गाड़ी 1 मालिक 4, बहुत नाइंसाफी है

गाड़ी एक, उस पर दो संस्थाओं से उठा ऋण और दावेदार असली मालिक सहित चार। यह सब कुछ गड़बड़झाला किया एक दलाल व कार मालिक ने।

 गाड़ी एक, उस पर दो संस्थाओं से उठा ऋण और दावेदार असली मालिक सहित चार। यह सब कुछ गड़बड़झाला किया एक दलाल व कार मालिक ने। 

आरोपितों ने  परमिट व टैक्स जमा करवाने आई लग्जरी गाड़ी का फर्जी सेल लेटर बनाकर अन्य के नाम से रजिस्ट्रेशन करा लिया। धोखाधड़ी से अनजान गाड़ी मालिक के भाई के साथ मिलकर असली व नकली कागजों व गाड़ी का गिरवी रखकर दो जगहों से 10 लाख रुपए का ऋण भी उठा लिया और बाद में गाड़ी को हड़पने की नीयत से   फर्जी कागजों के आधार पर हिरणमगरी थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करा दिया। पुलिस तफ्तीश में जुटी तो आरोपितों द्वारा आरटीओ कार्यालय से इस गाड़ी के दस्तावेज का चोरी होना सामने आया। आवरीमाता कच्ची बस्ती निवासी कैलाश पुत्र लाला प्रजापत की ओर से हिरणमगरी थाने में दर्ज कराए धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने तफ्तीश के बाद परिवादी कैलाश को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए दो दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस ने आरोपित के बड़े भाई कार संचालक दिनेश प्रजापत व दलाल अनिल जोशी को नामजद किया, जिनकी तलाश जारी है। इस पूरे खेल में दोनों ही आरोपित मास्टर माइंड रहे। पुलिस ने बताया कि दिनेश के विरुद्ध गोवद्र्धनविलास व हिरणमगरी थाने में पूर्व भी गाडि़यों के फर्जीवाड़े के पांच माामले दर्ज हैं। डूंगरपुर व सिरोही भी यह आरोपित नामजद हुआ है। 

मालिक को पता ही नहीं 

अनुसंधान अधिकारी एसआई गोवर्धनराम ने बताया कि आयड़ निवासी लोकेश पुत्र सत्यनारायण चौधरी के नाम से एक इनोवा गाड़ी थी। इस गाड़ी का परमिट व टैक्स जमा कराने के लिए उसने दलाल जोशी को मूल आरसी व अन्य दस्तावेज सुपुर्द किए थे। जोशी ने अपने जानकार कार संचालक दिनेश प्रजापत के साथ मिलकर इस गाड़ी का अपने भाई कैलाश प्रजापत के नाम फर्जी सेल लेटर बनाकर रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ कार्यालय में आवेदन कर दिया। मूल रजिस्ट्रेशन के आधार पर आरटीओ ने संबंधित गाड़ी के टैक्स व परमिट के 90 हजार रुपए जमा कर लिए।

चुराए दस्तावेज

आरटीओ कार्यालय में गाड़ी के टैक्स जमा होने के बाद आरोपियों ने कैलाश प्रजापत के नाम फर्जी सेल लेटर से उसके नाम से भी रजिस्ट्रेशन करा दिया। विभाग मूल आरसी निरस्त करता, उससे पहले ही दलाल व आरोपी ने आरटीओ कार्यालय से मूल आरसी चुरा ले गए। इस दस्तावेज को उसने असली मालिक लोकेश को दे दिए जिससे उसे फर्जीवाड़े का पता नहीं चला। 

उठाए फर्जी ऋण

आरोपियों ने गाड़ी मालिक लोकेश के भाई सुरेश चौधरी से सांठ-गांठ कर गाड़ी व उसके असली कागजात को एक अन्य गाड़ी के साथ डबोक निवासी अनिल बंसल के पास गिरवी रखते हुए 7 लाख रुपए का ऋण लिया। कैलाश के नाम से बने फर्जी दस्तावेज से आरोपियों ने एक फाइनेंस कंपनी से 3 लाख रुपए का अलग से ऋण उठा लिया। दो जगह से ऋण के बाद आरोपियों ने गाड़ी हड़पने की नीयत से ही हिरणमगरी थाने में अनिल व अरुण बंसल द्वारा गाड़ी उठा ले जाने का फर्जी मामला दर्ज करवा दिया। पुलिस ने इस पर गाड़ी जब्त कर ली। 

मामले का खुलासा होने पर हिरणमगरी थाना पुलिस ने परिवादी कैलाश प्रजापत को गिरफ्तार किया। उसके  भाई सहित दो को नामजद किया। इनके विरुद्ध 4 थानों में 5 मामले दर्ज है। 

1 . गाड़ी मालिक लोकेश चौधरी ने भूपालपुरा थाने में गाड़ी के फर्जी कागज बनाने का मामला दर्ज कराया। 

2 . परिवहन अधिकारियों की ओर से सुखेर थाने में आरोपियों के विरुद्ध कार्यालय से रिपोर्ट चुराने का मामला दर्ज क राया गया। 

3 . सात लाख रुपए का ऋण देने वाले फाइनेंसर अनिल बंसल ने धोखाधड़ी पूर्वक पैसे लेने व पुलिस द्वारा गाड़ी जब्त करने पर डबोक थाने में मामला दर्ज कराया।

4 . हिरणमगरी थाने में कैलाश प्रजापत ने गाड़ी हड़पने की नीयत से एक अन्य फर्जी मामला दर्ज कराया। 

5 . एक फाइनेंस कंपनी ने फर्जी तरीके से 3 लाख रुपए का ऋण लेने पर हिरणमगरी थाने में अलग से परिवाद पेश किया। 

गाड़ी लेने कोर्ट पहुंच गए 4 दावेदार 

एक ही गाड़ी के ही 4 दावेदार गाड़ी को लेने कोर्ट पहुंच गए। असली मालिक लोकेश ने गाड़ी अपनी बताई तो फर्जी मालिक कैलाश भी गाड़ी लेने आगे आया। दोनों ही फाइनेंस कंपनियों के मालिक ने भी ऋण देने की एवज में गाडिय़ां उन्हें देने की गुहार लगाई। इस बीच, असली मालिक लोकेश पुलिस व कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इसके चलते गाड़ी डेढ़ माह से थाने में जब्त है, जबकि उसके पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं।  अलग-अलग थानों में मामले दर्ज होने से हर थाना पुलिस नए सिरे से जांच कर रही है, जबकि नियमानुसार यह फाइल एक अनुसंधान अधिकारी के पास होनी चाहिए थी। 

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madhulika singh Reporting
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