दक्षिण भारत से उदयपुर पहुंची चारभुजाधारी गणपति की प्रतिमा प्रतिष्ठा के इंतजार में

लगभग 11 वीं शताब्दी की चालुक्य शैली में बनी है प्रतिमा

By: madhulika singh

Published: 10 Sep 2021, 04:39 PM IST

उदयपुर. दक्षिण भारत से उदयपुर पहुंची एक अद्भुत गणपति प्रतिमा प्रतिष्ठा के इंतजार में है। दरअसल, ये प्रतिमा दक्षिण भारत से कोई चोरी-छुपे यहां ले आया था। यह प्रतिमा उदयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर में धूणी माता गांव में एक स्कूल के पास रखी हुई है। यह गणेश प्रतिमा इस इलाके में सभी के लिए कौतूहल का विषय होने के साथ विचित्र और दुर्लभ है।

कर्नाटक के बेल्लूर व चालुक्य शैली में बनी

इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने बताया कि यह प्रतिमा शिल्प और आकार ही नहीं, पाषाण के प्रयोग की दृष्टि से कर्नाटक के बेल्लूर की बनी लगती है और तत्कालीन चालुक्य शैली में बनी है। गणेश इसमें चार भुजा वाले हैं। चारों हाथों में परशु, दंत आदि आयुध हैं और पीछे अनेक घेरों वाला परिकर बेल्लूर शैली की विशेषता लिए हुए है। संभवत: यह प्रतिमा 11 वीं शताब्दी की होनी चाहिए। इस संबंध में पुरातत्व विभाग को टीम भेजकर इसकी पड़ताल करनी चाहिए। यदि वे उनके संग्रह में रखें तो बेहतर होगा, नहीं तो इसे किसी मंदिर में प्रतिष्ठित कराया जाना चाहिए।

कचरे के ढेर में मिली थी प्रतिमा

ग्रामीणों के अनुसार, यह प्रतिमा करीब चार-पांच साल पहले कोई इस गांव में डाल कर चला गया। यह कचरे के ढेर में दबी मिली। बाद में गांव वालों को जब प्रतिमा के बारे में पता लगा तो उन्होंने इसे स्कूल के पास एक घेरे पर रख दिया। चूंकि गांववाले इस प्रतिमा के बारे में इतना नहीं जानते, एेसे में ये प्रतिमा अब तक उसी स्थिति में रखी हुई है। फोटो है...

madhulika singh Reporting
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