ब्लैक फंगस: मरीज की मौत पर पर्दे की पूरी तैयारी

- मौत होने पर स्वीकारने को तैयार नहीं
- कमेटी के पास मेडिकल एक्जामिनेशन का रट्टा

- नोटिफिएबल बीमारी होने से हर जानकारी जाती है सरकार के पास
- अब घर-घर तलाशे जाएंगे मरीज

By: bhuvanesh pandya

Updated: 09 Jun 2021, 08:06 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमायकोसिस से होने वाली मौतों पर पर्दा डालने की शुरुआत कर दी गई है। सरकार ने जैसे ही महामारी अधिनियम में इसे नोटिफिएबल डिजीज की श्रेणी में लिया है, तब से कोई भी खुलकर इसमें कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। हर कोई इससे पल्ला झाडऩे का प्रयास करता है। जिस तरह कोरोना से होने वाली मौतों को अब तक छिपाया जा रहा है, उसी तरह इस बीमारी से भी होने वाली मौतों को ढांकने का प्रयास शुरू हो चुका है। इसके पीछे मेडिकल एक्जामिनेशन बता स्पष्ट नहीं किया जाता। भीलवाड़ा में चिकित्सक जिसे ब्लैक फंगस बता रहे हैं, वहां यह कमेटी इसे स्वीकार नहीं रही है।
-------

उपचार के लिए कमेटी बनाई
आरएनटी मेडिकल कॉलेज ने ब्लैक फंगस के उपचार से लेकर भर्ती करने व सर्जरी के लिए एक कमेटी बनाई है। कमेटी की नोडल ऑफिसर मेडिसीन विभाग की डॉ. नीरा सामर को बनाया गया है। कमेटी में 11 चिकित्सक लिए गए हैं। इसमें डॉ. सामर के अलावा डॉ. डीके शर्मा, डॉ. रूपा शर्मा, डॉ. नवनीत माथुर, डॉ. नरेन्द्र बांसल, डॉ. कुशल बाबू गहलोत, डॉ. तरुण रलौत, डॉ. संध्या मिश्रा, डॉ. मौना सुद, डॉ. निखिल गोयल और डॉ. कृष्णा लोढ़ा को शामिल किया गया है। इसके लिए अलग से बर्न वार्ड में मरीजों के लिए 120 पलंग लगाए गए हैं, जबकि सर्जरी के लिए इएनटी ओटी का उपयोग किया जाएगा।

------
इसलिए प्रभाव

कोविड-19 से ठीक हुए मरीजों में स्टेरॉयड के अधिक उपयोग के साइड इफेक्ट के रूप में ये सामने आ रहा है। जानकारी व जागरूकता के अभाव में, रोग की देरी से पहचान होने के कारण, देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण मरीज की मौत की आशंका रहती है। इसलिए इसकी पहचान सबसे पहले तेजी से होना जरूरी है।
----

सीएमएचओ बनाएंगे सूची, घर-घर तलाशेंगे मरीज
- गत ३५ दिनों में रिकवर हुए कोविड 19 के एेसे मरीज, जिन्हें डायबिटीज, कैंसर, अंग प्रत्यारोपण हुआ है, या जिन्हें आईपीडी या डे केयर में स्टेरॉयड दिए गए थे। उनकी सूची सीएमएचओ अब ग्रामवार व शहरी वार्ड वार तैयार करेंगे। इसके लिए सरकार ने तीन दिन का समय दिया है।

- एेसे मरीज भी सर्वे में तलाशे जाएंगे जिन्हें घर में होम आइसोलेशन के दौरान स्टेरॉयड दिया गया है।
- यह सूची सर्वे दलों के पास जाएगी, वह ब्लड शुगर लेवल की नियमित जांच करवाने के लिए इन लोगों से कहेंगे।

- दल ये भी तय करेंगे कि एेसे रोगियों में ब्लैक फंगस के लक्षण है या नहीं। यदि एेसा कोई मरीज मिलेगा तो उसे तत्काल रेफर कर हॉस्पिटल लाया जाएगा। जिले में जो इस बीमारी के अधिकृत हॉस्पिटल हैं, वे ही उपचार करेंगे।
----

ये सजगता
- लोगों को घरों में इसके बारे में बताया जाए।

- स्टेरॉयड का विवेकपूर्ण उपयोग डॉक्टर की देखरेख में हो।
- ऑक्सीजन देने के दौरान ह्यूमिडिफायर के लिए साफ व जीवाणु रहित पानी हो, जो नियमित बदला जाए।

- घर में कोई कोरोना मरीज है, उसे सिलेंडर या कंसन्ट्रेटर लगा हो तो नियमित नैजल कैनूला व माउथ मास्क बदला जाए।
- एंटी बायोटिक, एंटी फंगल, इम्यूनोसुप्रेस्सेंट जैसी दवाओं का विवकेपूर्ण उपयोग हो।

- मरीजों को धूल व सीलन भरे, मिट्टी बागवानी, काई या खाद को संभालने से बचने व व्यक्तिगत स्वच्छता की सलाह देनी होगी।
------

ये है उदयपुर के अधिकृत हॉस्पिटल
- आरएनटी मेडिकल कॉलेज

- गीतांजली मेडिकल कॉलेज
------

कमेटी द्वारा मेडिकल एक्जामिनेशन में सीटी स्केन, केओएच स्टेनिंग माइक्रोस्कॉप से की जाती है, तो ही ये कंफर्म माना जाता है कि वह म्यूकोरमायकोसिस का मरीज है, अभी तक उदयपुर में एक भी मौत हमारे यहां तो रिपोर्टेड नहीं है। इसकी दवाइयां हमें सरकार उपलब्ध करवा रही है।

डॉ. आरएल सुमन, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल, उदयपुर

bhuvanesh pandya
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned