भाजपा पार्षद बोले, उदयपुर में ठेले लगाने के नाम पर जेबें भर रहे हैं अधिकारी - कार्मिक ...

भाजपा पार्षद बोले, उदयपुर में ठेले लगाने के नाम पर जेबें भर रहे हैं अधिकारी - कार्मिक ...

Mukesh Hingar | Publish: Feb, 16 2019 11:51:34 AM (IST) | Updated: Feb, 16 2019 11:51:35 AM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- बड़ा आरोप, बोले- सबूत तक है पास में

मुकेश हिंगड़/उदयपुर. शहरवासी समस्याओं से त्रस्त हैं और निगम के अफसर और कार्मिक अपनी जेबें भरने में लगे हैं। नगर निगम की बजट बैठक में यह आरोप सत्ता पक्ष के पार्षदों ने लगाया। पार्षदों ने यह भी खुलासा किया कि सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनना उनकी मजबूरी बन गई है। कई मुद्दों पर विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी नाराजगी जताई। शहर को लेकर कोई विशेष विकास योजना नहीं बनाई गई। यह आलम रहा करीब एक साल बाद शुक्रवार को हुई नगर निगम की बैठक का। इंतजार था कि शहरवासियों को टूटी सडक़ों, मनमर्जी की खुदाई, अधूरे विकास कार्यों सहित विभिन्न समस्याओं के दर्द से छुटकारा मिलेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। एक रस्म अदायगी के तहत सर्वसम्मति से वर्ष 2019-20 के लिए 313 करोड़ रुपए का बजट पारित किया गया।

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वसूली का वीडियो, लेकिन बदनामी होती इसलिए नहीं बताया
भाजपा पार्षदों ने निगम स्टाफ पर आरोप लगाया कि बाजार में ये लोग वसूली कर रहे है। कोई ठेले लगवा रहा है, कोई ठेले वालों से जेबे भर रहे है तो कोई दूसरी बार सेप्टिक टैंक खाली करने के नाम पर राशि अपनी जेब में भर रहा है। हमारे पास वीडियो तक है लेकिन हमारी बदनामी होगी इसलिए चुप है। भाजपा पार्षद अतुल चंडालिया ने कहा कि हर सडक़ पर ठेले ही ठेले दिख रहे हैं। कार्रवाई पर कहते हैं कि शोभागपुरा यूआईटी की सीमा में है तो दूसरी तरफ वहां के लाइसेंस भी दे दिए फिर ये दो मुंह वाली बात कैसे? पार्षद देवेन्द्र जावलिया ने कहा कि अपने लोग पैसे लेकर ठेले लगवा रहे हैं।

कटारिया अब बोल रहे हैं कि पर्दे के पीछे चल रहा खेल
स्वयं गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि आयड़ से शोभागपुरा 100 फीट रोड को तो ठेला रोड बना दिया है, बड़े लोग ठेले चला रहे है, बेचारा दिन भर ठेला संभालने वाला तो शाम को 100 रुपए लेकर जाता है। पारस सिंघवी ने कहा कि मेरे पास वीडियो है, हमारे होमगार्ड पैसा वसूली कर रहे है। पार्षद केसर सिंह सिसोदिया ने कहा कि मैने दो ठेलों पर पूछताछ की तो सामने आया कि दो नगर निगम के कर्मचारियों ने ही ठेले लगवाए। पार्षद रेहाना जर्मनवाला ने कहा कि देहलीगेट चौराहा पर पुलिस नियंत्रण कक्ष के पास पूरे रास्ते में ठेले लगे है। पार्षद राकेश पोरवाल ने कहा कि सेप्टिक टैंक की राशि जमा कराने के बाद गाड़ी एक के बाद दूसरे राउण्ड में मलबा नहीं निकालती है, दूसरे राउण्ड के लिए भी रसीद कटवानी होती है, प्रतीक्षा सूची लम्बी होने से फिर वापस 15 दिन लग जाते है। पार्षद वेणीराम सालवी बोले अपने स्तर पर चुपचाप दूसरे राउण्ड के पैसे अपनी जेब में रख लेते है। आशा बोर्दिया ने कहा कि ऐसा होता है, मैंने स्वयं तक पैसे दिए है।

सीवरेज : भुगतान सवालों के घेरे में

सीवरेज की डीपीआर बनाने के लिए रिपोर्ट तैयार करने पाली फर्म को भुगतान का प्रस्ताव सवालों के घेरे में आ गया। स्वयं कटारिया ने कहा कि डीपीआर तो पहले बन गई थी, इसके दस्तावेज पूरे क्यों नहीं है साथ में, कटारिया ने सवाल किया कि पहले कितना दिया, अतिरिक्त क्यों देना पड़ रहा है, कब तक देंगे कुछ स्पष्ट नहीं है। इसे पारित नहीं किया गया।

पहले के 2 करोड़ क्यों नहीं खर्च किए

सीवरेज के लिए गाडिय़ां खरीदने के प्रस्ताव पर पारस सिंघवी ने सवाल किया कि पूर्व बजट में गाडिय़ां खरीदने के लिए तीन करोड़ का प्रावधान किया था उसमें से 1 करोड़ ही खर्च किए, दो करोड़ लेप्स हो गए?

 

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गैस शवदाह की चिमनी की हाइट बढ़ाए
अशोकनगर में मोक्ष धाम में ट्रस्ट को गैस शवदाह गृह संचालन करने की अनुमति 2025 तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर पार्षद नानालाल वया ने आपत्ति की, चिमनी नीचे होने से आबादी क्षेत्र के लोग परेशान है, इसकी ऊंचाई बढ़ाकर ही अनुमति बढ़ाई जाए।

समिति को पता नहीं प्रस्ताव बना दिया

वाहन संधारण एवं संचालन मय हेल्पर में एकल निविदा खोलने का प्रस्ताव भी फंस गया। गैरेज समिति अध्यक्ष द्विवेदी, सदस्य लवदेव बागड़ी आदि ने कहा कि ये प्रस्ताव तो समिति के पास आया ही नहीं, बोर्ड में कैसे आ गया, सिंघवी बोले कि यह कैसे हो सकता है, सदस्यों ने कहा कि गैरेज अधीक्षक ने ये हिम्मत कैसे कर दी। हंसा माली ने कहा कि भवन अनुमति समिति की बैठकों की प्रोसेडिंग तक डीटीपी तैयार नहीं कर सकते है, इससे ज्यादा क्या होगा।

होर्डिंग्स वाले कमा रहे, हम सिर्फ देख रहे

अतुल चंडालिया ने सवाल उठाया कि साइन बोर्ड जो लगे हैं, कितनों को स्वीकृति दे रखी है तो खुलासा हुआ कि जो होर्र्डिंग्स है उस पर एक जने की मौत के बाद 2010 से रोक लगा दी लेकिन कुछ एजेंसियां हाइकोर्ट से स्टे ले आई। सवाल उठा कि तब से अब तक रोज होर्डिंग्स कैसे लग रहे हैं। इस पर कटारिया ने कहा कि गजब हो रहा है, निगम की जेब में पैसा नहीं आ रहा है और वे मजे कर रहे है। हमारा वकील तर्क नहीं दे पा रहा है क्या? अब भी उनको चिह्नित करो। कोर्ट में पक्ष रखे कि स्टे दे रखा है तो रोज बदल कैसे रहे है। कटारिया ने समिति अध्यक्ष नानालाल वया से कहा कि दिखाए इसे तो वया आहत होकर बोले कि अफसरों के पास चिह्नित की सूची ही नहीं है।

 

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अधिकारी को खड़ा रखो शौचालय में

सिंघवी व स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष ओमप्रकाश चित्तौड़ा ने श्रमजीवी के सामने व सूरजपोल ज्योति होटल के पास एनएस पब्लिसिटी का नाम लेकर कहा कि विज्ञापन तो लगाए जा रहे हैं लेकिन अंदर सुलभ शौचालय गंदे पड़े है। बहुत खराब स्थिति है, बहुत बदबू आती है, आसपास वाले परेशान है। कटारिया ने कहा कि एक बार वहां पर आधे घंटे एक अधिकारी को खड़ा कर दीजिए। कटारिया ने सीवरेज राशि पेटे जलदाय विभाग से राशि वसूली नहीं करने पर भी नाराजगी जताई।

विपक्ष ने ऐसा घेरा सत्ता पक्ष को
- गैरेज में कितनी गाडिय़ा है, कितनी चल रही है, इसकी जांच करें-वार्डों में गाडिय़ां आती ही नहीं है, एक राउण्ड करने के बाद तो टीपर भी नहीं आते है।
- सूरजपोल पर दो-दो घंटे कचरा उठाने वाली गाडिय़ां खड़ी रहती है, लोग दुर्गंध से परेशान है। गैरेज वाले समय पर कचरा नहीं उठाते, कंटेनर खाली नहीं करते है
- खाली भूखंडों को कचरा घर बनाने पर कार्रवाई का निर्णय कर चुके फिर भी कचरा घर बने हुए हैं भूखंड- डीटीपी फाइलें दबाकर बैठे, निर्णय नहीं लेते है, लोग परेशान हो रहे है, समय सीमा तो तय हो।
- फील्ड क्लब बिना लाइसेंस लिए वाटिकाएं कैसे चला रहा है, सडक़ों पर पार्किंग भी कर रहा है, कार्रवाई की जाए ।
- खेमपुरा में करोड़ों की जमीन पर स्कूल चल रहा है, कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है, हम उससे राजस्व कमा सकते है
- सामुदायिक भवनों की दशा सुधारों, उनको पंजीकृत समितियों को अनुबंध पर दे दीजिए।

कटारिया की नसीहत

खाली भूखंडों पर नगर निगम की सम्पत्ति होने का बोर्ड लगा दीजिए, अपने आप मालिक दौडक़र आएगा, 100 बोर्ड बनवा दे। डीटीपी सिराजुद्दीन से कहा कि आप एक दिन में कितने भवन अनुमति के कितने आवेदन आए और कितनो को मूजूरी दी, इसकी सूची दें। उन्होंने डीटीपी को चेताया कि मिस्टर हर चीज की एक सीमा होती है।- स्मार्ट सिटी में सिटी बसों के संचालन में उलझ ही गए है। तीन साल निकल गए है, हमें निगम के स्तर पर सिटी बसों का संचालन करना चाहिए।

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