गांवों में कम्प्यूटर के कनेक्शन फेल,इ-पंचायत का डिब्बा गोल

- सरकार की मंशा नहीं हो पाई पूरी

By: bhuvanesh pandya

Updated: 08 Dec 2019, 02:09 PM IST

भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर. गांवों को कम्प्यूटर से जोड़कर नेट सुविधाएं देने और विभिन्न ग्राम पंचायतों के कार्यों को ऑनलाइन कर पारदर्शिता लाने के सरकारी मंसूबे पूरे नहीं हो पाए। सरकार ने पूरे सिस्टम का नाम 'इ-पंचायतÓ रखा, लेकिन इ-पंचायत सिस्टम प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों को खुद में नहीं समेट पाया। उदयपुर जिले की करीब 60 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों को कम्प्यूटरीकृत नहीं किया जा सका।

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ये था उद्देश्य

सरकार की मंशा थी कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक-एक कम्प्यूटर उपलब्ध करवाने से लेकर विभिन्न योजनाओं की मोनिटरिंग एवं लेखा संधारण में सुविधा की जाए। पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए एवं पंचायतों द्वारा कराए जा रहे कार्यों की सम्पूर्ण जानकारी आमजन को सहजता से उपलब्ध कराने के उद्देेश्य से राजस्थान इ-पंचायत व्यवस्था लागू होनी थी। इसमें सम्पूर्ण सूचनाएं पब्लिक डोमेन पर उपलब्ध करवाने का उद्देश्य था। इन्दिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान जयपुर के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2018-19 में 1334 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर कुल 128863 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया गया। समय-समय पर निर्देशानुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। संस्थान के माध्यम से पंचायत प्रशिक्षण केन्द्र, जिला परिषद एवं ग्राम पंचायतों के स्तर पर विभिन्न परियोजनाओं के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का लक्ष्य था।
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वर्ष 2017 में किया लागू
इंटीग्रेटेड राज इ-पंचायत सॉफ्टवेयर से ग्रामीण विकास व पंचायतीराज की सभी योजनाओं के निर्माण से जुड़े कार्य, प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, राशि का भुगतान, निरीक्षण, राशि समायोजन, यूसी, सीसी जारी करने, अन्य व्यय का भुगतान इसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से होना था। ये इसलिए भी शुरू किया गया था ताकि चैक से भुगतान नहीं कर ऑनलाइन भुगतान किया जाए। प्रत्येक पंचायत समिति की एक ग्राम पंचायत में इस सॉफ्टवेयर को शुरुआत में यानी 2017 में लागू किया गया था।

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नेटवर्क की कमी से अटके काम

नेटवर्क सही नहीं हो पाया है। नेटवर्क की कमी के कारण काम अटके हुए हैं। कई बार तो राज वितरण प्रणाली के उपयोग के लिए भी मगरी पर चढ़कर काम चलाया जाता है। दूर दराज के क्षेत्र जैसे-जैसे बेहतर नेट से जुड़ेंगे ये काम सुचारू हो पाएगा।
दयाराम परमार, विधायक, खेरवाड़ा

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मशीनें आई तो थी, ग्राम पंचायतों में इनका काम भी शुरू किया था, लेकिन कहीं नेट की समस्या तो कहीं बिजली की समस्या से हो सकता है शुरू नहीं हो पाया हो। हालांकि किसी सरपंच ने अभी तक इसे लेकर चर्चा नहीं की है।

प्रतापलाल गमेती, विधायक गोगुन्दा
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ये सरकार की उदासीनता है, इस सरकार को तो आपस में लडऩे से ही फुर्सत नहीं है। सरकार का गांवों की ओर ध्यान नहीं है। पहले एक दिल्ली जाता है तो दूसरा दूसरे दिन जाता है।
अमृतलाल मीणा, विधायक सलूम्बर

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पिछली सरकार ने जो शुरुआत की थी उसे ये सरकार समाप्त करती जा रही है। ये सरकार कुछ करना ही नहीं चाहती। हमारी भाजपा सरकार की योजनाओं को इस सरकार ने समाप्त कर दिया। पंचायतराज के काम में जनता को रुलाना चाह रहे थे। सरकारी मशीनरी से पंचायतराज चुनावों में कब्जा करना चाह रहे हैं। एक साल से कानपुर में पुलिया के काम का पैसा नहीं दे रहे हैं। मैने जिला परिषद व विधानसभा में मुद्दे उठाए हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा है।

फूलसिंह मीणा, विधायक, उदयपुर ग्रामीण

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कई पंचायतों में तो कार्मिक नहीं मिले हैं, अधिकांश में सचिवों के भरोसे काम चल रहा है, लेकिन आज भी 40 प्रतिशत सचिव ऐसे हैं, जो कम्प्यूटर कार्य नहीं जानते हैं। सचिव ही कम है तो काम भी कौन करेगा। माकूल प्रशिक्षण की सुविधा नहीं है। इसके लिए आधार तो उपलब्ध हो गए, लेकिन फॉलोअप नहीं हो पाया। ऐसे में इसका काम सही तरीके से नहीं हो पाया।
धर्मनारायण जोशी, विधायक मावली

bhuvanesh pandya
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