सांसों की कीमत है यहां ‘वेंटिलेटर ’ पर

- महकमा मौन: तेजी से मिल रहे है पॉजिटिव मरीज लेकिन हमारे पूरे जिले में केवल 250 वेंटिलेटर- महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में 100 लेकिन 40 बच्चों के उपचार में

By: bhuvanesh pandya

Published: 04 Apr 2020, 07:42 AM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. यहां सांसों की कीमत वेंटिलेटर्स पर अटकी हुई है। शहर में एक के बाद एक पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे हैं, लेकिन चिकित्सा विभाग के पास वेंटिलेटर्स केवल 250 ही हैं, हालात ये है कि अधिकांश वेंटिलेटर्स केवल कागजों में ही चल रहे हैं, ना तो विभाग ने इनका फिजिकल वेरिफिकेशन करवाया है और ना ही महाराणा भूपाल हॉस्पिटल ने। हालात ये है कि हॉस्पिटल के पास भी जो 100 वेंटिलेटर्स बताए जा रहे हैं उनमें से 40 वेंटिलेटर्स तो बाल चिकित्सालय की नर्सरी, एनआईसीयू व अन्य व्यवस्थाओं में है।

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कोविड-19 से लड़ी जाने वाली जंग में बड़ा हथियार कोविड - 19 से लड़ी ये वायरस निमोनिया के बाद सीधे फेंफड़े प्रभावित करता है, मरीज की सांस रोकता है, तब कृत्रिम सांस देने के लिए ये सबसे खास है। वेंटिलेटर वह मशीन है जो रोगी को सांस लेने में मदद करती है, इसके लिए मुंह, नाक या गले में एक छोटे से कट के माध्यम से एक ट्यूब श्वास नली में डाली जाती है, इसे मैकेनिकल वेंटिलेशन कहा जाता है, यह लाइफ सपोर्ट सिस्टम है। मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत तब पड़ती है, जब कोई रोगी प्राकृतिक तरीके से स्वयं सांस लेने में सक्षम नहीं होता।ये काम करती है मशीन- फेफड़ों में आक्सीजन भेजती है- शरीर से अपशिष्ट या कार्बन डाइआक्साइड निकालती है। - लोगों को आसानी से सांस लेने में मदद करती है। - सर्जरी के दौरान जब जनरल एनेस्थिसिया दिया गया हो तब इसका उपयोग होता है- कुछ लोगों को लंबे समय तक या अपने बचे जीवन के लिए वेंटिलेटर की जरूरत होती है।

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नेगेटिव प्रेशर वेंटिलेटर: ये रोगी की छाती पर लगाया जाता है, इस फॉर्स या दबाव के कारण छाती उठती और फैलती है, इस प्रकार के वेंटिलेटर आयरन लंग, बॉडी टैंक, चेस्ट कुइरास भी कहे जाते हैं।पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेटर: इसमें मशीन एक सकारात्मक दबाव बनाता है, जो हवा को मरीज के फेंफड़ों में धक्का देता है, इससे इन्ट्रो पल्मोनरी प्रेशर या दबाव बढ़ता है। इसमें तीन प्रकार के पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेटर हैं। : वाल्यूम साइकिल्ड- जो पहले से निर्धारित की गई मात्रा या वाल्यूम वितरित होने तक वायुमार्ग पर दबाव बना रहता है। : प्रेशर साइकिल्ड- ये वेंटिलेटर आमतौर पर न्यूमेटिकली पावर्ड होते है, इसमें दबाव सीमा पहले से निर्धारित होती है, वहां तक पहुंचने तक श्वास नली पर सकारात्मक दबाव डालते रहते हैं।: टाइम साइकिल्ड- इस प्रकार के वेंटिलेटर में समय पहले से निर्धारित किया जाता है। शिशु के वेंटिलेशन के लिए ये काम आता है।

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कैसे काम करता है- वेंटिलेटर एक ट्यूब के माध्यम से रोगी से जुड़ा होता है, यह ट्यूब रोगी के मुंह या नाक या गले में श्वास नली में रखी जाती है, ट्यूब व्यक्ति के वायुमार्ग या श्वास नली में रखी जाती है तो इसे इंट्यूबेशन कहा जाता है। श्वास ट्यूब को रोगी के नाक या मुंह के माध्यम से ही विंडपाइप या श्वास नली में डाल दिया जाता है, ट्यूब उसके बाद रोगी के गले में आगे खिसकाई जाती है, जिसे एंडोट्राचेल या इटी ट्यूब कहते हैं। कभी कभी सांस लेने वाली टय़ूब को ऑपरेशन के जरिए गले में छेद कर रखा जाता है, जिसे ट्रेकियोस्टोमी कहते हैं। भोजन की बजाय ट्यूब के माध्यम से रोगी को पोषक तत्व दिए जाते हैं। ज्यादा वेंटिलेटर पर रखना भी खतरनाक है, रोगी को वेंटिलेटर एसोसिएटेड निमोनिया, वीएपी हो सकता है। साइनस, फेंफड़ों की बीमारी न्यूमोथोरेक्स भी हो सकती है। खून के धक्के जमने व त्वचा संक्रमण हो सकता है।

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दस लाख की जरूरत - देश में कोरोनावायरस के मरीजों की संख्या बढऩे के साथ ही वेंटिलेटर की जरूरत भी बढ़ेगी। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) के अनुसार मई तक कम से कम दो लाख से ज्यादा वेंटिलेटर की जरूरत होगी। लेकिन, देश में अभी 55 हजार वेंटिलेटर ही हैं। वेंटिलेटर की मांग पूरी करने के लिए मारुती महिंद्रा, कल्याणी, टाटा मोटर्स, हुंडई के अलावा कई अन्य कंपनियों ने इसके निर्माण में अपने संसाधनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। एआईएमईडी का आकलन है कि कोरोना के मामले जब सबसे ज्यादा होंगे, तब देश को 15 मई तक 1.10 लाख से 2.20 लाख वेंटिलेटर की जरूरत होगी।- एआईएमईडी फोरम का सरकार के सामने दावा है कि 20 कंपनियों के संगठन ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि हर महीने 50 हजार वेंटिलेटर उपलब्ध करवाए जाएंगे, जबकि अभी यह क्षमता 5500 से 5700 की है। ----पहले बनाते थे 400 अब 4 हजार स्कान-रे कंपनी के अनुसार अभी वह दो हजार वेंटिलेटर हर महीने बना रही थी, जिसे बढ़ाकर पांच हजार कर दिया। वह मई तक हर महीने 30 हजार वेंटिलेटर बनाएगी। आमतौर पर प्रतिमाह 400 वेंटिलेटर बनाने वाली आग्वा कंपनी अब हर महीने 4 हजार वेंटिलेटर बना रही है। वह मई तक हर महीने 10 हजार वेंटिलेटर मुहैया करवाएगी। कुल 10 कंपनियां इस काम में जुटी हैं। सरकार ने अभी तक 47 हजार वेंटिलेटर का ऑर्डर दिया है।

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बोले अधिकारी: - कोरोना वार्ड में वेंटिलेटर्स की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। अभी 16 है जिसे 40 करेंगे।- डॉ आरएल सुमन,अधीक्षक- फिलहाल संख्या ठीक है, लेकिन यदि जरूरत बढ़ती है तो तत्काल व्यवस्था करेंगे- डॉ दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ

bhuvanesh pandya Reporting
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