मेवाड़-वागड़ में इस बार रोपेंगे आधे पौधे, आठ वर्ष पूरे होने पर जैव विविधता योजना हुई बंद

मेवाड़-वागड़ की पथरीली पहाडिय़ों व वन भूमि पर गत वर्ष के मुकाबले इस बार लक्ष्य से आधे पौधे ही रोपे जाएंगे plantation क्योंकि राज्य सरकार ने 8 वर्ष पूरे होने के बाद जैव विविधता परियोजना ही बंद कर दी है। साथ ही नाबार्ड ने भी बजट नहीं दिया है। अब नई योजना बनने के बाद ही पौधरोपण का लक्ष्य बढ़ पाएगा। अंचल में इस वर्ष 4133.53 हेक्टेयर में 16 लाख 45 हजार 986 पौधे लगाए जाएंगे जबकि गत वर्ष 8654 हेक्टेयर में 34 लाख से अधिक पौधे लगाए गए थे। पौधे वन विभाग की बंजर भूमि, पथरीली पहाडिय़ों में लगाए जाएंगे। वन विभाग ने उदयपुर udaipur की 23 नर्सरियों में विभिन्न प्रजातियों के 20 लाख 72 हजार 294 पौधे तैयार किए हैं।

By: Bhagwati Teli

Published: 13 Jul 2019, 12:11 PM IST

उदयपुर . मेवाड़-वागड़ की पथरीली पहाडिय़ों व वन भूमि पर गत वर्ष के मुकाबले इस बार लक्ष्य से आधे पौधे ही रोपे जाएंगे क्योंकि राज्य सरकार ने 8 वर्ष पूरे होने के बाद जैव विविधता परियोजना ही बंद कर दी है। साथ ही नाबार्ड ने भी बजट नहीं दिया है। अब नई योजना बनने के बाद ही पौधरोपण का लक्ष्य बढ़ पाएगा। अंचल में इस वर्ष 4133.53 हेक्टेयर में 16 लाख 45 हजार 986 पौधे लगाए जाएंगे जबकि गत वर्ष 8654 हेक्टेयर में 34 लाख से अधिक पौधे लगाए गए थे। पौधे वन विभाग forest department की बंजर भूमि, पथरीली पहाडिय़ों में लगाए जाएंगे। वन विभाग ने उदयपुर की 23 नर्सरियों में विभिन्न प्रजातियों के 20 लाख 72 हजार 294 पौधे तैयार किए हैं।

25 जून से अब तक संभाग में 9 लाख 70 हजार पौधे रोपे गए हैं। प्रति वर्ष लाखों पेड़-पौधे होते हैं नष्ट : विकास एवं आवश्यकता के नाम पर प्रति वर्ष लाखों पेड़-पौधों पर कुल्हाड़ी चल जाती है। बांधों, एनिकट व नहरों के निर्माण, वन भूमि पर हाइवे व सडक़ों के निर्माण, खनन, अवैध कटाई, आग की घटनाएं एवं चराई आदि से वनों का खात्मा हो रहा है। वन भूमि में अवैध अतिक्रमण एवं जंगल काटकर खेत बनाने से भी हरियाली का दायरा लगातार घट
रहा है।


103 प्रजाति के पौधे
संभाग की 123 नर्सरियों में इस वर्ष नीम, आम, अनार, आशापाल,आंवला, अगेव, अमलतास, अमरूद, आडू, अरीठा, अर्जुन,अशोक, बांस, बहेड़ा, बरगद, पीपल, कदम्ब, महुआ, बेर, बिल्व पत्र, गदाफलाश, गुड़हल, गूंदी, लसोड़ा, चूरैल, इमली, जामुन, करमदा, खाखरा, खैर, खेजड़ी, कचनार, कल्पवृक्ष, करंज समेत 103 प्रजाति के पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों की ऊंचाई 2 से 10 फीट तक है।


जैव विविधता परियोजना की 8 वर्ष की अवधि पूरी हो जाने से राज्य सरकार ने इस वर्ष इसको बंद कर दिया है। साथ ही नाबार्ड से भी धन आवंटन नहीं हुआ है जिससे इस बार पौधरोपण का लक्ष्य आधा ही रह गया है। - रामकरण खैरवा, मुख्य वन संरक्षक उदयपुर

सरकार को पेड़-पौधे लगाने का बजट घटाने के बजाय बढ़ाना चाहिए था। पर्यावरण संरक्षण मद में धन राशि कटौती करना आश्चर्यजनक है। संभाग में खनन से पहाडिय़ां नग्न हो गई है। तेज गति से वनों का विनाश हो रहा है जिससे बरसात कम हो रही है और पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
- आर.एल लोढ़ा पर्यावरणविद्

संस्थाओं को भी पौधों का वितरण
विभाग की नर्सरियों से राजकीय विभागों, शैक्षणिक संस्थाओं, भारतीय स्काउट एवं गाइड, एनसीसी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को भी एक रुपए प्रति पौधे की दर से 1000 हजार पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। दो फीट के पौधे की दर 5 रुपए, 2 से 3 फीट की 8 रुपए, 3 से 5 फीट के 15 रुपए एवं 5 से 8 फीट के पौधे की दर 40 रुपए तय की गई है।

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