Famous Temple in Bhopal

भोपाल के प्रमुख मंदिर

Famous Temple in Bhopal

विवरण :

भारत का ह्रदय कहा जानें वाला मध्यप्रदेश धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का प्रदेश है। यहा की राजधानी भोपाल जिसे झीलो का शहर भी कहते है, अपने पर्यटन स्थलों, खान-पान, शिल्पकारी, बुनकरों के लिए खासा जानी जाती है। लेकिन यहां प्राचीन काल से पूजा-स्थल के रूप में मंदिर भी विशेष महत्व रखते रहे हैं। यहां कई मंदिर ऐसे हैं, जहां अनोखे चमत्कार भी होते बताए जाते हैं। जहां आस्थावानों के लिए वे चमत्कार देवी की कृपा हैं, तो अन्य के लिए आश्चर्य और चर्चा का विषय। तो आइये जानते है क्या खास है, भोपाल के प्रसिद्ध मंदिरों में जो यहां हर कोई होने को खिंचा चला आता है।


भोजपुर शिव मंदिर
भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, अधूरा शिव मंदिर हैं। यह भोजपुर शिव मंदिर या भोजेश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। ये मंदिर भोपाल से 32 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। भोजपुर मंदिर तथा उसके शिवलिंग की स्थापना धार के प्रसिद्ध परमार राजा भोज द्वारा की गई थी। इससिए इस जगह को भोजपुर और मंदिर को 'भोजपुर मंदिर' कहा गया। ये मंदिर बेतवा नदी के किनारे बना हुआ है। मन्दिर की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका चबूतरा 35 मीटर लम्बा है। इस मंदिर कि अपनी कई खूबियां भी हैं। इस मंदिर मे जो शिवलिंग हैं वो दुनिया के एक ही पत्थर से बना सबसे बड़ा शिवलिंग हैं। शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर है। मंदिर के शिखर के निर्माण का काम आज तक पूरा नही हो पाया है। कहा जाता है कि मंदिर को एक ही रात में बनाया जाना था लेकिन मंदिर की छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गई, इसलिए काम अधूरा रह गया। मंदिर का शिखर क्यों नहीं बन पाया इस रहस्य को कोई नहीं जानता है।इस मंदिर का दरवाजा, किसी और हिंदू इमारतो के दरवाजों में सबसे बड़ा है। भोजपुर शिव मंदिर के बिलकुल सामने पश्चिम दिशा में एक गुफा दिखाई देती है, यह गुफा पार्वती गुफा के नाम से जानी जाती हैं। इस गुफा में अनेक मूर्तिया हैं।


लक्ष्मीनारायण मंदिर, भोपाल
भोपाल के मालवीय नगर क्षेत्र में, अरेरा पहाड़ियों के पास बना लक्ष्मीनारायण मंदिर, बिरला मंदिर के नाम से प्रसिद्द है। मंदिर की स्थापना भारत के प्रमुख औद्योगिक बिड़ला परिवार द्वारा की गई थी। मंदिर के उद्‍घाटन के समय यहाँ विशाल विष्णु महायज्ञ भी आयोजित किया गया था, जिसमें अनेक विद्वानों व धर्म शास्त्रियों ने भाग लिया था। इस मंदिर का शिलान्यास वर्ष 1960 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. कैलाशनाथ काटजू ने किया था और उद्‍घाटन वर्ष 1964 में मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के हाथों संपन्न हुआ। इस मंदिर में भगवान विष्णु, शिव और अन्य अवतारों की पत्थरों की मूर्तियाँ देखी जा सकती हैं। साथ ही मंदिर मे मध्‍य प्रदेश के रायसेन, सिहोर, मंदसौर और सहडोल आदि जगहों से लाई गईं मूर्तियां रखी गईं हैं। मंदिर के पास ही में एक संग्रहालय बना हुआ है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने एक विशाल शंख भी देखने को मिलता है। मंदिर हर दिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। जन्माष्टमी' पर यहाँ श्रीकृष्ण जन्म का मुख्य आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर विष्णु की आराधना करते है।

 

मां काली का प्रचीन मंदिर
मां काली का यह मंदिर भोपाल के पास रायसेन रोड पर स्थित बिलखिरिया गांव से कुछ ही दूरी पर जंगल के बीच बना हुआ है। इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि यहा मां काली की मूर्ति एक बार स्वयं अपनी गर्दन सीधी करती है। इस मौके पर माता के दर्शन के लिए भक्तों की खासी भीड़ जमा हो जाती है। कहा जाता है कि जिस भी भक्त को माता की सीधी गर्दन देखने का मौका मिलता है उसके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं। इस मंदिर मे मां काली की मुर्ति के साथ भगवान ब्रम्हा, विष्णु और महेश की मुर्तियॉ भी मौजूद है। आमतौर पर यहां पूरे साल माता के भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के बाद वियजदशमी पर श्रद्धालुओं का तांता लगता है। चैत्र नवरात्र में रामनवमी के दिन विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है। मंदिर के महंत के अनुसार इस मंदिर से जुड़ी कई अलग- अलग मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि जिन माता-बहनों की गोद सूनी होती है, वह श्रृद्धाभाव से यहां उल्टे हाथ लगाती हैं तो उनकी मान्यता अवश्य पूरी होती है।


कर्फ्यूवाली माता मंदिर-
कर्फ्यूवाली माता मंदिर भोपाल के भवानी चौक सोमवारा पर स्थित है। इसके नाम के पीछे भी बड़ा रोचक मामला है। नवरात्र में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, साथ ही सालभर यहां दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है। मातारानी के इस दरबार में मन्नत के लिए लोग नारियल में मातारानी के लिए अर्जी लिखकर लगाते हैं। इससे श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। अश्विन नवरात्र में यहां झांकी बैठती थी, झांकी के सामने मातारानी की प्रतिमा स्थापना को लेकर 1982 में विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि यहां प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा। एक महीने तक यहां कर्फ्यू लगा रहा, उसके बाद यहां प्रतिमा की स्थापना हुई और मंदिर का निर्माण हुआ, तब से इस मंदिर को कर्फ्यूवाली माता के नाम से पहचाना जाता है।

 

जीजीबाई मंदिर, कोलार, भोपाल
भोपाल के कोलार में स्थित जीजी बाई के मन्दिर में मां दुर्गा की पूजा बेटी की तरह होती है और खास यह है कि यहां पर कपड़ों के साथ माता के नए सैन्डिल भी चढ़ाए जाते हैं। यह मन्दिर एक पहाड़ी पर स्थित है और सिद्धदात्री पहाड़ावाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि दो-ढाई दशक पहले ओम प्रकाश नाम के एक व्यक्ति ने यहां शिव-पार्वती का विवाह कराया था और खुद कन्यादान किया था। इस दौरान यहां एक मूर्ति की स्थापना भी कई गई थी और सिद्धदात्री नाम दिया। वे इसे बेटी मानकर पूजा किया करते है। धीरे-धीरे इस मन्दिर की मान्यता बढ़ती गई। यहां एक मान्यता और जो इस मन्दिर को अन्य से अनूठा बनाती है। यहां पर भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर नई चप्पल अथवा सेन्डिल चढ़ाते है। कई भक्त टोपी, चश्मा, घड़ी जैसे सामान भी चढ़ाते है। जब यहां सैन्डिल और चप्पल की तादाद बढ़ जाती है तो उन्हे जरूरतमंदों में बांट दिया जाता है। अब तो यहां विदेश में बसे भक्त भी चप्पल और सैन्डिल भेजते है।


भोजपुर का जैन मंदिर
भोजपुर में एक अधूरा जैन मंदिर है, जिसमें भगवान शांतिनाथ कि 6 मीटर ऊंची मूर्ति हैं। इसके अतिरिक्त दो अन्य मुर्तियां भी यहां पर हैं। ये मूर्तियां भगवान
पार्श्वनाथ और पारसनाथ की मानी जाती हैं। इसी मंदिर में एक महत्वपूर्ण शिलालेख भी है, जिस पर परमार राजा भोज का नाम अंकित है। इस शिलालेख के माध्यम से पता चलता है कि यह मंदिर राज भोज के कार्यकाल से सम्बन्धित है। इस जैन मंदिर के परिसर में ही एक समाधि स्थल भी है। यह समाधि आचार्य माँटूंगा की है। आचार्य माँटूंगा ने भक्तांबर स्रोत लिखा था।

 

लाल घाटी स्थित गुफा मंदिर
भोपाल में लाल घाटी स्थित गुफा मंदिर एक प्रागैतिहासिक गुफा के अंदर है। सन् 1949 में इस मंदिर की खोज स्वामी नारायण दास ने की थी। इस मंदिर में राम-सीता, लक्ष्मण, हनुमान सहित देवी दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां पर सात प्राकृतिक गुफाएं हैं। एक गुफा में स्वयंभू भगवान शिव प्राकृतिक जल में स्थापित हैं। कहते हैं कि भीषण गर्मी में भी यहां का जल नहीं सूखता है। नवरात्र और सावन के महीने में मंदिर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और भंडारों का आयोजन किया जाता है।

 

अवधपुरी मार्ग स्थित अयप्पा मंदिर
भोपाल के अवधपुरी मार्ग पर अयप्पा मंदिर है। दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र इस मंदिर में धार्मिक उत्सवों का आयोजन किया जाता है। वहीं विशेष कार्यक्रमों पर यहां मंडल पूजा उत्सव का आयोजन किया जाता है।

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