VIDEO : हम बीज बनें, बीज बनने के लिए जमीन में गढऩा होगा, दीक्षांत समारोह में बोले डॉ. गुलाब कोठारी

Madhulika Singh

Updated: 11 Mar 2018, 07:51:15 AM (IST)

Udaipur, Rajasthan, India

भुुुुवनेश्‍ा पंड्या/ उदयपुर . हम एक बीज की यात्रा तय करें, बीज बन सके। हर बीज का एक ही सपना होता है कि किसी ना किसी तरह बड़ा पेड़ बन जाए। पेड़ बनने के लिए बीज की वही शर्त है कि जो बीज जमीन में गढऩे के लिए तैयार नहीं होता तब तक वह पेड़ नहीं बन सकता। यानी जब तक हमें अपनी चिंता है, तब तक मैं पेड़ नहीं बन सकता। मैं कोल्ड स्टोरेज में पड़ा रहूंगा। जिस दिन मेरे मन में ये आ गया कि मुझे पेड़ बनना है उसी दिन समझ लीजिए कि मेरे जीवन के ज्ञान की उपलब्धि मुझे हो गई। यह बात राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ गुलाब कोठारी ने शनिवार को राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में कहीं।

उन्होंने कहा कि जब ये ज्ञान हमें हो जाएगा तो जीवन की राह का जो उद्देश्य है, उस पर यात्रा शुरू हो जाएगी। ईश्वर भी विशिष्ट है, उसने हमें भी विशिष्ट बनाया हैं। हम जैसा दूसरा सृष्टि में कोई नहीं तो हमारे कर्म विशिष्ट क्यों नहीं हो। हमने कभी अपने स्वरूप को समझने का प्रयास ही नहीं किया। कृष्ण गीता में कहते है कि सभी प्राणी उनका ही अंश है। शास्त्र कहते है कि अहम् ब्रह्मास्मी, सूर्य को भी हम जगत की आत्मा कहते है। कृष्ण ने सूर्य को भी गीता का उपदेश दिया। सूर्य, अर्जुन भी उसी गीता को पढ़ रहे हैं, दोनों में समानता क्या है, क्या दोनों की जीवनचर्या एक है, क्या दोनों का धर्म एक है, जैसे ही आप सत्पुरुषों के साथ जुड़ते है, तब दृष्टि स्पष्ट हो जाएगी कि हमारा स्वरूप क्या है।

 

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यदि गीता का कोई महत्वपूर्ण संदेश हमारे लिए है कि जो कुछ मेरे शरीर में घट रहा है, ठीक वहीं ब्रह्माण्ड में हो रहा है। जो ब्रह्माण्ड के घटक है, वह हमारे शरीर में भी है। कोठारी ने कहा कि आज हमें उपाधि जैसी कोई बड़ी चीज हासिल होने जैसा लगता है लेकिन उन्हें धीरे-धीरे ये अनुभव हो रहा है कि पूरा जीवन ही एक पाठशाला है, जब हम कॉलेज में थे तो हमारा शायद पढ़ाई में मन नहीं लगता होगा, लेकिन आज लगता है कि यदि हम नहीं पढ़े तो हमारा खाना ही हजम नहीं होगा। ये बात बिना गुरुजनों के आशीर्वाद के समझ में नहीं आती। कोठारी ने कहा कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं है, ज्ञान का कोई छोर नहीं है। हमारे यहां तो कहते है कि आज भी 84 लाख योनियों में घूम-घूम कर के कोशिश करता है कि वह उस ज्ञान को पकड़ सके। उसके सहारे बाहर निकल सके। तब उसे आत्मज्ञान कहा जाएगा।

उन्होंने मुख्य अतिथि सत्यव्रत शास्त्री के लिए कहा कि वह आदर्श है, वह शतायु होने वाले है, उन्हें कल महाराणा मेवाड़ समारोह में 100 वां सम्मान प्राप्त होगा। हमारा मार्गदर्शन पिछले कुछ सालों से वे कर रहे हैं, इसी राह पर चलते-चलते हमारा परिचय हुआ, तब हमें लगा कि हमें भी गुरु चाहिए, गुरु के बिना बड़ी राह नहीं मिलती। जो स्कूल कॉलेज की शिक्षा में शब्द ब्रह्म की साधना की अवधारणा समाप्त हो गई। आज जिसे हम डिग्रियां कह रहे हैं, वह जीवन में उपयोगी कहां है, सिवाए नौकरी करने के। शब्द ब्रह्म से इन डिग्रियों का कही ना कही संबंध होना आवश्यक है, ये बात इसलिए समझ में आती है, जब ऐसे गुरु हमारी उंगलियों को पकड़ते हैं तब हमें लगता है कि जीवन के सारे आश्रम भी यहां आकर इस श्रेणी में जुडऩे चाहिए। कोठारी ने सम्मानित हुए सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें आज बड़ी उपाधियां उपलब्ध हुई, उनकी तपस्या रंग लाई। उन्होंने स्वयं को भी बधाई देते हुए कहा कि वह भी उनमें से एक बन गए हैं। कुलाधिपति एचसी पारख और कुलपति सारंगदेवोत ने डॉ. कोठारी को डी लिट की उपाधि से नवाजा। पदमभूषण डॉ सत्यव्रत शास्त्री ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि हर शिक्षण संस्था छात्र के लिए माता संस्था होती है। माता दूध पिलाकर बच्चे को बड़ा करती है, शिक्षण संस्था ज्ञान का दूध पिलाकर उसे बड़ा करती है। उसका ध्यान रखना उसका मान बढाना विद्यार्थी का कत्र्तव्य है। जिस संस्था ने आपको इतना कुछ दिया है, उसे कुछ देने का आपका अब अवसर है। जो कुछ भी आपसे बन पड़े वह आप इसके लिए कीजिए, संस्था आगे बढनी चाहिए। भारतीय पंरपरा में गुरू का स्थान बहुत ऊंचा है। उसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा मनुष्य रूप में परब्रह्म माना गया है।

समारोह के दौरान कुलपति प्रो सारंगदेवोत ने कहा कि 1937 में स्थापित विद्यापीठ आज अपने विश्वविद्यालय के वृहद स्तर पर पहुंच गई है। इसकी देश ही नहीं विदेशी विश्वविद्यालयों से भी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत यहां विद्यार्थी वहां तथा वहां के विद्यार्थी यहों अध्ययन करने आ रहे है। उन्होने कहा कि आज उच्च शिक्षा में भारतीय शिक्षा पद्धति की जो बेडिया है उन्हे हम तोडना चाहते है हम जनता की शिक्षा के लिए जनता के पास जाना चाहते है। आज उच्च शिक्षा का माहौल जनता के लिए ही नहीं समाज के सभी वर्गो के लिए है। विद्यापीठ एक और जहां उच्च शिक्षा में बेहतर से बेहतर आयाम स्थापित कर रहा है, उससे कई गुना ज्यादा फोकस रिसर्च पर रहा है। जो इस संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि है। यहां सिर्फ स्कॉलर्स ही नहीं, बल्कि यहां के फेकल्टी सदस्य भी देश विदेशों में अपने शोध का वाचन कर चुके हैं। इसके लिए सारा खर्च विवि स्तर पर वहन किया जाता है। कुलाधिपति एचसी पारख ने कहा कि उच्च शिक्षा की दिशा में विद्यापीठ नए आयाम स्थापित कर रहा है। इसी क्रम हमने कन्या महाविद्यालय शुरू करने की पहल की है, ताकि बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन एवं बढावा मिल सके।

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नौवें दीक्षांत समारोह में 130 छात्र छात्राओं को पीएचडी की उपाधि से नवाजा गया, जबकि 84 को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। 84 गोल्ड मेडल में 62 छात्राओं ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया है। समारोह में वाणिज्य सकाय से 7, कंप्यूटर साइंस से 12, शिक्षा संकाय से 29, मानविकी संकाय से 11 व सामाजिक विज्ञान संकाय से 52 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि

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