BIRD FAIR: गरुड़ सहित टीमों के नाम हुए घोषित, कल से शुरू होगा बर्ड फेयर

उदयपुर- करीब 150 तरह के देशी-विदेशी प्रवासी परिंदों की आश्रय देते हैं इस गांव के दोनों जलाशय।

By: jyoti Jain

Updated: 22 Dec 2017, 11:52 AM IST

उदयपुर- जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित मेनार गांव दो खूबसूरत जलाशयों के मध्य प्रकृति की गोद में बसा है। इसकी शांत एवं सुकूनभरी आबोहवा हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले प्रवासी पक्षियों को पनाह देती है। इसी कारण इसे बर्ड विलेज के नाम से जाना जाता है। करीब 150 तरह के देशी-विदेशी प्रवासी परिंदों की आश्रय देते हैं इस गांव के दोनों जलाशय।

 

 

गरुड़ सहित टीमों के नाम घोषित
टीमों व सभी टीम लीडर्स को वन विभाग के अधिकारियों ने किट लॉग बुक एवं बर्ड रेस के लिए आवश्यक सामग्री भी वितरित की। टीमों का गठन लॉटरी से किया गया। पक्षीविद् डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि छह टीमों के नाम घोषित कर दिए गए।

 

इसमें हार्नबिल टीम के लीडर प्रताप सिंह चुंडावत, किंग वल्चर टीम लीडर प्रदीप सुखवाल, इंडियन पित्ता टीम लीडर विनय दवे, पेरिग्रीन फॉल्कन टीम लीडर अनिल रोजर्स, गरूड़ टीम लीडर शैलेन्द्र तिवारी तथा रेप्टर टीम लीडर के. एस. सरदालिया को बनाया।

 

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इस दौरान मुख्य वन संरक्षक अक्षय सिंह, वन संरक्षक इन्द्रपाल सिंह मथारू, उप वन संरक्षक हरिणी वी., सुहैल मजबूर एवं वन्यजीव विशेषज्ञ गोपी सुंदर मौज़ूद थे।

 

सुदूर से आते हैं प्रवासी पक्षी
पक्षीविद् विनय दवे के अनुसार हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्र, चीन, मलेशिया, मंगोलिया, साइबेरिया, एशिया व यूरोप में तेज सर्दी पड़ती है जिससे झीलें जमने और भोजन की कमी होने के कारण पक्षी सर्दियों में यहां आते है। इनका अक्टूबर में पहुंचना शुरू होता है जो नवम्बर तक जारी रहता है। फरवरी में ये पुन: लौटना शुरू करते हैं और मार्च के अंतिम दिनों तक सभी लौट जाते हैं।

तालाब में मत्स्याखेट नहीं होने से इन्हें भरपूर भोजन मिलता है, वहीं घास की पत्तियां खाने वाले परिन्दे आस-पास के खेतों में विचरण करते हैं। कुछ पक्षी दिनभर 35 हजार फीट ऊंची उड़ान भरते हैं और रात्रि में भोजन-पानी के लिए यहां ठहरते हैं।

 

परिवार बढ़ाने आता है ग्रेट क्रिस्टेड ग्रीब
पक्षीविद् प्रदीप सुखवाल ने बताया कि तालाबों के मुख्य आकर्षण ग्रेट क्रिस्टेड ग्रीब है जो देशान्तर से यहां आती है। इन्हें यहां का पारिस्थितिकी तंत्र इतना पंसद आया कि यहीं प्रजनन करने लगे। इन्हें आसानी से दोनों तालाबों पर देखा जा सकता है। सेवानिवृत्त एसीएफ डॉ. सतीश कुमार शर्मा बताते हैं कि गांव में तालाब का निर्माण इस प्रकार हुआ है कि कहीं गहरा तथा कहीं छिछला है जो आदर्श जलीय पारिस्थितिकी का निर्माण करता है।

 

तालाब के किनारे घाट बने हैं जिससे पक्षियों की गतिविधियां को बाधित किए बगैर इनका अवलोकन किया जा सकता है। पर्यावरण प्रेमी भारती शर्मा बताती है कि वहां पाए जाने वाले प्रमुख पक्षी रडीशैल डक, ग्रे लेग गूज, बार हैडेड गूज, नदर्न पिनटेल यूरेशियन विजन, गेडवाल, मार्श हैरियर, कॉमन क्रेन, फ्लेमिंगो, पेलिकन आदि।

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