कोरोना के बाद लग गई ‘केटरेक्ट’ ऑपरेशन करवाने वालों की कतार

- पिछले वर्ष की तुलना में बढ़े मोतियाबिन्द के ऑपरेशन - आंखों के मरीजों की संख्या बढ़ी

By: bhuvanesh pandya

Published: 04 Oct 2021, 10:06 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. जिले में कोरोना का पीक गुजरने के बाद महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में केटरेक्ट (मोतियाबिन्द) के मेजर ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों की कतार लग गई है। हालात ये है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मेजर ऑपरेशन व माइनर मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। बीते वर्ष कोरोना के कड़े प्रहार के बीच जनवरी से दिसम्बर में 1427 मेजर व 316 माइनर ऑपरेशन हुए थे, जबकि इस वर्ष नौ माह जनवरी से सितम्बर तक 1674 लोगों के मेजर व 503 के माइनर ऑपरेशन हुए हैंं।

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वर्ष- 2020- जनवरी से दिसम्बर

मेजर- 1427

माइनर-316

कुल संख्या- 1743

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वर्ष 2021 जनवरी से सितम्बर

मेजर- 1674

माइनर- 503

कुल - 2177

- खास बात ये है कि पिछले पूरे वर्ष यानी 12 माह में जो मरीज सामने आए उससे ज्यादा मरीज तीन माह रहते केवल नौ माह में ही ऑपरेशन व उपचार करवा चुके हैं।

- बड़ी बात ये भी है दोनो वर्षों में अप्रेल, मई व जून में अपेक्षाकृत कम मरीज उपचार व ऑपरेशन के लिए पहुंचे हैं।

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ये है मेजर व माइनर ऑपरेशन- मेजर ऑपरेशन में सर्वाधिक केटरेक्ट यानी मोतियाबिन्द के ऑपरेशन होते हैं, इसके अलावा क्रिटोप्लास्टी (कोर्निया प्रत्यारोपण) व टेरिजियम शामिल है। माइनर ऑपरेशन में मधुमेह वाले मरीज जो इंजेक्शन लगाते हैं वह शामिल है।

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ये है फेक्ट फाइल - 2020

माह- मेजर - माइनर - कुल

जनवरी- 255- 50- 305

फरवरी- 297- 34- 331

मार्च- 160- 28- 180

अप्रेल- 5- 4- 9

मई- 12-2- 14

जून- 69- 9- 78

जुलाई- 136- 35- 171

अगस्त- 107- 18- 125

सितम्बर- 95- 31- 126

अक्टूबर- 68- 25- 93

नवम्बर- 76- 37-113

दिसम्बर- 147- 43- 19

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कुल - 1427- 316- 1743

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2021

ये है फेक्ट फाइल - 2021

माह- मेजर - माइनर - कुल

जनवरी- 210- 44- 254

फरवरी- 295- 63- 358

मार्च- 283- 57- 345

अप्रेल- 64- 21- 85

मई- 3-4- 7

जून- 107- 48- 155

जुलाई- 221- 73- 294

अगस्त- 212- 93- 305

सितम्बर- 274- 100- 374

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मोतियाबिंद- मोतियाबिंद के इलाज के लिए ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प है। इस ऑपरेशन में डॉक्टर द्वारा अपारदर्शी लेंस को हटाकर मरीज़ की आँख में प्राकृतिक लेंस के स्थान पर नया कृत्रिम लेंस आरोपित किया जाता है। कृत्रिम लेंसों को इंट्रा ऑक्युलर लेंस कहते हैं, उसे उसी स्थान पर लगा दिया जाता हैए जहां आपका प्रकृतिक लेंस लगा होता है।

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केटरेक्ट (मोतियाबिन्द) के ऑपरेशन बढऩे का कारण पिछले वर्ष का बेकलॉक है। पिछले वर्ष कोरोना के डर से मरीजों की संख्या कम पहुंची थी, इस बार वह लोग बढ़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंचे। मोतियाबिन्द होने का कारण उम्र है, इसका कोरोना का असर नहीं है। डॉ विजय गुप्ता, विभागाध्यक्ष नेत्र रोग विभाग

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