Taj ul Masajid

ताज-उल-मस्जिद

Taj ul Masajid

विवरण :

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित ताज-उल-मस्जिद एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद का निर्माण कार्य भोपाल के आठवें शासक शाहजहां बेगम के शासन काल में प्रारंभ हुआ था, लेकिन धन की कमी के कारण उनके जीवंतपर्यंत यह बन न सकी। ताज-उल-मस्जिद का शाब्दिक अर्थ होता है "मस्जिदों का ताज"। गुलाबी रंग की इस बड़ी मस्जिद की दो सफेद गुंबदनुमा मीनारें हैं। इस मस्जिद को बनाने में लगभग 85 साल लग गए थे।

 

मस्जिद का इतिहास
इस मस्जिद का निर्माण सन 1868 और 1901 के बीच भोपाल के सुल्तान शाह जहाँ बेगम के शासनकाल में शुरू किया गया था। इस मस्जिद की लगभग 175,000 लोगो की कैपेसिटी है। ये मस्जिद भोपाल स्तिथ मोतिया तालाब के बगल में स्थापित है। इस मस्जिद की ख़ास बात ये है की ये सभी लोगो के लिए खुली रहती है, लेकिन शुक्रवार के दिन मुस्लिम समुदाय के अतिरिक्त अन्य लोगो का आना मना है। यह मस्जिद लाल पथरों से बना हुआ है। दिल्ली की जामा मस्जिद से इस मस्जिद की संरचना काफी मिलती है। ताज-उल मस्जिद भारत में सबसे बड़ी और प्रभावशाली मस्जिदों में से एक है और इसकी सुंदर वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जो मुगल स्वाद और शैली का सही नमूना है।

ताज-उल-मस्जिद लगभग 23,312 वर्ग फीट के मैदान पर फैली हुई इसके साथ ही मस्जिद की मीनारें तकरीबन 206 फीट ऊँची हैं जो की 18 मंजिला है। इसके अलावा मस्जिद में तीन बड़े गुंबज़ भी है जो मस्जिद की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। मस्जिद में एक विशाल प्रार्थना कक्ष है। जिसकी मुख्या दिवार पर प्राचीन हस्तकला का काम भी किया गया है। यह मस्जिद 250,000 वर्ग फुट में फैली हुई है। मस्जिद में एक विशाल टैंक के साथ एक बड़ा आँगन भी है। यहां पर सात लाख रुपये खर्च कर इंग्लैंड से इम्पोर्ट किया गया क्रिस्टल स्लैब भी है जिसे मस्जिद के फर्श की डिजाईन में उपयोग किया गया था। 

 

कैसे पहुंचें "मस्जिदों के ताज" तक

क्यूंकि "मस्जिदों का ताज" ताज-उल-मस्जिद एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद है। जिसे देखने दूर- दूर से पर्यटक यहाँ आते हैं इसके साथ ही मध्यप्रदेश की राजधानी होने के नाते यहाँ सुलभ यातायात साधन उपलब्ध हैं। इनमे सबसे पहले है - वायु सेवा दिल्ली, ग्वालियर, इंदौर और मुंबई से भोपाल के लिए नियमित विमान सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ साथ भोपाल शहर को जोड़ने वाली रेल सेवाएं भी हैं जैसे की भोपाल, दिल्ली-मद्रास मेन लाइन पर है तो यहाँ से निरंतर मुंबई से इटारसी और झाँसी के रास्ते दिल्ली जाने वाली मुख्य गाड़ियाँ भोपाल होकर जाती हैं।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK