नोटबंदी और जीएसटी ने लगाया रियल एस्टेट कारोबार पर ब्रेक, जमीनों के सौदों के आंकड़े भी गिरे धड़ाम से

नोटबंदी से एक वर्ष में सर्वाधिक प्रभावित रहा रियल एस्टेट कारोबार

By: madhulika singh

Published: 17 Nov 2017, 01:55 PM IST

उदयपुर . नोटबंदी से गत एक वर्ष में सर्वाधिक प्रभावित रहा रियल एस्टेट। उदयपुर में इस बाजार में सब कुछ थम गया, नई योजनाएं लाने से बिल्‍डर्स एवं डवलपर्स ने हाथ खींच लिए हैं और जो परियोजनाएं प्रस्तावित थी, वे रुक गई। मकान-फ्लैट खरीदने के लिए देखने आने वालों ने फिलहाल आशियाना का ख्याल ही छोड़ दिया। नोटबंदी के बाद रुपए का ट्रांजेक्शन रुक गया। इस क्षेत्र में बड़ी राशि का निवेश कर चुके उद्यमी बोलते हैं कि पता नहीं, अब कब बाजार सुधरेगा पता नहीं। नोटबंदी का असर आम आदमी के अलावा ज्वैलरी बाजार में दिखने को मिला।

 

नवरत्न कॉम्पलेक्स, हिरणमगरी, मीरानगर, चित्रकूट नगर, सेक्टर 14 हो या बीच शहर में सब जगह जो प्रोजेक्ट चल रहे थे, उनमें रुकावट सी आ गई। जिन्होंने व्यावसायिक या आवासीय फ्लैट खरीदने के लिए बुकिंग कराई या मानस बनाया, उन्होंने अपने कदम पीछे ले लिए। उनका कहना है कि नोटबंदी के बाद पैसा कहां है, अब नहीं लेनी प्रॉपर्टी। ऐसी स्थिति कई बिल्डर्स के साथ हुई। उदयपुर में जमीनों के सौदों के जो पंजीयन उप पंजीयन कार्यालय प्रथम व द्वितीय में होते हैं। उनके आंकड़ों में भी बड़ा अंतर आ गया। उप पंजीयक कार्यालय द्वितीय का क्षेत्र बड़ा होने से वहां से उप पंजीयक प्रथम से ज्यादा पंजीयन होता है लेकिन वहां के अांकड़े भी पहले के सालों से नीचे हो गए।

 

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बहुत असर आया है, बाजार ही खत्म हो गया है। नोटबंदी के बाद बैंकों में राशि जमा होने से बाजार में धन रहा ही नहीं। बाजार उठने की उम्मीद कर रहे थे, तो जीएसटी आ गई। रियल इस्टेट कारोबार का असर इस कदर रहा कि इससे जुड़ी चेन वाले सारे लोगों को रोजगार अटक गया है।
हेमंत छाजेड़, अध्यक्ष, उदयपुर डवलपर्स एसो.


बिल्डिंग लाइन में बड़ी रुकावट आ गई है। रुपए का बाजार में लेन -देन रुकने के साथ ही व्यापार चौपट हो गया है। बाजार में रुपए का रोटेशन रुक सा गया। वैसे भी गत तीन सालों से कोई बड़ा प्रोजेक्ट उदयपुर में नहीं आया क्योंकि बाजार में मंदी थी। नोटबंदी के बाद बाजार थम सा गया और पहले सर्विस टैक्स चार प्रतिशत लगता था और अब 12 प्रतिशत सर्विस टैक्स हो गया जिससे बाजार पूरा प्रभावित हुआ है।
ऋषभ भाणावत, बिल्डर


इस लाइन में बिजनेस खत्म ही हो गया है। रात-दिन मेहनत कर हम हिम्मत जुटाते थे तब रिटर्न मिलता था, लेकिन अब इस मंदी के चलते कोई रुचि नहीं ले रहा है। इस क्षेत्र में कई लोगों को रोजगार प्रभावित हो गया है और समीकरण बिगड़ गए है, स्थितियां सुधरेगी लेकिन तब तक तो सब कुछ चौपट हो गया है।
महेन्द्रपाल छाबड़ा, सदस्य, बिल्डर्स एसो.

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