धार्मिक मेलों पर 'कोरोना' के बादल, छह करोड़ के नुकसान की आशंका

राज्य में देवस्थान विभाग आयोजित करता है, अकेले हनुमानगढ़ के गोगामेड़ी मेले से होती है करोड़ों की आय

By: jitendra paliwal

Published: 02 Aug 2020, 10:25 PM IST

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. कोरोना संकट राज्य में आगामी महीनों में लगने वाले कई बड़े धार्मिक मेलों और उनकी आमदनी पर भी पानी फेरेगा। अकेले हनुमानगढ़ के गोगामेड़ी मेला आयोजन नहीं होने की स्थिति में करोड़ों का नुकसान होगा।
कोविड-19 जिस तेजी से फैल रहा है, उसके मद्देनजर मेलों का आयोजन खटाई में पड़ता दिख रहा है। राज्य में आठ बड़े धार्मिक मेले लगते हैं, जिनमें राजस्थान ही नहीं, कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु आते हैं। गोगामेड़ी का मेला भाद्रपद की शुरुआत में लगता है, जिससे देवस्थान विभाग को पांच करोड़ रुपए से ज्यादा की आय होती है। इस बार तीन अगस्त से यह शुरू होना था, मगर आयोजन मुश्किल है। धार्मिक मेलों में अस्थायी दुकानों की नीलामी से और मंदिर में चढ़ावे से करोड़ों रुपए की आमदनी होती है। बड़े मेलों के अलावा विभाग द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित कई छोटे-बड़े मंदिरों के ट्रस्ट भी मेले आयोजित करते हैं।

- ये भी नहीं दे रहे किराया
विभागीय सूत्रों ने बताया कि लॉकडाउन अवधि में विभाग की सम्पत्तियों का किराया भी जमा नहीं हो रहा है। दुकानदार पैसा नहीं दे पा रहे हैं। विभाग भी सख्ती नहीं कर रहा है। एग्रीमेंट के तहत दी गई दुकानों का किराया स्थिति बदलने पर आने की उम्मीद है।

ये हैं आय के स्रोत
1. विभाग के अधीन मंदिरों की धर्मशालाओं व स्थायी दुकानों का किराया।
2. धार्मिक मेलों के दौरान अस्थायी और सालभर के लिए स्थायी दुकानों का आवंटन।
3. लाखों रुपए का चढ़ावा भी आता है, जिसमें नकदी, आभूषण व अन्य चीजें होती हैं।

--देवस्थान विभाग के प्रमुख मेले--
1. गोगाजी का मेला, हनुमानगढ़ की नोहर तहसील के गोगामेड़ी में भाद्रपद से शुरू होकर एक माह तक चलता है। इसमें देशभर से पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं।
2. कैलादेवी का मेला, झीलकवाड़ा, भरतपुर में चैत्र मास में भरता है।
3. ऋषभदेवजी का मेला, उदयपुर जिले के धूलेव में चैत्र कृष्ण अष्टमी से लगता है।
4. माताजी मावलियान का मेला जयपुर के आमेर में आयोजित होता है।
5. श्रीचारभुजाजी का मेला राजसमंद जिले के गढ़बोर में जलझूलनी एकादशी पर भरता है।
6. श्री मंगलेश्वर महादेव का मेला चित्तौडग़ढ़ की राशमी तहसील के मातृकुण्डिया में लगता है।
7. श्री भद्रकाली का मेला हनुमानगढ़ में भरता है।
8. श्री घोटिया आम्बाजी का मेला बांसवाड़ा जिले में आयोजित होता है।
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---फैक्ट फाइल---
203 मंदिर हैं देवस्थान विभाग के अधीन
2 मंदिर टेम्पल बोर्ड चलाता है
59469 विभाग के अधीन राजस्थान व अन्य कई राज्यों में हैं
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अभी तो कोई मेले आयोजित नहीं होंगे। सरकार की गाइडलाइन पर सबकुछ निर्भर करेगा। बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर मेलों की सम्भावना भी कम नजर आती है। बेशक आय प्रभावित होगी, लेकिन हम श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था करेंगे।
राजेन्द्र भट्ट, आयुक्त, देवस्थान विभाग

jitendra paliwal Desk
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