Corona virus: प्रशासनिक अधिकारियों के दावों की खुली पोल, बिना जांच व स्क्रीनिंग के पैदल ही समूह में निकले श्योपुर के श्रमिक

जयपुर से श्रमिक लॉक डाउन घोषित होने के चलतेे पैदल ही अपने गांव श्योपुर जाने के लिए पैदल सडक़ों पर समूह बनाकर निकल चुके है। इन श्रमिकों की जयपुर से डेढ़ सौ किलोमीटर अलीगढ़ पहुंचने तक किसी भी प्रकार की स्क्रीनिंग नहीं की गई।

By: pawan sharma

Published: 27 Mar 2020, 02:38 PM IST

अलीगढ़. कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री द्वारा देशभर में 21 दिन लॉक डाउन घोषित किए जाने के बाद बाहर से आने वाले व्यक्तियों की जांच करने, घरों से बाहर नहीं निकलने आदि अपील की जा रही है। वहीं कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर सभी विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस प्रशासन को सख्ती से निपटने के लिए आदेश जारी कर मुस्तैद रहकर स्थिति से निपटने के लिए पाबंद कर रखा है। व

हीं उनियारा ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों सहित अधीन सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी आदेश के प्रति लापरवाह नजर आ रहे। गुरुवार को ऐसा ही एक मामला देखने को मिला जब जयपुर से श्रमिक लॉक डाउन घोषित होने के चलतेे पैदल ही अपने गांव श्योपुर जाने के लिए पैदल सडक़ों पर समूह बनाकर निकल चुके है। इन श्रमिकों की जयपुर से डेढ़ सौ किलोमीटर अलीगढ़ पहुंचने तक किसी भी प्रकार की स्क्रीनिंग नहीं की गई।

वहीं अलीगढ़ तहसील क्षेत्र में भी यह श्रमिक कुछ देर रूक कर आगे बढ़ गए, लेकिन कोई भी प्रशासनिक व चिकित्सा अधिकारी इस दौरान सकर्त नजर नहीं आया। श्रमिक वर्ग में शामिल महिला-पुरुषों को रोककर उनियारा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एम.लईक खांन ने मजदूरों से कोरोना वायरस के सम्बन्धी जाँच व स्क्रीनिंग आदि के बारे में जानकारी लेने पर मजदूरों ने बताया कि किसी प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस प्रशासन द्वारा किसी भी जगह जांच व स्क्रीनिंग नहीं करने की बात सामने आई। इस पर तहसीलदार हनुमान प्रसाद मीना को दूरभाष पर अवगत कराया गया। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पैदल जा रहे श्योपुर के मजदूरों के लिए नाश्ते आदि व्यवस्था की गई।

एमपी के मजदूर ठीकरिया में अटके, खाने को भी तरसे
आवां. क्षेत्र के ठीकरिया गांव में गत दिनों फसल कटाई के लिए मध्यप्रदेश से आए 25 मजदूर गत दिनों किए गए लॉक डाउन के चलते अब कैद से होकर रह गए हैं। परिवहन की सुविधा नहीं होने से यह लोग अब यहां रोजी-रोटी को भी तरस गए हैं। इनका कहना है कि इन्हें अब यहां मजदूरी भी नहीं मिल रही है। इसके चलते कुछ दिनों की गई मजदूरी के बदले मिले रुपए भी खर्च हो गए हैं। अब रोटी के लिए भी गांव वालों पर निर्भर है।

गांव के ही शिशुपाल गुर्जर ने बताया कि यह लोग पर एक सप्ताह पहले फसल कटाई के लिए आए थे। कोरोना वायरस को लेकर सरकार ने धारा 144 लगाने के अलावा लॉक डाउन कर दिया। इसके चलते सभी लोग कैद से होकर रह गए हैं। हाल यह हैं कि अब इन लोगों के पास खाने-पीने का भी इंतजाम नहीं है। ऐसे में यह लोग इधर-उधर से गांव वालों से राशन सामग्री मांग कर पेट भर रहे हैं। इस समस्या को लेकर लोगों ने सरपंच व प्रशासन को भी अवगत करा दिया है, लेकिन अभी तक इनके रहने-खाने की व्यवस्था समेत इन्हें गांव भेजने की व्यवस्था नहीं हुई है।

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