सुखाडिय़ा सर्कल, अब सिर्फ चार रुपए में ले BOATING का मजा

शहर के सुखाडिय़ा सर्कल पर अब आपको नौकायन के लिए 80 से 160 रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। बच्चे सिर्फ दो और बड़े चार रुपए में नाव की सवारी का आनंद लेंगे।

By: madhulika singh

Published: 24 Jul 2016, 02:04 PM IST

शहर के सुखाडिय़ा सर्कल पर अब आपको नौकायन के लिए 80 से 160 रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। बच्चे सिर्फ दो और बड़े चार रुपए में नाव की सवारी का आनंद लेंगे। इसी प्रकार पैडल बोट के लिए 20 से 40 रुपए ही लगेंगे। नगर निगम ने शनिवार को नौकायन दरें दर्शाने वाला बोर्ड वहां लगा दिया। मामला भले ही हाईकोर्ट में चल रहा है लेकिन नगर निगम ने ठेकेदार के खिलाफ अनुबंध को ढाल बनाते हुए आमजन को लूट से बचाने का रास्ता निकाला है।  

नगर निगम ने नाव संचालन के लिए जेबी जैन एंड संस को 30 साल के लिए ठेका दिया। बाद में यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इस बीच, विधिक राय लेने के बाद निगम ने शनिवार को 30 साल के अनुबंध में नाव संचालन की जो दरें तय थी, उनको दर्शाने वाला बोर्ड सुखाडिय़ा सर्कल पर लगा दिया। फर्म की ओर से नाव संचालन की दरें कई ज्यादा वसूली जा रही है। टू सीटर बोट के 80 और फॉर सीटर बोट के 160 रुपए लिए जा रहे थे। 

यह हुआ अनुबंध

वर्ष 1992 में टेंडर के जरिए फर्म जेबी जैन एण्ड संस को नाव संचालन की जिम्मेदारी दी। अनुबंध में यह भी तय हुआ कि नगर निगम को फर्म प्रति महीने 1200 रुपए देगा। जो दरें तय की है, उसको तीन साल में बढ़ाया जा सकेगा वह भी अनुमोदन के बाद। नगर निगम ने शर्तों की पालना नहीं करने और विवाद होने पर 1995 में लाइसेंस निरस्त कर दिया। इसके बाद फर्म ने हाईकोर्ट की शरण ली जहां से उसे स्थगन आदेश मिल गया। इसके बाद नगर निगम में न तो 1200 रुपए जमा हुए और न ही बिजली का खर्च। नगर निगम प्रतिमाह करीब 5000 रुपए का फव्वारों एवं पार्क के पम्प का बिल भर रहा है। नौकायन को लेकर तत्कालीन जिला कलक्टर श्रीमत पांडे के खिलाफ अवमानना सहित अन्य कई मामले में न्यायालय में चल रहे हैं। मूल याचिका सहित अन्य मामले विचाराधीन हैं। 

अभी हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल

जेबी जैन एंड संस ने हाल ही हाईकोर्ट में एक और याचिका दायर की जिसमें कहा कि नगर निगम ने सुखाडिय़ा सर्कल में पानी देना बंद कर दिया है। यथास्थिति के आदेश बावजूद नगर निगम पोंड की साफ-सफाई कराने का टेंडर कर रहा। निगम के अधिवक्ता अनुराग शुक्ला ने हाईकोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि जो अनुबंध हुआ, उसमें कहीं नहीं लिखा है कि नगर निगम पानी उपलब्ध कराएगा। मामले की सुनवाई की तारीख नहीं मिली है।


यथास्थिति के बावजूद बढ़ाई दरें 

यथास्थिति आदेश के बावजूद टिकट की दरें बढ़ाने, टिकट की पर्ची नहीं देने जैसी शिकायतें मिल रही थी। इस पर नगर निगम ने अनुबंध के अनुरूप यह रणनीति अपनाई। फर्म तय दरों से ज्यादा न वसूले, इसके लिए निगम ने शनिवार को जो दरें अनुबंंध में है, उसकी सूचना वहां लगा दी।इतने साल तक चुप्पी क्यों?सुखाडिय़ा सर्कल पर नाव संचालन का मामला भले ही हाईकोर्ट में चला गया हो, लेकिन 20 साल से हाईकोर्ट का स्थगनादेश नगर निगम खारिज नहीं करवा सका। निगम हाईकोर्ट को यह भी नहीं बता सका कि ठेकेदार स्थगनादेश की पालना नहीं कर रहा है, वह तय टिकट राशि से ज्यादा ले रहा है। लापरवाही का परिणाम है कि सुखाडिय़ा सर्कल पर निगम को जेब से पैसा देना पड़ता है और मिलता कुछ नहीं है। मनोरंजन के लिए आने वालां से तय दरों से कई गुणा ज्यादा राशि वसूली जाती रही, बड़ी शर्म की बात है। नगर निगम ने शनिवार को जो तरीका अपनाया, वह अब तक क्यों नहीं अपनाया जा  सका। आज जो भी हुआ, वह जनप्रतिनिधि और अफसरों ने ही किया फिर  इतने साल क्यूं लगाए?


अनुबंध में ये दरें हैं तय


श्रेणी   /   टिकट    /   समयावधि

नौकायन (बच्चे) 2 रुपए डेढ़ से दो मिनट

नौकायन (बड़े) 4 रुपए डेढ़ से दो मिनट

पैडल बोट टू सीटर 20 रुपए 15 मिनट

पैडल बोट फोर सीटर 40 रुपए 15 मिनट

madhulika singh Reporting
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