स्नेह का धागा भले ही ना पहुंचे लेक‍ि‍न वीरा की सलामती जरूरी

भाई-बहन के स्नेह पर दिखा कोरोना का साया, संक्रमण का डर : डाक से नहीं भेजी जा रही राखियां

 

By: madhulika singh

Published: 24 Jul 2020, 05:35 PM IST

उदयपुर. बहन के लिए भाई की सलामती से बढक़र क्या हो सकता है। भाई की कलाई भले ही सूनी रह जाए, लेकिन उसे कोरोना संक्रमण के खतरों से बचाए रखना बहन का फर्ज है। इसी डर से इस बार बहनें भाई को डाक से राखियां भेजने में हिचकिचा रही हैं।

रक्षाबंधन पर्व नजदीक है। हर वर्ष राखी के त्योहार पर शहर के मुख्य बाजारों, चौराहों पर लगने वाली दुकानें तथा राखी भेजने वाली बहनों की डाक घरों में कतारें रहती थी। इस बार कोराना के खौफ के चलते रौनक नजर नहीं आ रही है। यही कारण है कि डाक से भेजे जाने वाले राखी लिफाफों और पार्सल की संख्या में कमी आई है।

करीब आधी रह गई संख्या
राखी का त्योहार आने में महज दस दिन बचे हैं। बीते सालों में राखी से महीनेभर पहले से राखी के दिन तक प्रतिदिन 1600 से 1800 लिफाफे डाकघरों से बुक होते थे। इस बार ये संख्या महज 800 से 1000 ही रह गई है। इस बार डाक विभाग राजस्थान से बाहर जाने वाले राखी लिफाफों के लिए २५ अगस्त तक ही बुकिंग स्वीकार करेगा, वहीं प्रदेश में जाने वाली डाक २८ अगस्त तक स्वीकार करेगा। इस बार गाडि़यों की कमी के कारण पहले जैसी व्यवस्था नहीं हो पाई है।


नहीं आए लिफाफे भी

हर बार की तरह डाक विभाग की ओर से राखी के लिए विशेष लिफाफे आते थे। १० रुपए की कीमत के इन लिफाफों की काफी मांग रहती थी। लेकिन, इस बार अब तक ये लिफाफे डाकघरों में उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। खास बात ये कि राखी लिफाफे वाटर प्रूफ होते हैं, जिससे बरसात का असर नहीं होता, वहीं खास डिजाइन के बने होते हैं।

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