेंटीलेटर संचालन के लिए संविदा पर योग्य कर्मियों का नहीं लगाया गया है। जबकि अधिकारी हर बार स्टाफ नहीं होना बता कर इनके संचालन के प्रति चुप्पी साध लेता है। यह चुप्पी अब तक कई मरीजों पर भारी पड़ चुकी है।

वेंटीलेटर चालू नहीं किए जाने को लेकर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी से रिपोर्ट ली जाएगी। यहां से वेंटीलेटर के अभाव अन्य जगह इलाज के लिए गए मरीजों के बारे में भी पता किया जाएगा। वहीं एमआरएस के प्रावधान के बारे में विचार किया जाएगा।
गौरव अग्रवाल, जिला कलक्टर टोंक

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