कोरोना काल में सरकारी स्कूलों की खुली किस्मत, बिना प्रवेशात्सव ही बढ़ा नामांकन

जिले के नामांकन में दो वर्षों में हुई 43,649 विद्यार्थियों की वृद्धि, 4 ब्लॉक में बालिकाओं के नामांकन बालकों से अधिक

By: madhulika singh

Updated: 13 Sep 2021, 12:56 PM IST

उदयपुर. कोरोनाकाल में जब बीमारी कहर बरपा रही थी तब सभी क्षेत्रों में नुकसान झेलना पड़ा। लोगों को काम-धंधे छोड़ कर कई महीनों तक घर बैठना पड़ा। परिवार के सदस्यों को खोया और आर्थिक तंगी के भी हालात हो गए। स्कूलें बंद होने से बच्चों की पढ़ाई का भी नुकसान उठाना पड़ा। फीस को लेकर अभिभावक कोर्ट तक पहुंच गए। ऐसे में बच्चों के भविष्य व शिक्षण कार्य के लिए कइयों ने सरकारी स्कूलों का दामन थामा। ऐसे में कोरोना काल में ही सरकारी स्कूलों के नामांकन में काफी वृद्धि हुई। बिना प्रवेशोत्सव व घर-घर जाए बिना ही स्कूलों में दाखिले हो गए। उदयपुर जिले के नामांकन की बात की जाए तो दो सालों में उदयपुर के सरकारी स्कूलों में 43 हजार 649 विद्यार्थी बढ़े हैं।


गिर्वा ब्लॉक सबसे आगे और चौथी में सबसे अधिक नामांकन

उदयपुर जिले में पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक नामांकन गिर्वा ब्लॉक का है। सत्र 2021-22 में गिर्वा ब्लॉक का नामांकन 52237 है तो वहीं गत सत्र 2020-21 में नामांकन 51051 रहा था। वहीं, चौथी कक्षा में सबसे अधिक नामांकन 57581 है। वहीं गत सत्र में कक्षा तीसरी में सबसे अधिक नामांकन 54044 रहा था।

भींडर, फलासिया, गिर्वा व खेरवाड़ा में बालिकाओं का नामांकन अधिक
भींडर, फलासिया, गिर्वा व खेरवाड़ा ब्लॉक ऐसे हैं, जहां बालिकाओं का नामांकन बालकों से अधिक है। यानी इन क्षेत्रों में बालिकाओं को भी स्कूल भेजने के प्रति अभिभावकों में जागरूकता बढ़ी है, जबकि अब तक ग्रामीण क्षेत्रों व आदिवासी क्षेत्रों में बालिकाओं का नामांकन कभी अधिक नहीं रहा है। ऐसे में ये भी सकारात्मक बात है कि बालिका शिक्षा के प्रति क्षेत्र में जागरूकता आई है।


सत्रवार नामांकन की तुलनात्मक स्थिति

सत्र 2019-20 - 490919
सत्र 2020-21 - 511684

सत्र 2021-22 - 534568

इस सत्र की स्थिति
उदयपुर जिले में 17 ब्लॉक

17 ब्लॉक्स में 3860 स्कूल
कक्षा 1 से 5 तक नामांकन - 251439

कक्षा 6 से 12 तक नामांकन - 283129

ये हैं नामांकन बढऩे के प्रमुख कारण-
- कोरोना काल में जब परिवारों पर आर्थिक संकट गहराया तब निजी स्कूलों की भारी फीस चुकाना हुआ मुश्किल

- सरकारी स्कूलों में कक्षा 8वीं तक की कोई फीस नहीं है। वहीं, 9 से 12वीं तक की बहुत सामान्य फीस है।
- कोरोना काल में कई दूसरे शहरों से परिवार लौटकर अपने गांवों में आए और बच्चों का प्रवेश नए सिरे से यहीं के स्कूलों में कराया

- बहुत से सरकारी स्कूलों ने अपने अच्छे कार्यों के कारण एक अलग पहचान कायम की है। सरकारी स्कूलों के सुधरते आधारभूत ढांचे, संसाधन आदि के कारण भी यहां पढ़ाने में रुचि बढ़ी है।
- अब प्रत्येक ब्लॉक में सरकारी अंग्रेजी मीडियम स्कूल होने से कई निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने इनमें प्रवेश लिया।

- मिड डे मील के तहत दिया जाने वाला कॉम्बो पैक भी एक बड़ा कारण रहा है। इसमें सूखा राशन दिए जाने पर कइयों ने बच्चों को इस कारण से भी दाखिला कराया। पूर्व में घरेलू कार्यों के कारण बालिकाओं को घर पर ही रोक लिया जाता था लेकिन अब बालिकाओं को भी प्रवेश दिलाया गया ताकि ये लाभ मिल सके।
- शिक्षण का स्तर भी सुधरा है, निजी स्कूलों की तरह यहां भी ऑनलाइन मोड पर पढ़ाई हो रही है।

madhulika singh Reporting
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