उदयपुर की इस 4000 वर्ष पुरानी सभ्यता की 47 वर्ष से किसी ने नहीं ली सुध

उदयपुर की इस 4000 वर्ष पुरानी सभ्यता की 47 वर्ष से किसी ने नहीं ली सुध

Madhulika Singh | Publish: Jul, 18 2017 11:41:00 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

आहड़ सभ्यता के अस्तित्व पर खतरा

मानव विकास के इतिहास की साक्षी 4 हजार साल पुरानी आहड़ सभ्यता का अस्तित्व पर संकट में है। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने 1970 के बाद यहां कोई भी उत्खनन कार्य नहीं करवाया है। वर्तमान में विलायती बबूल की जड़ें भूगर्भ में छिपी पुरा सम्पदा को नुकसान पहुंचा रही हैं। विभागीय अनदेखी के चलते पुरा सभ्यता स्थल (धूलकोट) कटीली झाडि़यों और बबूल के पेड़ों के घने जंगल में तब्दील हो गया है। शोधकर्ता तो दूर, आहड़ संग्रहालय के कर्मी भी इसमें पैर नहीं रखते हैं। आहड़ स्थित धूलकोट यानी मिट्टी के टीले के नीचे 4 हजार साल पुराना नगर बसा हुआ है। 1960 से 70 के दशक के बीचे डेकन कॉलेज पुणे की ओर से किए गए  उत्खनन में पुरा अवशेष मिले थे। आहड़ संग्रहालय में उत्खनन में मिले विशेष प्रकार के लाल-काले ढीकरियां, तांबे के बर्तन, लघु पाषाण उपकरण, मिट्टी के खिलौने व मूर्तियां, तांबे से बने विभिन्न प्रकार के घरेलू उपकरण, मणके, चूडि़यां, चावल, बाजरा, मंूग- मोंठ के अवशेष मानव सभ्यता के विकास की कहानी बयां करते हैं। 



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और शोध-उत्खनन की जरूरत 

वर्ष 2015 में स्थानीय अधिकारियों ने भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग को यहां उत्खनन कराने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। पूर्व में सिर्फ कार्बन डेटिंग से ही प्राचीनता का निर्धारण होता था। अब उत्खनन के लिए एएमएस डेटिंग जैसी अधिक सटीक अध्ययन तकनीक चलन में आई हैं। आगे उत्खनन होने और एएमएस जैसी विधियों के प्रयोग से आहड़ के गर्भ में छुपी नई जानकारी सामने आ सकती है।  

शोधकर्ताओं की पहुंच से दूर 

 देश-विदेश से मानव सभ्यता का अध्ययन करने वाले शोधार्थी और पुरातत्वविद अध्ययन के लिए आहड़ आते हैं।  पुरा उत्खनन क्षेत्र बबूलों की गिरफ्त में आने के कारण वे इसे देख ही नहीं पाते हैं। एेसे में संग्रहालय देखकर ही लौट जाते हैं, जबकि शोध के लिए सभ्यता स्थल और उत्खनन में निकले भवनों का निरीक्षण जरूरी होता है। सालों से सफाई नहीं होने के कारण  सभ्यता स्थल सांप-बिच्छू आदि जहरीले जीवों का आवास बन गया है।  


मैंने हाल ही में पद संभाला है। पहले क्या हुआ पता नहीं। सफाई किसी मशीन से नहीं करवाई जा सकती है। सफाई कार्य मानवीय श्रम से ही हो सकता है। इसके लिए बड़ा बजट जरूरी है। बजट का प्रस्ताव सरकार को भेजेंगे। 

डॉ. विनीत गोधल, कार्यवाहक अधीक्षक, पुरातत्व विभाग आहड़

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