बरसों से शुगर मिल बंद, शुगर मिल की जमीनें बेच भी दी

मेवाड़ शुगर मिल्स

By: Mukesh Kumar Hinger

Published: 13 Jan 2021, 11:39 AM IST

उदयपुर. मेवाड़ शुगर मिल्स की 4228 बीघा जमीन सरकार के नाम वापस करने के फैसले के बाद यह शुगर मिल्स फिर चर्चा में आ गई है। मिल पिछले कई सालों से बंद पड़ी है।
उदयपुर के अतिरिक्त कलक्टर की कोर्ट के फैसले से पहले प्रकरण में प्रभारी अधिकारी व राजकीय अधिवक्ता ने लिखित बहस प्रस्तुत करते हुए कोर्ट के समक्ष कहा था कि मेवाड़ शुगर मिल्स को राजस्थान सरकार द्वारा भूमि आवंटन का मुख्य उद्देश्य भूपालसागर मे शुगर का उत्पादन करने एवं यहां के निवासियान को रोजगार उपलब्ध कराना था एवं इसके लिए मिल का निरन्तर चलना आवश्यक था।

इस प्रकार गन्ने के उत्पादन के लिए मिल्स को राज्य सरकार द्वारा भूमि का आवंटन किया गया, किन्तु काफी वर्षो से मिल्स बंद हो चुका एवं राज्य सरकार कि उद्देश्य की पूर्ति नही हो रही हैं। मेवाड़ शुगर मिल्स के पास सिलिंग एरिये से अधिक भूमि हैं, जिसे अधिग्रहण किया जाना न्यायहित मे आवश्यक हैं। वहां कई जमीनें बेच दी गई है।

ये जमीन बिलानाम सरकार दर्ज होगी

तहसील सराड़ा के राजस्व ग्राम सल्लाड़ा मे 600 बीघा 04 बिस्वा अर्थात् 61.56 स्टेण्डर्ड एकड़, बडग़ांव मे 362 बीघा 19 बिस्वा अर्थात 37.22 स्टेण्डर्ड एकड़, वीरपुरा मे 323 बीघा 07 बिस्वा अर्थात 33.16 स्टेण्डर्ड एकड़ भूमि, तहसील सलुम्बर के राजस्व ग्राम सेरिया मे 1183 बीघा 01 बिस्वा अर्थात 277.65 स्टेण्डर्ड एकड़, बस्सी सामचोत मे 445 बीघा 05 बिस्वा अर्थात 75.03 स्टेण्डर्ड एकड़, बस्सी झुन्झंावत मे 56 बीघा 09 बिस्वा अर्थात 9.31 स्टेण्डर्ड एकड़, तहसील कपासन हाल भूपालसागर के राजस्व ग्राम डाबर उर्फ भूपालसागर मे 170 बीघा 14 बिस्वा अर्थात 52.32 स्टेण्डर्ड एकड़, रावतिया मे 425 बीघा 15 बिस्वा अर्थात 180.34 स्टेण्डर्ड एकड़, वालद मे 71 बीघा अर्थात 10.54 स्टेण्डर्ड एकड़, पारी मे 111 बीघा 13 बिस्वा अर्थात 26.68 स्टेण्डर्ड एकड़, भोपालसागर मे 186 बीघा 12 बिस्वा अर्थात 45.23 स्टेण्डर्ड एकड़, हड़मतिया मे 27 बीघा 06 बिस्वा अर्थात 2.84 स्टेण्डर्ड एकड़, फलासिया मे 69 बीघा अर्थात 8.64 स्टेण्डर्ड एकड़, सिघाडिय़ा मे 195 बीघा 13 बिस्वा अर्थात 36.89 स्टेण्डर्ड एकड़ इस प्रकार मेवाड़ शुगर मिल्स के नाम वर्ष 1963 मे राजस्व अभिलेख मे दर्ज कुल भूमि 4228 बीघा 18 बिस्वा अर्थात् 857.41 स्टेण्डर्ड एकड़ भूमि बिलानाम सरकार दर्ज करने के आदेश दिए।

कपासन से राजस्व बोर्ड होकर उदयपुर कोर्ट पहुंचा मामला

उपखण्ड अधिकारी कपासन (चित्तौडगढ़़) ने निर्णय 31 मार्च 1975 के तहत सिलिंग प्रकरण मे बाद कार्यवाही 900 बीघा 11 बिस्वा भूमि तहसील कपासन के गांवों की तथा 236.5 स्टेण्डर्ड एकड़ भूमि तहसील सलुम्बर एवं तहसील सराड़ा की अधिग्रहण करने आदेश प्रदान किया। उस निर्णय की 5 अपील अलग अलग व्यक्तियों ने जिला कलक्टर चितौडगढ़़ को प्रस्तुत की। जिला कलक्टर चितौडगढ़़ ने 12 दिसम्बर 1975 को निर्णय पारित करते हुये अपील अपीलान्ट स्वीकार कर प्रकरण को रिमांड कर दिया।
21 जनवरी 1977 को उप सचिव सीलिंग, राजस्व सीलिंग विभाग ने उपखण्ड अधिकारी कपासन द्वारा पारित आदेश के प्रकरण को रिओपन करते हुये अतिरिक्त जिला कलक्टर उदयपुर को आदेश पारित करने के निर्देश प्रदान किए। उस आदेश की पालना मे अतिरिक्त जिला कलक्टर उदयपुर ने 24 जनवरी 1979को आदेश पारित करते हुए मेवाड़ शुगर मिल्स के पास स्थित 4228 बीघा 18 बिस्वा अर्थात 2255.03 साधारण एकड़ अर्थात 857.41 स्टेण्डर्ड एकड़ जमीन मे से राजस्व ग्राम सेरिया के 37 व्यक्तियों को 397 बीघा 11 बिस्वा भूमि एवं ग्राम बस्सी़ सामचोत की 3 बीघा 5 बिस्वा भूमि एवं राजस्व ग्राम पारी की 3 बीघा 19 बिस्वा भूमि के हस्तान्तरण को मान्यता प्रदान करते हुये उक्त भूमि को कम करते हुये शेष बची हुई 3824 बीघा 3 बिस्वा भूमि मे से धारा 30 ई के अनुसार 30 स्टेण्डर्ड एकड़ भूमि मेवाड़ शुगर मिल्स के खाते रखते हुये शेष 702.97 स्टेण्डर्ड एकड़ भूमि सरप्लस घोषित करते हुये राजकीय खाते में अंकित करने आदेश दिए। तब उस आदेश के विरूद्ध विपक्षी द्वारा राजस्व मण्डल अजमेर मे अपील प्रस्तुत की, जिसका निर्णय 25 अप्रेल 1980 को हुआ एवं समस्त खरीददारो को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात पुन: निर्णय पारित करने के लिए प्रकरण उदयपुर एडीएम न्यायालय को रिमांड किया गया।

बिलानाम मतलब सरकार मालिक

भूमि का राजस्व रिकार्ड में हिसाब-किताब होता है। सभी तरह की जमीनों की मालिक सरकार होती है और जिसको दी जाती है रिकार्ड में उसके नाम चढ़ा दी जाती है और उसका खाता अलग हो जाता है। बिलानाम घोषित करने का मतलब उस जमीन की मालिक सरकार हो गई है।

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