उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के अरविन्दसिंह मेवाड़ ने कहा, रामजन्म भूमि पर दावा नहीं लेक‍िन मंदिर अयोध्या में ही बने

उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के अरविन्दसिंह मेवाड़ ने कहा, रामजन्म भूमि पर दावा नहीं लेक‍िन मंदिर अयोध्या में ही बने

Madhulika Singh | Updated: 13 Aug 2019, 01:25:33 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के अरविन्दसिंह मेवाड़ Arvind Singh Mewar ने कहा मेरा परिवार श्रीराम का प्रत्यक्ष वंशज है

भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . यह ऐतिहासिक रूप से सिद्ध है कि मेरा परिवार श्रीराम का प्रत्यक्ष वंशज है। हम रामजन्म भूमि ram janam bhumi पर कोई दावा नहीं करना चाहते हैं, लेकिन यह मानते हैं कि अयोध्या में राम जन्म भूमि पर श्रीराम मंदिर Ram Mandir अवश्य बनना चाहिए।
उदयपुर के पूर्व राज परिवार के अरविन्दसिंह मेवाड़ arvind singh mewar ने स्वयं को भगवान श्रीराम का वंशज बताते हुए सोमवार को यह ट्वीट किया। गत शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने पूछा था कि भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है? इसके बाद राजसमन्द से भाजपा सांसद व जयपुर के पूर्व राजघराने की सदस्य दीयाकुमारी Diya Kumari ने शनिवार को ट्वीट किया कि हम भगवान श्रीराम के वंशज Ram Descendants हैं। जयपुर की गद्दी भगवान राम के पुत्र कुश के वंशजों की राजधानी है। इसके बाद उदयपुर में भी इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। अयोध्या विवाद में उदयपुर के पूर्व राजपरिवार ने स्वयं को भगवान श्रीराम के पुत्र लव का वंशज बताया है। बताया गया कि लव के वंशजों ने मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश की स्थापना की थी। कर्नल जेम्स टॉड Colonel James Tod ने अपनी पुस्तक एनल्स एण्ड एंटीक्वीटीज ऑफ राजस्थान में भगवान श्रीराम की राजधानी को अयोध्या बताया है। उनके पुत्र लव ने लाहौर बसाया था। लव के वंशज गुजरात से मेवाड़ आए थे। उन्होंने चित्तौड़ के बाद उदयपुर को राजधानी बनाया था। मेवाड़ का राज प्रतीक सूर्य है।


- इतिहासकार डॉ. जी.एल. मेनारिया ने मेवाड़ के राजवंश के बारे में उपलब्ध साहित्य यथा पुराणों, वाल्मीकि रामायण, वेद व्यास कृत श्रीमद् भागवत, कालीदास रघुवंश की वंशावलियों के साथ ही मेवाड़ के शिलालेखों और अन्य प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर यह मत प्रकट किया है कि निश्चय ही मेवाड़ का राजवंश सूर्यवंशी और अयोध्या के राजा रामचन्द्र के वंशधर है। उन्होंने बताया कि कर्नल जेम्स टॉड की प्रसिद्ध पुस्तक राजस्थान का इतिहास के अध्याय 4 पृष्ठ 23 में लिखा है कि आमेर के राजा जयसिंह के समय के प्रसिद्ध पं. नरनाथ ने जो सूर्यवंश की एक वंशावली संग्रह की थी। उसमें लिखा है कि अयोध्या के राजवंश में श्रीरामचन्द्रजी के बाद 58वें राजा हुए। सुमित्र (सुमित) के बाद सूर्यवंश में कई राजा हुए थे। वे मेवाड़ के राजवंश में उत्पन्न राणाओं के पूर्व पुरुष थे।
- जयपुर के पोथीखाना संग्रह में उपलब्ध प्रसिद्ध पं. नरनाथ की सूर्य वंशावली से स्वत: प्रमाणित होता है कि मेवाड़ का राजवंश ही सूर्यवंशी है और आमेर (जयपुर) का राजवंश कुशवाहों से सम्बन्धित है। स्मरण रहे कि कर्नल टॉड ने त्रुटिवश राम के पुत्रों में कुश को बड़ा पुत्र माना था और लव को छोटा।
- इतिहास की प्राध्यापिका डॉ. मीनाक्षी मेनारिया ने अपने पीएचडी शोध प्रबन्ध ‘चित्तौड़ का इतिहास और पुरातात्विक अध्ययन तथा नागदा का ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक सर्वेक्षण’ के आधार पर बताया कि पुरातात्विक साक्ष्यों के अभाव तथा समकालीन मूल ऐतिहासिक ग्रन्थों के उपलब्ध नहीं होने से राजस्थान के राजवंशों के बारे में जानकारियां ख्यातों, चारण साहित्यिक ग्रन्थों व भाटों की कथाओं व मिथकों से भरी पड़ी है। उन्होंने अपने शोध में मेवाड़ राजवंश के बारे में प्रामाणिक ग्रन्थों और उपलब्ध पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध किया है कि मेवाड़ का राजवंश सूर्यवंशी है क्योंकि मेवाड़ के सभी शिलालेखों और ताम्रपत्रों आदि में ‘श्री रामो जयति’, ‘श्री एकलिंगजी प्रसादातु’, ‘श्री गणेशाय प्रसादातु’ आदि सम्बोधन से लेख मिलते हैं। इनसे सिद्ध होता है कि मेवाड़ का राजकुल अयोध्या के राजा रामचन्द्र का कुल इक्ष्वांकु सूर्यवंशी ही है।
- डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ने भी इस सम्बन्ध में ‘कुमारपाल प्रबन्ध’ ग्रन्थ में उल्लेख किया है कि चित्तौड़ (मेवाड़) का राजा चित्रांगद सूर्यवंशी था।
- इतिहासकार डॉ. अजातशत्रु सिंह शिवरती के मतानुसार मेवाड़ का राजवंश सूर्यवंशी है। इस सम्बन्ध में उनकी मान्यता है कि अयोध्या के इक्ष्वांकु वंशी नरेश भगवान श्रीरामचन्द्र जी एवं द्वारिका नरेश भगवान श्रीकृष्णजी के क्रमश: सूर्य एवं चन्द्र वंश में जो राजा हुए उनकी वंशावली का उल्लेख कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक ‘राजस्थान इतिहास’ के अध्याय 4 में किया है। श्रीरामचन्द्र जी के दो पुत्र लव एवं कुश हुए। उनमें ज्येष्ठ लव से मेवाड़ के राणा-महाराणा हुए और छोटे पुत्र कुश से आमेर एवं मारवाड़ के वंशधर हुए। आमेर व मारवाड़ के शासकों को कुश के वंशधर होने से कुशवाह (कच्छवाहे) नाम हुआ।

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