Chandrika Devi temple Baksar Unnao

चंद्रिका देवी मंदिर

Chandrika Devi temple Baksar Unnao

विवरण :

सिद्ध पीठ मां चंडिका देवी का वर्णन पुराणों में भी हुआ है। जिसके अनुसार मेधा ऋषि ने राजा सूरथ और समाधि वैश्य को मां दुर्गा के महत्व को सुनाया था। यहां पर परम तपस्वी वक्र ऋषि का आश्रम था। जिनके नाम से क्षेत्र का नाम बक्सर पड़ा है। महाभारत के समय भगवान श्री कृष्ण अपने भाई बलराम के साथ यहाँ माथा टेका था और मां चंडिका देवी की स्थापना की थी। यहां पर माता के दो विग्रह है। मां चंडिका मां अंबिका के रूप में मां भक्तों को दर्शन देती हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि बक्सर में गंगा उत्तर वाहिनी है। जिससे या क्षेत्र काशी के समान पवित्र माना गया है।

नवरात्र में दर्शन का विशेष महत्व : वैसे तो 12 महीने यहां पर भक्तों की भीड़ माता के दरबार में माथा टेकने आती है। परंतु नवरात्र में मेला का का रूप ले लेता है। जनपद ही नहीं आसपास के कई जिलों से लोग माता के दरबार में माथा टेकने आते हैं। माता के जयकारे से घंटों की आवाज से नारियल के तोड़ने की आवाज से पूरा परिसर गुंजायमान रहता है।

शक्कर के अंदर खोवा भरी गुझिया यहां की पहचान : प्रसाद के रूप में नारियल चुन्नी व अन्य पूजन सामग्रियों की प्रचुर मात्रा में दुकाने लगती है यहां का गुझिया काफी प्रसिद्ध है। जिसे लोग अपने साथ ले जाते हैं। खास प्रकार की यह गुजिया केवल बक्सर में मां चंडिका देवी के मंदिर परिसर में ही मिलता है। जो यहां की पहचान बन चुका है।

मंदिर जाने का मार्ग : मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग ही एकमात्र रास्ता है। उन्नाव मुख्यालय से बक्सर मां चंडिका देवी के लिए रोजाना बसे चलती हैं। इसके अतिरिक्त लखनऊ से भी जुड़ा है मां चंडिका देवी का सिद्ध पीठ। उन्नाव से अचलगंज, लाल कुआं, भगवंतनगर होते हुए गंगा के किनारे स्थापित चंडिका देवी के मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। जबकि लखनऊ से 55 किलोमीटर दूरी पर स्थित माता के दरबार तक मोहनलालगंज, मौरावा, बिहार, भगवंत नगर होते हुए पहुंचा जा सकता है।

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