scriptWorld Veterinary Day 2022 | बेजुबान के इलाज के लिए भटक रहा पशुपालक, संसाधनों के अभाव में जूझ रहा है पशुपालन विभाग | Patrika News

बेजुबान के इलाज के लिए भटक रहा पशुपालक, संसाधनों के अभाव में जूझ रहा है पशुपालन विभाग

पशुपालन विभाग न सिर्फ संसाधनों से जूझ रहा है बल्कि स्टॉफ की कमी के कारण बेजुबान पशुओं को समय पर उचित इलाज भी नही मिल पा रहा। टोंक जिले में 236 ग्राम पंखयतों में 12 लाख से अधिक पशुओं के इलाज के लिए सिर्फ 293 कर्मचारी कार्यरत है वही 196 में से 14 केन्द्र पड़े हुए है। नतीजन दूर -दराज क्षेत्र के पशुपालक को अपने रोगग्रस्त बेजुबान पशुओं के इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

 

टोंक

Updated: April 30, 2022 02:46:51 pm

टोंक. जिले का पशुपालन विभाग न सिर्फ संसाधनों से जूझ रहा है बल्कि स्टॉफ की कमी के कारण बेजुबान पशुओं को समय पर उचित इलाज भी नही मिल पा रहा। टोंक जिले में 236 ग्राम पंखयतों में 12 लाख से अधिक पशुओं के इलाज के लिए सिर्फ 293 कर्मचारी कार्यरत है वही 196 में से 14 केन्द्र पड़े हुए है। नतीजन दूर -दराज क्षेत्र के पशुपालक को अपने रोगग्रस्त बेजुबान पशुओं के इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इतना ही टोंक पशुपालन विभाग के पास वाहन का भी टोटा है।
बेजुबान के इलाज के लिए भटक रहा पशुपालक, संसाधनों के अभाव में जूझ रहा है पशुपालन विभाग
बेजुबान के इलाज के लिए भटक रहा पशुपालक, संसाधनों के अभाव में जूझ रहा है पशुपालन विभाग
38 पशु चिकित्साधिकारी के पद खाली:
जिले में पशुपालन विभाग में पशुओं को गांव ढ़ाणी तक सुलभ इलाज मुहैया करवाने के लिए पशु चिकित्सा केन्द्रों पर 30 पशु चिकित्सिाधिकारी के पर रिक्त चल रहे है। इसी प्रकार 101 पशुधन परिचर व 123 जलधारी के की भी कमी चल रही है।
दो चिकित्सालय बंद:
जिले में बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय एक ही है। तथा प्रथम श्रेणी चिकित्सालय 18 है। इसी प्रकार 54 पशु चिकित्सालय है। जिसमें मेहंदवास व दतवास चिकित्सालय स्टाफ के अभाव में बन्द पड़े है।
112 चालू, 12 पर ताले
जिले में उपकेन्द्र 124 है जिनमें से सिर्फ 112 चालू है तथा स्टॉफ की कमी से 12 उपकेन्द्र पर ताले लगे हुए है। पशुधन आरोग्य चल इकाई तीन स्वीकृत ह, जिनमें से एक चालू तथा दो चल इकाई स्टॉफ व वाहन की कमी से बंद पड़ी हुई है।
336 पद रिक्त
जिला पशुपालन विभाग में कूल 629 कर्मचारी के पद स्वीकृत है जिसमे से 293 कर्मचारी ही कार्यरत है तथा 336 पद रिक्त है। पशुओं के इलाज के लिये जिले में 57 पशु चिकित्सा अधिकारियों के पद स्वीकृत है जिनमे 19 कार्यरत है।
ये पद भी रिक्त

पशुपालन विभाग में जिले में 207 पशुधन सहायक में से 196 कार्यरत है जब की 16 पद रिक्त है। वहीं पशुधन परिचर के स्वीकृत 115 पदों में से 14 ही कार्यरत है। ऐसे ही स्वीकृत 137 जलधारी पदों के विरुद्ध भी 14 ही कार्यरत है तथा रिक्त 123 रिक्त चल रहे है। इसी प्रकार सफाई कर्मचारियों के स्वीकृत 29 पदों के विरूद्ध 6 ही कार्यरत जबकि 23 पद रिक्त चल रहे है। ऐसे ही गडरियां के स्वीकृत 4 पद में से 3 रिक्त चल रहे है। इसी प्रकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के स्वीकृत 5 में 3 ही कर्मचारी है, इनके भी 2 पद खाली है।
कार्यालयकर्मी की भी कमी
विभाग में कार्यरत कार्यालयकर्मी की भी कमी बनी हुई है। जिसमें एक सहायक लेखाधिकारी का पद स्वीकृत है वह भी रिक्त चल रहा है। इसी प्रकार सहायक प्रशासनिक अधिकारी का एक पद है वह भी रिक्त है।
83 पंचायत के भवन में
पशु चिकित्सा संस्थानों के खुद के 197 भवन है तथा 83 पंचायत के भवन में 1 दानदाता व 113 राजकीय भवन में संचालित है। पॉलीक्लिनिक राजकीय भवन में 1, प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय राजकीय भवन में 17 व 1 पंचायत भवन में संचालित है।

छह लाख से अधिक पशुओं का किया इलाज
पशुपालन विभाग टोंक द्वारा से एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 तक संस्था में 5 लाख 47 हजार 817 व शिविर में व 1 लाख 7 हजार 491पशुओं का इलाज किया गया।
50 से अधिक दवाईयां उपलब्ध
विभाग के पास 50 से अधिक दवाईयां उपलब्ध है वही10 सर्जिकल उपकरण मौजूद है। घोडों में विशेष बीमारी व सर्जरी के लिए जयपुर रेफर किया जाता है क्योंकि विशेषज्ञ व मशीन का अभाव है।
1211774 पशुधन है जिले में
2019 की पशु गणना के आधार पर जिले में कुल 1211774 पशुधन है । जिनमे केटल, बफैलो, शीपए गोट, होर्स, डंकी, केमल, पीग, डॉग, रेबीट, फ्ओल, डक आदि शामिल है। जिनमे से देवली 8274, दूनी, 81683, मालपूरा, 253447, निवाई 184584, पीपलू129901, टोडा 162029, टोंक 167052 व उनियारा में 15031 पशुधन है।
बिजली पानी का भी अभाव
यदि जिले के पशु चिकित्सा संस्थानों की और नजर डाली जाऐ तो कई केन्दगों पर बिजली, पानी जैसी सुविधाएं तक उपलब्ध नही है। विभागीय जानकारी अनुसार 118 केन्द्र ऐसे है जिनमें बिजली नही है, एक में कनेक्शन कटा हुआ है। वही 29 में जल कनेक्शन है,168 में नही है।

- विभाग में संसाधनों और कर्मचारियों के रिक्त पदों के लिए उच्चधिकारियों को अवगत कराया है। मामला सरकार के स्तर का है। फिर भी विभाग की और से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से बेहतर काम करने का प्रयास किया जा रहा है। जहां पर चिकित्सकों की कमी है उन केन्द्रों पर नजदीकी केन्द्र से कर्मचारियों की व्यवस्था की हुई है। जो बारी बारी से वहां पर बैठते हैं।
ओम प्रकाश कोली, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग टोंक।

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