घर में गाड़ी व साधन सुविधाएं है, ले रहे जरूरतमंद का भोजन किट!

आप सम्पन्न है तो मदद कीजिए लेकिन ऐसे भोजन किट मत लीजिए, आपका किट वास्तवित जरूरतमंद के काम आएगा

By: Mukesh Kumar Hinger

Updated: 29 Mar 2020, 10:14 PM IST

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. जो सुबह कमाने जाते है और शाम को उसी से घर चलता है लेकिन जब बात लॉक डाउन की आती है तो ऐसे परिवारों की मुसीबतें इन दिनों बढ़ी हुई है। ऐसे समय में प्रशासन, दानदाता और संस्थाओं ने उनकी सुध ली है लेकिन इस दौर में भी कुछ ऐसे परिवार भी है जिनके पास गाड़ी-घोड़ा घर में पड़ा है लेकिन वे सरकारी व मुफ्त का लाभ लेने में भी पीछे नहीं रह रहे है। ऐसे समय में जेब से कुछ मदद करने की बजाय ऐसा कर रहे है। शहर में जिला प्रशासन व संस्थाओं की टीमों के सामने भी ऐसे लोग सामने आए है। जिला प्रशासन की और से रसद विभाग के साथ बनाई गई 11 टीम भोजन किट को लेकर जब घरों तक पहुंची तो कई ऐसे परिवार सामने आए जिनके घर में दुपहिया, चार पहिया वाहन खड़े थे, वेअच्छे मकान बने हुए थे लेकिन वे भी इस तरह का लाभ लेने में भी पीछे नहीं है।

तीन केस से समझे

केस 1 : मल्लातलाई क्षेत्र में टीम जब किट देने गई और किट लेने वालों के पास महंगे मोबाइल थे। टीम ने कहा कि आप तो सम्पन्न है अगर आप नहीं लेंगे तो जरूरत वालों के काम आएगा तो मान गए। बाद में यह जरूर बोले कि हमारा नाम किसने लिखवा दिया है।

केस 2 : सविना क्षेत्र में जब टीम ने किट वितरण शुरू किया तो कुछ की शक्ल सूरत ही बता रही थी कि उनको किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। बाद में उनको समझाया तो मान भी गए लेकिन दो तो ऐसे थे कि सूची में नाम है आपको देना ही होगा। वे बहस पर उतर गए।

केस 3 : पहाड़ा व आसपास के क्षेत्र में भी सम्पन्न लोग सामने आए लेकिन किट लेने से पहले ही उन्होंने मना कर दिया कि उनको जरूरत नहीं है। ये किट जरूरत वालों तक देना। टीम के सदस्यों को जहां यह लगा कि कोई जरूरतमंद है और सूची में उनका नाम नहीं है तो उनकी भी मदद की गई।

नाम नहीं था सूची में लेकिन दिल खोलकर मदद की

टीम जब मौके पर किट लेकर गई तो कई जगह पर टीम के सदस्यों का दिल पसीज गया। पहले ही दिन सामने आया कि टीम जिनकी सूची लेकर गई उस सूची के अलावा कई चेहरे ऐसे आए जिनकी शक्ल देखकर यह सत्यापन हो जाता है कि वह वास्तवित जरूरतमंद है लेकिन सूची में उसका नाम नहीं है। यह बात सामने आने के बाद जिला कलक्टर आनंदी ने कहा कि जरूरतमंद किसी भी तरह से भूखा नहीं रहे। बाद में डीएसओ ज्योति ककवानी ने भी टीमों को निर्देश दिए कि ऐसे परिवारों का सूची में नाम नहीं हो तब भी एक बार मदद कर दीजिए। टीम ने रूपनगर, पटेल सर्कल सहित कई स्थानों पर ऐसे परिवारों की मदद की गई।

ऐसे चिन्ह्ति किए परिवारों के नाम
असल में प्रशासन ने भोजन किट व्यवस्थित जरूरतमंद तक पहुंच जाए इसके लिए सिस्टम तैयार किया। बीएलओ के जरिए ऐसे परिवारों की सूची तैयार कराई। उक्त जरूरतमंद परिवारों की सूची को रसद विभाग को दिया गया। विभाग ने अपनी टीमों के जरिए वहां भोजन किट पहुंचाया। उसमें भी टीम राशन कार्ड व आधार देखती है। राशन कार्ड में अगर इस महीने का राशन नहीं लिया गया है तो उनको भोजन किट दिया जाता है।

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Mukesh Kumar Hinger Desk
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