हर महीने दो बार खुद बदल रहा है कोरोना वायरस, दुनियाभर में वैक्सीनेशन के बाद खतरनाक होकर लौटा: डॉ पुरोहित

- - यूके के नोटिगंमशायर के माइक्रोबायोलॉजी कंसलटेंट डॉ प्रशान्त पुरोहित से बातचीत

By: bhuvanesh pandya

Published: 15 Apr 2021, 09:44 AM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. यूके के नोटिगंम शायर के माइक्रोबायोलॉजी कंसलटेंट डॉ प्रशान्त पुरोहित का कहना है कि पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है, अब तक दुनियाभर के करोड़ों लोगों ने टीके लगवा लिए हैं। ऐसे में अब जैसे-जैसे ये टीके लग रहे हैं, वैसे-वैसे कोरोना का ये वायरस भी हर महीने में दो बार बदलाव कर रहा है, ताकि वह इस टीकाकरण के बीच खुद को बचाकर लोगों को संक्रमित कर सके। ऐसे में ये वायरस पहले से भी ज्यादा खतरनाक होकर लौटा है। इसमें बड़ी बात ये है कि प्रकृति उसे इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।

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इसलिए आ रहे है वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमित

भारत सहित दुनिया के कई देशों में ये बात सामने आ रही है कि टीकाकरण के बाद भी लोग संक्रमित हो रहे हैं, इसे लेकर डॉ पुराहित ने बताया कि ये सब कोरोना के बदलते रूप के कारण ही हो सकता है, हालांकि फिलहाल यूके सहित अलग-अलग देशों में इस पर रिसर्च जारी है, कि इसका क्या कारण है। इस पर अभी नतीजा सामने नहीं आया। इसमें एक कारण ये भी हो सकता है कि जो वैक्सीन लगाई जा रही है, वह संबंधित टीकाकरण स्थल तक पहुंचते-पहुंचते प्रभावित हो रही हो। यानी जिस कोल्ड चैन से इसे ले जाया जाता है, यदि कही वह गर्मी के बीच से गुजरती है तो इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके लिए तो ये जांच का विषय भी है कि जो व्यक्ति टीकाकरण के बाद संक्रमित हुआ, उसे जो वैक्सीन लगी उस पूरे बैच की जांच की जाए। ------वैक्सीन से पहले से लेकर बाद तक के नमूनों पर चल रहा है रिसर्च डॉ पुरोहित ने बताया कि अभी यूके में ऐसे कई व्यक्तियों के खून के नमूनों, नाक व गले से सेंपल लेकर टेस्ट किए जा रहे है, इसमें ये देखा जा रहा है कि टीकाकरण से पहले और बाद में क्या बदलाव आए। वायरस के भी आरएनए से जिनोम सिक्वेंसिंग परीक्षण हो रहे हैं, ताकि बदलते वायरस में क्या बदलाव है वह भी देखा जा सके और उसके अनुरूप आगे उससे लडऩे की तैयारी की जा सके। इस परीक्षण में टीकाकरण के बाद लोगों में बढ़ी हुई इम्यूनिटी का प्रोफाइल देखा जा रहा है।

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नया स्ट्रेन खतरनाक

डॉ पुरोहित ने बताया कि द. अफ्रीका में कोरोना के म्यूटेंट के बाद सामने आया स्ट्रेन बेहद खतरनाक गति से संक्रमण फैला रहा है, यानी वहां दूसरी लहर में सामने आया वायरस कोविशिल्ड से नियंत्रित नहीं हो रहा है। इस पर भी नमूनों से परीक्षण ले रहे है कि कैसे और क्या बदलाव इसमें आ रहे है, ये रिसर्च भी अभी प्रक्रिया में है। --------यूके में लोग कम तो बाहर बिना मास्क के घूम सकते हैं...यूके में जनसंख्या कम होने से लोगों को घर से बाहर मास्क पहनने पर पाबंदी नहीं की है। यहां नेशनल हैल्थ सर्विस ने लोगों को सोसायटी में मास्क पहनने से लेकर डिस्टेंसिंग व हैंड सेनेटाइजेशन की गाइड लाइन का पालन करने को कहा है। लोग यहां घर से बाहर बिना मास्क के इसलिए घूमते है क्योंकि कम लोगों के होने से संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है। यहां तीन शब्द एच-एफ-एस पर जोर है। हैंड, फेस और स्पेस।

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टीकाकरण से पहले बताना चाहिए कि किसी को क्या एलर्जी है...

टीकाकरण के बाद कई बार मरीज की तबीयत बिगडऩे का कारण व्यवस्था की खामी है। हर वैक्सीन के उपर इसकी पूरी जानकारी होती है कि किस मरीज को किससे व क्या एलर्जी है। हर मरीज से टीकाकरण से पहले पूछा जाना चाहिए, ताकि ये स्पष्ट हो सके कि उसे टीका लगाना है नहीं। अमेरीका में टीकाकरण के बाद एलर्जी की शिकायतें खूब बढ़ी थी। यूके की फायजर और अमेरीका की मोर्डना के टीकाकरण के बाद एलर्जी की समस्या ज्यादा सामने आई थी।

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(डॉ प्रशांत पुरोहित यूके के नोटिंगमशायर देश के सूटोन-इन-एशफील्ड शहर के किंग्स मिल हॉस्पिटल में माइक्रोबायोलॉजी कंसलटेंट हैं।)

bhuvanesh pandya
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