Parade Ramlila

परेड रामलीला

Parade Ramlila

विवरण :

कानपुर की सबसे पुरानी और फेमस रामलीला है परेड रामलीला। परेड रामलीला आज से करीब 141 साल (वर्ष 1877) पहले शुरू हुई थी। इस मैदान में ब्रिटिश सैनिकों की परेड़ हुआ करती थी, जिसके कारण इसका नाम परेड मैदान पड़ गया। अंग्रेजों के जमाने से अब तक इस मैदान को परेड मैदान के नाम से और यहां होने वाली रामलीला को परेड रामलीला के नाम से जाना जाता है। श्री रामलीला सोसाइटी (रजि.) परेड की रामलीला का बजट लाखों रुपयों का होता है, जिसके चलते इसे शहर की सबसे महंगी रामलीला भी कहा जाता है।

परेड रामलीला : कानपुर की सबसे पुरानी और फेमस रामलीला है परेड रामलीला। परेड रामलीला आज से करीब 141 साल (वर्ष 1877) पहले शुरू हुई थी। इस मैदान में ब्रिटिश सैनिकों की परेड़ हुआ करती थी, जिसके कारण इसका नाम परेड मैदान पड़ गया। अंग्रेजों के जमाने से अब तक इस मैदान को परेड मैदान के नाम से और यहां होने वाली रामलीला को परेड रामलीला के नाम से जाना जाता है। श्री रामलीला सोसाइटी (रजि.) परेड की रामलीला का बजट लाखों रुपयों का होता है, जिसके चलते इसे शहर की सबसे महंगी रामलीला भी कहा जाता है।

अंग्रेज भी बने थे दर्शक : वर्ष 1877 में सबसे पहले पंडित प्रयाग नारायण तिवारी, लाला शिव प्रसाद खत्री और रायबहादुर विशंभरनाथ अग्रवाल ने रामलीला की अनुमति मांगी थी। अंग्रेजों द्वारा काफी सोचने-समझने के बाद इन्हें रामलीला की अनुमति दी गई थी। 1877 में जब पहली परेड रामलीला हुई, इसे देखने अंग्रेज भी आए थे। अंग्रेजों को रामलीला का मंचन इतना अच्छा लगा कि उन्होंने हर साल रामलीला आयोजन की अनुमति प्रदान कर दी।

स्थापना : श्री रामलीला सोसाइटी (रजिस्टर्ड परेड) कानपुर की स्थापना वर्ष 1877 में कानपुर के प्रतिष्ठित परिवार से सम्बन्ध प्रकांड पंडित, महान विभूति महाराज प्रयागनारायण तिवारी के कर कमलों द्वारा हुई। उनके पश्चात नगर के लाला शिव प्रशाद खत्री, लाला फक्कीलाल खत्री, रायबहादुर लाला कन्हैया लाल अग्रवाल, रायबहादुर लाला विशम्बरनाथ अग्रवाल आदि के द्वारा सोसाइटी ने गौरवपूर्ण स्थान के साथ विकास यात्रा आरम्भ की।

अग्रवाल परिवार का संरक्षण : वर्ष 1902 चौधरी लाला हरि प्रसाद अग्रवाल ने 40 वर्षों तक परेड रामलीला के संचालन की जिम्मेदारी संभाली। उनके बाद उनके सुपुत्र मोतीलाल गर्ग ने 18 वर्षो तक सोसाइटी को अपना सरंक्षण प्रदान किया। 58 वर्षो तक चौधरी लाला हरि प्रसाद अग्रवाल के परिवार ने रामलीला के मंचन की जिम्मेदारी संभाली, जिनमें से 45 साल अंग्रेजी शासन के ही थे। वर्तमान में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष महेन्द्र मोहन अग्रवाल हैं।

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