जननी की जान पर मंडराता एनिमिया का खतरा

- चिकित्सा विभाग : दस माह में मिली 850 से अधिक महिलाएं
- तत्कालीन कलक्टर के चलाए अभियान में सामने आई हकीकत

 

By: bhuvanesh pandya

Published: 24 Jul 2020, 08:12 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. जिले में बीते दस माह में 850 से अधिक गंभीर एनिमिक गर्भवती महिलाएं चिकित्सा विभाग के सामने आई है। विभाग ने उनका सुरक्षित प्रसव करवाया और जच्चा और बच्चा दोनों को सुरक्षा कवच प्रदान किया। इस तरह का एनिमिया किसी भी गर्भवती और उसके शिशु के लिए चिकित्सकीय पहलू पर खतरनाक माना जाता है। सात से कम हिमोग्लोबिन पर गंभीर एनिमिया होता है।

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ऐसे चला अभियान

तत्कालीन कलक्टर आनन्दी ने उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं के चिह्निकरण के लिए अभियान चलाया था। प्रदेश में अपनी तरह का ये विशेष अभियान था।
- आशा सहयोगिनी व एएनएम गंभीर एनिमिक महिलाओं का चयन कर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लाई थी।

- वहां चिकित्सकीय जांच के बाद महिलाओं को एम्बुलेंस से एमबी हॉस्पिटल और अन्य चिह्नित संस्थानों पर रेफर किया गया। महिलाओं को जरुरत के अनुसार रक्त चढ़ाया गया। इससे कमजोरी दूर हो और स्वस्थ्य शिशु का जन्म हो सके।
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ब्लॉक अनुसार एनिमिक गर्भवती
ब्लॉक -- संख्या

बडग़ांव -- 52
भींडर -- 80

गिर्वा -- 126
गोगुन्दा -- 49

झाड़ोल -- 51
खेरवाड़ा -- 45

कोटड़ा -- 53
लसाडिय़ा -- 29

मावली -- 119
ऋषभदेव -- 41

सलूम्बर -- 41
सराड़ा -- 125

कुल संख्या -- 860
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एनिमिया के प्रकार
- आयरन डेफि सिएंसी एनिमिया

- थैलिसीमिया
- पर्निसियस

- सिकल सेल एनिमिया
- मेगैलोब्लास्टिक एनिमिया

- एप्लास्टिक एनिमिया
- विटामिन डेफि सिएंसी एनिमिया

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हिमोग्लोबिन की कमी से असर

रक्त अल्पता का अर्थ खून की कमी है। यह लाल रक्त कोशिका में पाए जाने वाले हिमोग्लोबिन की संख्या में कमी आने से होती है। हिमोग्लोबिन के अणु में अनचाहे परिवर्तन आने से भी खून की कमी के लक्षण प्रकट होते हैं। हिमोक्लोबिन पूरे शरीर में ऑक्सीजन को प्रवाहित करता है। इसकी संख्या में कमी आने से शरीर मे ऑक्सीजन की आपूर्ति में भी कमी आती है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है। सामान्यत हिमोग्लोबिन की मात्रा 12.0 से 15.5 होनी चाहिए।
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खानपान में कमी
उदयपुर में एनिमिया की समस्या आम बात है। सात से कम हिमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाओं को जान का खतरा रहता है। यदि मां में खून की कमी है तो बच्चे में पूर्ति नहीं होगी। महिलाओं का खानपान बेहतर नहीं होने से उन्हें पोषण पूरा नहीं मिल पाता। ऐसे में मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा होता है। ऐसे में प्रसव में दिक्कतें आती है।

डॉ. मधुबाला चौहान, अधीक्षक, पन्नाधाय जनाना हॉस्पिटल
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तत्कालीन जिला कलक्टर आनन्दी के निर्देश पर अभियान शुरू किया गया था, इसमें गंभीर एनिमिक माताओं की जान बची और अब जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
डॉ अशोक आदित्य, आरसीएचओ उदयपुर

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हमारा उदेश्य ऐसी कमजोर गर्भवती महिलाओं की जान बचाना है। उनका उपचार कर उन्हें गर्भधारण से लेकर प्रसव में परेशानी नहीं हो इसलिए ये अभियान लगातार चलाया जाएगा, ताकि मां और बच्चा दोनों सुरक्षित रहे।

डॉ लाखन पोसवाल, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज

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