आजादी के सात दशक बाद भी कीचड़ और गन्दगी से गुजरने को मजबूर ग्रामीण

आजादी के सात दशक बाद भी कीचड़ और गन्दगी से गुजरने को मजबूर ग्रामीण
आजादी के सात दशक बाद भी कीचड़ और गन्दगी से गुजरने को मजबूर ग्रामीण

Pawan Kumar Sharma | Updated: 06 Oct 2019, 05:10:53 PM (IST) Tonk, Tonk, Rajasthan, India

आजादी के सात दशक बाद भी शिक्षा, सडक़, चिकित्सा और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है।

 

आवां. क्षेत्र की कनवाड़ा पंचायत की सांखली ढाणी आजादी के सात दशक बाद भी शिक्षा, सडक़, चिकित्सा और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है। डामरीकृत सडक़ के अभाव और बारिश में सम्पर्क कटने के कारण यह ढाणी अलग-थलग पड़ी है। हालात यह है कि आमजन तथा विद्यार्थियों को कीचड़ और गन्दगी से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है। बीमार, महिलाएं और वृद्धों की आवाजाही तो ओर दुष्कर है।

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लोगों को अपने जूते- चप्पल हाथ में लेकर जाना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने क्षेत्रीय विधायक हरीश चन्द्र मीना से गणेशजी की बावड़ी से सांखली तक की दो किमी की सडक़ बनाने के साथ ढाणी के एक मात्र विद्यालय को फिर से शुरू करने की मांग की है।

रतन लाल मीना, सौभाग मीना, सुन्दर लाल, किशन लाल, प्रहलाद मीना और रामप्रकाश मीना ने बताया कि 150 की आबादी वाली इस बस्ती के चारों और काली मिट्टी की भरमार है, जिससे थोड़ी ही बारिश मे आवागमन अवरूद्ध हो जाता है। अन्तिम संस्कार के लिए मृतक को मोक्ष धाम तक ले जाने मे भी बहुत परेशानी होती है।

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यहां के लोगों का आरोप है कि एकीकरण के नाम पर यहां संचालित एक मात्र विद्यालय को भी पूर्व में बन्द कर दिया गया है। खास बात यह है कि यहां के लोग शत प्रतिशत साक्षर होने के कारण उन्नत कृषि को अपना रहे हैं। जल संचय का कोई प्राकृतिक स्त्रोत नहीं होने के बावजूद अच्छे उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।


सडक़ पर मवेशियों का जमावड़ा
आवां. कस्बे में पशुपालकों की अनदेखी के कारण सडक़ों, गलियों और चौराहों पर बेसहारा गायों का जमावड़ा लगा है। इससे आए दिन दुर्घटना होने से राहगीर और मवेशी दोनों जख्मी हो रहे हैं।

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भंवर सिंह नरूका, राजेन्द्र सिंह सोलंकी, पारस जैन, ईद मोहम्मद सहित कस्बे के अन्य चालकों ने बताया कि घाटी से सीनियर स्कूल और खलियानों के बालाजी तक सडक़ पर गायों के झुण्ड जमा हो जाते हैं, जो अक्सर आपस में लडकऱ स्वयं के साथ राहगीरों को भी चोटिल करते आ रहे हैं। इनसे आवागमन प्रभावित होने के साथ सडक़ पर निकलना मुश्किल हो गया है।

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